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भारत में ITRCM मिसाइल विकसित की है, जो 1000 किमी से अधिक दूरी तक मार करने में सक्षम है. ये मिसाइल ब्रह्मोस का भी बाप है. DRDO द्वारा विकसित यह मिसाइल न्यूक्लियर पेलोड ले सकेगी और भारत की रणनीतिक ताकत बढ़ाएगी. स…और पढ़ें
भारत की सैन्य ताकत लगातार बढ़ती जा रही है. (File Photo)स्वदेशी सिस्टम और नेविगेशन से लेस
भारत ने साल 2000 के दशक में रूस के सहयोग से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल का विकास किया, जो दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइलों में से एक है. लेकिन भारत को लंबे समय से अपनी पूरी तरह स्वदेशी लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल की जरूरत थी. यही आवश्यकता आगे चलकर ITRCM प्रोजेक्ट की नींव बनी.
इस मिसाइल का विकास स्वदेशी इंजन, नेविगेशन सिस्टम और गाइडेंस टेक्नोलॉजी के साथ किया जा रहा है. इसे लॉन्च करने के लिए विभिन्न प्लेटफॉर्म यानी जमीन, समुद्र और हवा से परीक्षण की योजना है.
ITRCM की रेंज 1000 किलोमीटर से अधिक होगी, जो इसे भारत की सबसे लंबी दूरी की क्रूज़ मिसाइल बना सकती है. यह मिसाइल कम ऊंचाई पर उड़ान भरकर दुश्मन की राडार से बचने में सक्षम होगी. इसमें उन्नत टर्बोफैन इंजन लगाया गया है, जो लंबी दूरी तक स्थिर उड़ान सुनिश्चित करती है. गाइडेंस सिस्टम में स्वदेशी GPS-NavIC आधारित तकनीक का उपयोग किया जा रहा है. यह कन्वेंशनल और न्यूक्लियर पेलोड ले जाने की क्षमता रखेगी.
नौसेना पर खास नजर
ITRCM भारत को क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर नई ताकत देगी. पाकिस्तान और चीन पहले से ही लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों पर काम कर रहे हैं. ऐसे में ITRCM भारत को डिटरेंस (निवारण) क्षमता में बढ़त दिलाएगी. इसके जरिये भारत अपने रणनीतिक लक्ष्यों को सुरक्षित दूरी से भेद सकेगा. यह नौसेना के लिए खास तौर पर उपयोगी होगी क्योंकि समुद्री सीमाओं पर यह दुश्मन की पनडुब्बियों और ठिकानों को निशाना बना सकेगी.
भविष्य की दिशा
स्टील्थ बनाने की भी तैयारी
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ITRCM भारत की मिसाइल ट्रायड को और मजबूत करेगी. जमीन, हवा और समुद्र आधारित हथियार प्रणाली तैयार की जा रही है. भविष्य में इस मिसाइल को स्टील्थ टेक्नोलॉजी से लैस किया जा सकता है, ताकि दुश्मन की आधुनिक एंटी-मिसाइल डिफेंस को भी चकमा दिया जा सके. साथ ही इसे हाइपरसोनिक वर्ज़न में अपग्रेड करने पर भी काम हो सकता है, जैसा कि ब्रह्मोस-II प्रोजेक्ट में देखा जा रहा है.

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें
पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और… और पढ़ें
August 18, 2025, 05:01 IST





