दो साल पहले हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और अमेरिकी डिफेंस कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) एयरोस्पेस के बीच लड़ाकू विमान इंजन बनाने के लिए हुए समझौते पर अब कमर्शियल बातचीत शुरू होने जा रही है. सूत्रों के मुताबिक, अगले तीन महीनों के भीतर बातचीत पूरी कर इस सौदे को अंतिम रूप देने का लक्ष्य है. इस समझौते के तहत भारत में F414 इंजन का उत्पादन होगा, जो इंडियन एयरफोर्स के लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) Mk2 को शक्ति देगा. जून 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान HAL और GE के बीच इस इंजन निर्माण पर समझौता ज्ञापन (MoU) साइन हुआ था. इसके बाद अमेरिकी कांग्रेस ने अगस्त 2023 में इस सौदे को मंजूरी भी दे दी थी, लेकिन व्यावसायिक शर्तों पर सहमति बनाने में दो साल लग गए.

80 प्रतिशत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर
‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि GE एयरोस्पेस ने गहन बातचीत के बाद भारत को 80% टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने पर सहमति जताई है. हालांकि, इंजन के कुछ अहम हिस्सों की तकनीक (जैसे कम्प्रेसर, कम्बशन चैंबर और टर्बाइन) अभी भी ट्रांसफर के दायरे में नहीं हैं. साल 2012 में GE केवल 58% तकनीक देने पर सहमत हुई थी, लेकिन अब 12 अहम तकनीकों का हस्तांतरण किया जा रहा है. इसमें टर्बाइन ब्लेड्स के लिए सिंगल क्रिस्टल की मशीनिंग और कोटिंग, नोजल गाइड वेन और हॉट-एंड पार्ट्स की कोटिंग जैसी तकनीकें शामिल हैं. अधिकारियों ने बताया कि बातचीत पूरी होने के बाद तीन साल के भीतर इंजन का उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य है, ताकि LCA Mk2 के ऑर्डर और प्रोटोटाइप परीक्षण के साथ ही इंजन का निर्माण हो सके.
5th जेनरेशन फाइटर जेट

पीएम मोदी का आह्वान
प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने हालिया स्वतंत्रता दिवस संबोधन में देश के वैज्ञानिकों और युवाओं से आह्वान किया था कि वे स्वदेशी इंजन बनाने की चुनौती को स्वीकार करें. उन्होंने कहा था, ‘जैसे हमने कोविड के दौरान वैक्सीन बनाई और डिजिटल भुगतान के लिए UPI दिया, वैसे ही हमें अपने फाइटर जेट्स के लिए इंजन भी खुद बनाने होंगे.’ अब तक भारत के स्वदेशी इंजन बनाने के प्रयास सफल नहीं हो सके हैं, क्योंकि लड़ाकू विमानों के इंजन बनाना अत्यंत जटिल तकनीक पर आधारित है, जिसे केवल चुनिंदा देशों ने ही हासिल किया है. लेकिन, HAL-GE और DRDO-Safran समझौते से भारत की आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ी छलांग मानी जा रही है.





