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हिंदी सिनेमा में पीक पर रहते हुए विनोद खन्ना ने शोहरत और सफल करियर को छोड़कर आध्यात्म का रास्ता चुना, जिसने पूरी इंडस्ट्री को हैरान कर दिया. उनकी दूसरी पत्नी कविता खन्ना ने खुलासा किया कि यह फैसला अचानक नहीं था, बल्कि विनोद खन्ना का हमेशा से आध्यात्म की तरफ झुकाव रहा था. कविता के मुताबिक विनोद खन्ना बिना कपड़ों के चौपाटी पर ध्यान करते थे.

विनोद खन्ना
नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा में विनोद खन्ना का नाम शोहरत, स्टाइल और सुपरस्टारडम का पर्याय था. वो अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना को टक्कर दिया करते थे, लेकिन करियर के पीक पर विनोद खन्ना ने एक ऐसा फैसला लिया जिसने सबको हैरान कर दिया था. करियर के पीक पर विनोद खन्ना ने फिल्मों, दौलत और फैन फॉलोइंग से दूरी बना ली और वो निकल पड़े आत्म शांति की तलाश में.
सालों बाद, विनोद खन्ना की दूसरी पत्नी कविता खन्ना ने इस फैसले के पीछे की कहानी साझा की. स्क्रीन की रिपोर्ट के मुताबिक दिवंगत एक्टर की पत्नी ने उनके जीवन के अनसुने राज साझा किए. उन्होंने बताया कि विनोद खन्ना का झुकाव आध्यात्म की ओर अचानक नहीं था. बचपन से ही वे सवाल पूछने वाले और अपने भीतर झांकने वाले इंसान थे.
17 साल की उम्र से योगी बनना चाहते थे विनोद खन्ना
कविता खन्ना कहती हैं कि महज 17 साल की किशोर उम्र में ‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ योगी’ जैसी किताबें पढ़ना और जीवन के गहरे अर्थों को समझने की कोशिश करना शुरू कर दिया था. ये सब आदतें उनके स्वभाव का हिस्सा था, लेकिन असली मोड़ तब आया, जब निजी जीवन में लगातार दुखों ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया.
मां की मौत से टूट गए थे एक्टर
विनोद खन्ना की जिंदगी में एक अहम मोड़ा तब आया जब उन्होंने अपनी मां को खो दिया. परिवार में एक के बाद एक मौतों ने उस सुपरस्टार को अकेला कर दिया, जिसे दुनिया सबसे मजबूत समझती थी. मां की मौत के बाद उनपर मानों दुखों का पहाड़ ही टूट पड़ा और अपनी जिंदगी का मकसद ढूंढने के लिए वो ओशो की शरण में जा पहुंचे.
ओशो आश्रम में माली थे विनोद खन्ना
ओशो के ओरेगन आश्रम में विनोद खन्ना की जिंदगी पूरी तरह बदल गई. वहां न वे स्टार थे, न सेलिब्रिटी बल्कि वो बस एक सेवक के तौर पर अपनी जिंदगी बिता रहे थे. वे माली के रूप में काम करते थे, पेड़ों-पौधों की देखभाल करना ही उनकी सेवा थी. कविता के मुताबिक अहंकार से दूर रहने और साधारण जीवन में असाधारण अर्थ खोजना के लिए ओशो के शरण में जाना ही विनोद खन्ना का एकमात्र तरीका था.
चौपाटी पर बिना कपड़ों के ध्यान करते थे विनोद खन्ना
कविता खन्ना के मुताबिक ओशो के आश्रम में जाने से पहले ही विनोद खन्ना मुंबई में रहते हुए वे चौपाटी बीच पर ध्यान करते थे. वो चौपाटी बीच पर बिना कपड़ों के ध्यान करते थे. कविता ने साफ किया कि उन्होंने ये कदम किसी को प्रभावित करने के लिए या कोई प्रदर्शन करने के लिए नहीं बल्कि गहरी आस्था और समर्पण से भरी आध्यात्मिक खोज थी.
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प्रांजुल सिंह 3.5 साल से न्यूज18 हिंदी से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने Manorama School Of Communication (MASCOM) से जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन में डिप्लोमा किया है. वो 2.5 साल से एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रही है…और पढ़ें
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February 08, 2026, 13:01 IST





