तो फ्रिगेट यानी मीडियम साइज़ का लड़ाकू समुद्री जहाज़… एक तो होता है बड़ा वाला युद्धपोत, जिसे एयरक्राफ़्ट कैरियर कहते हैं. जैसे कि हमारा INS विक्रमादित्य… एयरक्राफ़्ट कैरियर इतना बड़ा होता है कि उसपर फ़ाइटर जेट भी होते हैं. आपने देखा होगा कि ये लड़ाकू विमान शिप से ही उड़ान भरते हैं और शिप पर ही लैंड करते हैं. एयरक्राफ़्ट कैरियर एक तरह से समुद्र में तैरता हवाई अड्डा है, जिस पर फ़ाइटर प्लेन भी होते हैं, हेलिकॉप्टर भी होते हैं.
SUV जैसी फ्रिगेट
उसके बाद आते हैं फ़्रिगेट… ये मीडियम साइज़ के जहाज़ होते हैं. होते ये भी समुद्री जहाज़ ही हैं, कोई छोटी बोट या बड़ी बोट टाइप के नहीं होते. ये भी समुद्र में दूर तक जा सकते हैं, पनडुब्बियों पर हमला कर सकते हैं, दूसरे युद्धपोतों पर हमला कर सकते हैं, यानी बड़े युद्धपोतों की तरह हमला भी कर सकते हैं और छोटी बोट की तरह पैट्रोलिंग का काम भी कर सकते हैं. निगरानी का काम भी कर सकते हैं, जासूसी का काम भी कर सकते हैं. मतलब अगर बड़े युद्धपोत ट्रक की तरह हैं और पैट्रोलिंग वाली बोट कार की तरह होते हैं, तो फ़्रिगेट समझ लीजिये कि नौसेना के SUV की तरह होते हैं, जो ताकतवर भी है और हर परिस्थिति में काम करने वाली भी.
रडार की नजरों से ओझल
इन फ़्रिगेट्स की बॉडी पर ख़ास कोटिंग और ऐंगल दिए गए हैं, जिससे रेडार की तरंगें टकराकर लौटती ही नहीं. इंजन में लगे साइलेंट सिस्टम की वजह से ये सोनार से बच निकलते हैं. गर्मी पकड़ने वाले इंफ़्रारेड सेंसर को भी ये जहाज़ धोखा दे देते हैं, क्योंकि इनमें ऐसी तकनीक लगी है जो इंजन से निकलने वाली गर्मी को कूल कर देती है. यही नहीं, इनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लो-पावर मोड में चलते हैं, जिससे दुश्मन के सेंसर कोई सिग्नल पकड़ ही नहीं पाते. वहीं, इनका ख़ास सिलेटी रंग इन्हें समुद्र में लगभग अदृश्य बना देता है.
दुश्मन को बचने का मौका तक नहीं
यानी दुश्मन के जहाज़ को ज़रा भी अंदाज़ा नहीं होता कि पास ही भारतीय स्टेल्थ फ़्रिगेट मौजूद है. जबकि आईएनएस उदयगिरि और हिमगिरि अपने एडवांस्ड सेंसरों की मदद से दुश्मन को पहले ही पकड़ लेते हैं और उस पर ब्रह्मोस मिसाइल दाग सकते हैं. यह स्थिति कुछ वैसी ही है जैसे दुश्मन को हवा से अचानक मिसाइल प्रकट हो गई हो, लेकिन यह पता ही न चले कि हमला कहां से हुआ.





