इजरायल संग इंडिया में बन रही स्पाइक मिसाइल
भारत ने तब लगभग 210 स्पाइक मिसाइलें और 12 लॉन्चर इजरायल से खरीदे थे. इसकी कीमत करीब ₹280 करोड़ थी. भारत और इज़रायल मिलकर स्पाइक मिसाइल का भारत में निर्माण भी करने की योजना बना रहे हैं. इसके लिए DRDO और इजरायल की Rafael कंपनी की साझेदारी में “मेक इन इंडिया” के तहत काम चल रहा है. हालांकि भारत स्वदेशी नाग (Nag ATGM) और हेलिना जैसी मिसाइलें भी बना रहा है.
लंबाई: लगभग 1.2 मीटर
वजन 28 किलो (मिसाइल: 14 KG + लॉन्चर 12-14 KG)
पैदल सैनिक को स्पाइक बनाती है टैंक डिस्ट्रॉयर
स्पाइक मिसाइल आधुनिक युद्ध का एक गेमचेंजर हथियार है. इसकी सबसे बड़ी ताकत है – दूर से वार करने की क्षमता, बेहद सटीक गाइडेंस और मल्टी-प्लेटफॉर्म लचीलापन. जहां एक ओर यह पैदल सैनिक को “टैंक डेस्ट्रॉयर” बना देती है, वहीं दूसरी ओर एयरफोर्स और नेवी भी इससे दुश्मन पर दूर से सटीक वार कर सकती हैं यही वजह है कि आज यह मिसाइल न सिर्फ इज़रायल की सुरक्षा ढाल है, बल्कि दुनिया भर की सेनाओं के शस्त्रागार की शान भी बन चुकी है.
Spike-SR (शॉर्ट रेंज) : 50 मीटर से 1.5 किलोमीटर तक.
Spike-LR (लॉंग रेंज) : 4 किलोमीटर तक.
Spike-ER (एक्सटेंडेड रेंज) : 8 किलोमीटर तक.
स्पाइक मिसाइल क्यों इतनी खास?
फायर-ऑब्जर्व-एंड-अपडेट : ऑपरेटर चाहे तो उड़ान के दौरान भी टारगेट बदल सकता है.
डे-नाइट ऑपरेशन: थर्मल इमेजिंग सीकर के जरिए दिन और रात दोनों में एक जैसी क्षमता.
हाई प्रिसिजन : यह मिसाइल GPS और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल गाइडेंस सिस्टम से लैस.
कहां-कहां इस्तेमाल हुई स्पाइक मिसाइल
अजरबैजान-आर्मेनिया युद्ध (2020) : नागोर्नो-काराबाख संघर्ष में अजरबैजान ने स्पाइक मिसाइल से आर्मेनियाई टैंकों और ठिकानों को निशाना बनाया.
यूरोप : लिथुआनिया, पोलैंड और रोमानिया जैसी सेनाएं रूस की आक्रामकता को देखते हुए इसका इस्तेमाल करती हैं.
किन-किन देशों के पास है?
भारत, जर्मनी, स्पेन, पोलैंड, लिथुआनिया, इटली, कोलंबिया, पेरू, सिंगापुर, फिलीपींस, वियतनाम, अज़रबैजान, चिली और दक्षिण कोरिया समेत 30 से ज्यादा देशों की सेनाओं में यह शामिल है.





