कुक्कू मोरे को 40 और 50 के दशक में ‘रबर गर्ल’ कहा जाता था. क्योंकि उनके डांस में ऐसी लचक और फुर्ती थी कि लोग हैरान रह जाते थे. कैबरे डांस को उन्होंने बॉलीवुड में पहचान दिलाई. उन्होंने अपनी जवानी को आलिशान तरह से काटी लेकिन जीवन के आखिरी दिनों में दो वक्त की रोटी और पाई-पाई के लिए मोहताज हो गईं.
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कुक्कू मोरे 1940 और 1950 के दशक में बॉलीवुड में अपने कैबरे और क्लब परफॉर्मेंस के लिए जानी जाती थीं.
रईसी में गुजरी जवानी
कुक्कू मोरे अपने दौर की वो हसीना रहीं, जिनके लिए कहा जाता है कि उन्होंने भरी जवानी आलीशान तरीके से काटी. उनकी अलमारी डिजाइनर ड्रेसेस और महंगे फुटवियर्स से भरी रहती थी. वह कोई भी कपड़ा दोबारा तन पर नहीं पहनती और न ही फुटवियर. कुक्कू की रईसी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब हीरो साइकिल से सेट पर पहुंचा करते थे, तब इनके पास 3 लग्जरी गाड़ियां थीं. एक गाड़ी तो इन्होंने अपने कुत्तों के लिए खरीद रखी थी, जिसमें उन्हें साथ सेट पर और घुमाने ले जाया जाता था. दूसरी गाड़ी इन्होंने अपने लिए खरीद रखी थी और तीसरी दूसरे कामों में इस्तेमाल की जाती थी.
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कुक्कू ने अपने डांस परफॉर्मेंस से सबके दिलों में एक गहरी छाप छोड़ी.
नहीं करती थी पैसे की कद्र, खुद को माना गरीबी का जिम्मेदार
कहते हैं न कि पैसे की जो कद्र नहीं करता पैसा उसकी भी नहीं करता है, ऐसा ही कुछ कुक्कू के साथ भी हुआ. तबस्सुम ने अपने शो तबस्सुम टॉकीज में कुक्कू के बारे में बताया था कि वो अपनी गरीबी का जिम्मेदार खुद को मानती थीं. कुक्कू ने एक बार तबस्सुम से कहा था, ‘जब मेरे पास बेतहाशा पैसे थे तब मैंने उसकी कद्र नहीं की. मैंने पैसों को पानी की तरह बहाया. मैंने पैसों से प्यार किया, लेकिन मेरी जिंदगी में दिक्कतें तब शुरू हुईं, जब मैंने खाने की कद्र नहीं की. उन्होंने बताया कि कुक्कू बड़े-बड़े 5-स्टार होटलों से खाना मंगवाती थीं, दोस्तों को खिलाती थीं, खुद भी खाती थीं, जो बच जाता था उसे फेंक दिया करती थीं. ऊपरवाले को उनकी ये बेतरतीबी पसंद नहीं आई और फिर वो दिन भी आया जब वह एक-एक दाने को मोहताज हो गई. कभी शान से नौकरों से घिरी रहने वालीं कुक्कू खुद अपने घर के सारे काम करती थीं.

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गरीबी में सड़ी सब्जियों को पकाकर खाईं
कैंसर की दवाइयों तक के लिए नहीं थे पैसे
1963 के बाद कुक्कू मोरे गरीबी के कारण लोगों से दूर होती गईं और फिर धीरे-धीरे लोगों ने भी उनको पूछना बंद कर दिया. 1980 में उन्हें कैंसर हो गया, लेकिन गरीबी ऐसी कि दवाइयों के पैसे तक नहीं होते थे. 1981 में कुक्कू को टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने 30 सितंबर को दम तोड़ दिया था. इतना बड़ा नाम होने के बाद भी आखिरी समय में विदाई देने के लिए उनके पास कोई नहीं था.





