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बॉलीवुड का स्टार सिंगर-म्युजिशियन, 1 साल में 33 फिल्में और दिए 180 गाने, 500 से ज्यादा फिल्मों का दिए म्युजिक

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मुंबई. अलोकेश लाहिरी ने डिस्को बीट्स के साथ बॉलीवुड म्युजिक को नया रूप दिया. उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि 1986 में रही. उन्होंने एक साल में 33 फिल्मों के साथ 180 से ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह बनाई. बप्पी दा का जन्म एक संगीत परिवार में हुआ. पिता अपरेश लाहिरी और मां बंसरी लाहिरी दोनों प्रसिद्ध बंगाली गायक-संगीतकार थे. तीन साल की उम्र से क्लासिकल तबला बजाने वाले बप्पी दा ने पंडित शांताप्रसाद से शिक्षा ली.

लता मंगेशकर ने बचपन में बप्पी लाहिरी तबला की तारीफ की थी. 11 साल की उम्र में पियानो और ट्यून बनाना शुरू किया. उन्होंने हिंदी, बंगाली और दक्षिण भारतीय भाषाओं में 5 हजार से ज्यादा गाने कंपोज किए और 500 से अधिक फिल्मों में संगीत दिया. उनकी फिल्मों में ‘डिस्को डांसर’, ‘नमक हलाल’, ‘थानेदार’, और ‘शराबी’ जैसी हिट फिल्में शामिल हैं. ‘तम्मा तम्मा लोगे’, ‘जिमी जिमी आ जा’, ‘रात बाकी है’, और ‘पग घुंघरू बांध मीरा नाचती’ जैसे गाने पीढ़ियों को नचाते रहे. उन्होंने खुद कई गाने गाए और मिथुन चक्रवर्ती के साथ डिस्को कल्चर को लोकप्रिय बनाया.

बप्पी लाहिरी का निधन 15 फरवरी 2022 को हुआ था.

हालांकि, एक समय ऐसा भी आया जब 500 से ज्यादा फिल्मों का संगीत तैयार करने वाले डिस्को किंग ने बदलते दौर पर खुलकर अपनी राय रखते हुए कहा कि अब उन्हें काम में ज्यादा मजा नहीं आता. एक इंटरव्यू के दौरान बप्पी दा ने कहा था, “पहले का दौर मजेदार था. आरडी बर्मन (पंचम दा), लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, और कल्याणजी-आनंदजी जैसे संगीतकारों के साथ काम करने में मजा आता था. हर किसी का अलग स्टाइल था, और गाने याद रहते थे, जैसे टेस्ट मैच की तरह लंबे समय तक टिकते थे. अब का दौर अलग है.”

रिमिक्स होते गानों पर बप्पी लाहिरी ने जताई थी चिंता

बप्पी लाहिरी ने बताया था, “अब मजा नहीं आता. साल में दो फिल्में प्यार से करो, वही बेस्ट है. ओरिजिनैलिटी कम हो गई है, गाने जल्दी भूल जाते हैं जैसे वन-डे क्रिकेट मैच. मेरे ही पुराने हिट गाने रीमिक्स होकर चल रहे हैं, जैसे ‘रात बाकी,’ ‘पग घुंघरू,’ और ‘थोड़ा रेशम लगता है.’ मुझे अच्छा लगता है कि मेरे गाने मॉडर्न तरीके से जिंदा हैं, लेकिन मूल संगीत की कमी खलती है.” डिस्को किंग ने इंस्पिरेशन और कॉपी के फर्क को समझाया. ‘तम्मा तम्मा’ अफ्रीकन बीट से प्रभावित था, लेकिन अपना स्टाइल था. लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का ‘जुम्मा चुम्मा’ भी समान था, लेकिन दोनों ने अपना अंदाज रखा. आजकल पुराने गानों को तोड़-मरोड़कर इस्तेमाल किया जाता है.

माइकल जैक्शन से भी हुए थे बप्पी लाहिरी से इम्प्रेस

बप्पी लाहिरी से माइकल जैक्सन भी मुलाकात किए थे, जिसे डिस्को किंग ने बहुत यादगार बताया था. साल 1996 में जब माइकल जैक्सन मुंबई आए थे तो वह बाल ठाकरे के घर (मातोश्री) गए. वहां बप्पी दा को बुलाया गया था. जब माइकल ने उनकी ज्वेलरी का शौक पूछा तो बप्पी दा ने मजाक में कहा था कि यह उनका इमेज है, जैसे आपका कैप और हेयरस्टाइल. बप्पी दा ने इसे “बिग एक्सपीरियंस” बताया था. माइकल ने उन्हें अच्छे से इंट्रोड्यूस किया और उनकी ज्वेलरी की तारीफ की. खासकर उन्हें उनकी सोने की गणेश जी की पेंडेंट (चेन) को बहुत पसंद आई, और उन्होंने कहा, “आपको पसंद है?” बप्पी दा ने बताया कि माइकल जैक्सन दुनिया के सबसे बड़े परफॉर्मर में से एक थे. वह गा सकते थे, डांस भी कर सकते थे, और कंपोज भी कर सकते थे. खुद बप्पी दा ने कहा, “मैं गा और कंपोज तो कर लेता हूं, लेकिन डांस नहीं कर सकता.”

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