ब्रासीलिया/वॉशिंगटन: ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से साफ शब्दों में कहा है कि अगर अमेरिका को ब्राजील के साथ आर्थिक साझेदारी मजबूत करनी है, तो उसे ब्राजील के उत्पादों पर लगाए गए 40% टैरिफ को हटाना होगा. सोमवार को दोनों नेताओं के बीच हुई 30 मिनट की फोन बातचीत में लूला ने यह संदेश दोटूक शब्दों में दिया. ब्राजील के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने फोन नंबरों का आदान-प्रदान किया और आगे संवाद जारी रखने पर सहमति जताई. बातचीत के दौरान लूला ने ट्रंप को बेलेम (Belem) में होने वाले आगामी जलवायु शिखर सम्मेलन (Climate Summit) में भाग लेने के लिए आमंत्रित भी किया.
दोस्ती हो तो बराबरी की शर्तों पर
लूला ने ट्रंप से बातचीत में कहा, ब्राजील निष्पक्ष व्यापार का समर्थन करता है. हम साझेदारी चाहते हैं, पर शर्त यह है कि हमें समान व्यवहार मिले. अगर 40% टैरिफ नहीं हटाया गया, तो हमारे उद्योग और किसान बुरी तरह प्रभावित होंगे. लूला का यह बयान न सिर्फ आर्थिक बल्कि राजनीतिक संदेश भी है. वह यह दिखाना चाहते हैं कि ब्राजील अमेरिका का सहयोगी रहते हुए भी अपनी आर्थिक संप्रभुता पर समझौता नहीं करेगा.
ट्रंप प्रशासन का तर्क
व्हाइट हाउस के प्रवक्ताओं के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने इन टैरिफों को आर्थिक आपातकाल के तहत उचित ठहराया है. प्रशासन का कहना है कि ब्राजील की आंतरिक नीतियां और पूर्व राष्ट्रपति जैर बोल्सोनारो के खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमे अमेरिकी निवेशकों के लिए जोखिम पैदा कर रहे हैं. बोल्सोनारो ने 2022 के चुनाव में लूला से हार मानने से इंकार कर दिया था. उन्हें हाल ही में 27 साल और तीन महीने की सजा सुनाई गई है. सुप्रीम कोर्ट के पैनल ने उन्हें तख्तापलट की साजिश रचने का दोषी पाया है. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि बोल्सोनारो के मुकदमे ने ब्राजील की राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता को कमजोर किया है, इसलिए अमेरिकी व्यापारिक हितों की सुरक्षा के लिए टैरिफ लगाना जरूरी था.
व्हाइट हाउस चुप, ब्राजील आक्रामक
ट्रंप प्रशासन ने अभी तक इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. व्हाइट हाउस से जब मीडिया ने संपर्क किया, तो “नो कमेंट” कहकर जवाब टाल दिया गया. वहीं ब्राजील सरकार ने अपने बयान में कहा है कि वह इस मुद्दे पर किसी भी स्तर की बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन झुकने के मूड में नहीं है. लूला के करीबी सूत्रों ने स्थानीय मीडिया को बताया कि राष्ट्रपति ने यह मुद्दा व्यक्तिगत स्तर पर उठाया ताकि ट्रंप को यह संकेत दिया जा सके कि अगर अमेरिका व्यापार सहयोग चाहता है, तो उसे ब्राजील के हितों का सम्मान करना होगा.
यूएन में हुई थी पहली मुलाकात
लूला और ट्रंप की पहली आमने-सामने मुलाकात पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान न्यूयॉर्क में हुई थी. उस समय दोनों नेताओं ने वैश्विक जलवायु परिवर्तन और दक्षिणी देशों की आर्थिक स्थिति पर चर्चा की थी. अब फोन पर हुई इस बातचीत को उस मुलाकात का विस्तार माना जा रहा है. लूला ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह खुद वॉशिंगटन जाकर ट्रंप से मुलाकात करेंगे, ताकि दोनों देशों के बीच तनाव को कम किया जा सके.
भारत-जैसी स्थिति में ब्राजील
विश्लेषकों का कहना है कि यह स्थिति कुछ हद तक भारत-अमेरिका व्यापार तनाव जैसी है. 2018 और 2019 में अमेरिका ने भारत पर भी स्टील और एल्युमिनियम उत्पादों पर भारी ड्यूटी लगाई थी, जिसका जवाब भारत ने अमेरिकी वस्तुओं पर 28% तक शुल्क लगाकर दिया था. ब्राजील में भी अब इसी तरह की आवाज उठ रही है कि अगर अमेरिका टैरिफ नहीं हटाता, तो ब्राजील भी जवाबी कदम उठा सकता है. स्थानीय उद्योग मंडलों ने सरकार से कहा है कि “अब वक्त है अमेरिका को बराबरी का जवाब देने का. ब्राजील के निर्यात का बड़ा हिस्सा कृषि उत्पादों, स्टील और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से आता है. अमेरिका इन क्षेत्रों के लिए प्रमुख बाजार है.40% टैरिफ का असर यह होगा कि ब्राजील के उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे, जिससे ब्राजील के किसानों, स्टील कंपनियों और निर्माण उद्योग को बड़ा झटका लगेगा. ब्राजील के वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अगर यह टैरिफ एक साल तक जारी रहा तो इससे देश को लगभग $5 बिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है.





