भारत की इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमताओं की शुरुआत 1980 और 1990 के दशक में सीमित आयात और घरेलू प्रयासों से हुई थी, लेकिन पिछले एक दशक में डीआरडीओ (DRDO) के रिसर्च, सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं और निजी कंपनियों की साझेदारी ने इसे नई गति दी है. DRDO और BEL द्वारा विकसित तकनीक दुश्मन के संचार नेटवर्क को ट्रैक और ब्लॉक करने में सक्षम. शक्ति EW सूट नेवी के जहाजों को पूर्ण इलेक्ट्रॉनिक समर्थन और काउंटरमेज़र्स प्रदान करता है. वहीं, दिव्य दृष्टि लंबी दूरी से सिग्नल मॉनिटर करने के लिए रणनीतिक प्लेटफॉर्म. अब इस क्षेत्र में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, एलएंडटी डिफेंस, डेटा पैटर्न्स और सेंटम इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी निजी कंपनियां भी एक्टिव हो गई हैं.

6th जेनरेशन फाइटर जेट से युद्ध की तस्वीर बदलने की संभावना है. (सांकेतिक तस्वीर)
₹1.5 लाख करोड़ का इन्वेस्टमेंट
सरकारी नीतियां और प्रोत्साहन
रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP 2020) और पॉजिटिव इंडिजेनाइजेशन लिस्ट ने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया है. इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर के लिए PLI योजना और गुजरात और कर्नाटक में सेमीकंडक्टर फैब स्थापित करने की पहल इस इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रही है.

भारत तेजस फाइटर जेट डेवलप कर रहा है, जो मल्टीरोल जेट है. (पीटीआई)
इनोवेशन दिखा रहा नई राह
मिनीचुराइज्ड EW सिस्टम: ड्रोन आधारित इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और एंटी-ड्रोन क्षमताएं.
स्पेस-बेस्ड EW: उपग्रहों के जरिए इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस जुटाने की पहल.
ऑपरेशन सिंदूर बना नजीर
भारत पहले ही दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका के देशों को EW इक्विपमेंट निर्यात कर रहा है. सरकार का लक्ष्य है कि साल 2025 तक डिफेंस एक्सपोर्ट ₹35,000 करोड़ तक पहुंचे, जिसमें EW एक बड़ा योगदान देगा. बता दें कि मॉडर्न टाइम में इलेकट्रॉनिक वॉरफेयर युद्ध की दशा और दिशा को बदल रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तानी रडार सिस्टम पर इलेक्ट्रॉनिकली अटैक कर उसे डिसएबल कर दिया था. इस दौरान इंडियन फाइटर जेट ने कुछ ही मिनटों में पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों के ठिकानों को ध्वस्त कर दिया था.
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में बढ़त, युद्ध में बढ़त
एक्सपर्ट का मानना है कि EMS जमीन, जल और हवा जितना ही अहम है, जिस देश के पास इसका नियंत्रण होगा, वही युद्ध में बढ़त पाएगा. वहीं, बेंगलुरु स्थित एक डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी के अधिकारी का कहना है कि हमारा फोकस AI और मशीन लर्निंग को EW सिस्टम में जोड़ने पर है, ताकि वे बदलते हालात में खुद को ढाल सकें. फ्यूचर में भारतीय EW का मेल साइबर-इलेक्ट्रोमैग्नेटिक गतिविधियों, डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स और मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस के साथ होगा. 5G और उससे आगे की तकनीकें भी इसमें अहम भूमिका निभाएंगी. भारत के लिए इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर केवल सैन्य आवश्यकता नहीं, बल्कि रणनीतिक प्राथमिकता है. यह न सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए वैश्विक स्तर पर अवसर खोलेगा. आने वाले दशक में यही भारत के लिए सबसे बड़े B2B रक्षा उप-क्षेत्रों में से एक साबित हो सकता है.





