कानून मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश के 25 हाईकोर्ट में 40-50 साल पुराने 22,829, 30-40 साल पुराने 63,239, 20-30 साल पुराने 3.4 लाख और 10-20 साल पुराने 11.5 लाख मामले लंबित हैं. सबसे पुराना मामला 1951 से लंबित है, यानी इस केस के 74 साल हो चुके हैं, पर अभी तक इसका निपटारा नहीं हो सका है. कलकत्ता हाईकोर्ट के अलावा केवल आठ अन्य उच्च न्यायालयों में 50 साल से ज्यादा पुराने मामले लंबित हैं. इनमें मद्रास हाईकोर्ट (56 मामले), पटना हाईकोर्ट (46), इलाहाबाद हाईकोर्ट (17), तेलंगाना हाईकोर्ट (9), ओडिशा हाईकोर्ट (8), मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (4) के साथ ही बंबई और पंजाब-हरियाणा में दो-दो मामले पचास या उससे ज्यादा साल से लंबित हैं.
डिस्ट्रिक कोर्ट का परफॉर्मेंस बेहतर
जजों की कम संख्या
1 अगस्त तक हाईकोर्ट में स्वीकृत पद 1,122 हैं, जबकि कार्यरत जजों की संख्या 778 है. इस तरह 344 पद खाली हैं. इन रिक्तियों में से 138 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है, जबकि 206 पदों के लिए अब तक कोई सिफारिश नहीं आई है. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट समय-समय पर सभी हाईकोर्ट को 10 साल से ज्यादा पुराने मामलों को प्राथमिकता से निपटाने के निर्देश देता रहा है. सरकार ने अगस्त 2011 में नेशनल मिशन फॉर जस्टिस डिलीवरी एंड लीगल रिफॉर्म्स की शुरुआत की थी, जिसका मकसद न्यायिक प्रणाली में देरी और बैकलॉग को कम करना और जवाबदेही बढ़ाना है. सभी 25 हाईकोर्ट और जिला अदालतों में पांच साल से ज्यादा पुराने मामलों को निपटाने के लिए स्पेशल कमेटी भी गठित की गई है.





