Last Updated:
Dharmendra Movie Song Trivia: एसडी बर्मन जब धर्मेंद्र की फिल्म ‘बहारें फिर भी आएंगी’ का संगीत कंपोज कर रहे थे, तब उन्हें उन्हें दिल का दौरा पड़ा. मुश्किल वक्त में एसडी बर्मन जिस सपोर्ट की उम्मीद कर रहे थे,वह ग…और पढ़ें
धर्मेंद्र का गाना हुआ फ्लॉप और देव आनंद का सुपरहिट. (फोटो साभार: YouTube@Videograb)1960 के दशक की शुरुआत में गुरु दत्त और एसडी बर्मन के रिश्तों में खामोश दरार पड़ गई थी. रिश्तों में मनमुटाव और दर्द आगे चलकर जब सुरों के रूप में सामने आया, तो कुछ कालजयी गाने वजूद में आए. 1956 में आई फिल्म ‘सीआईडी’ को ओपी नैय्यर ने संगीत दिया था, वहीं ‘प्यासा’ की धुनों को एसडी बर्मन ने तैयार किया था. कहते हैं कि ‘सीआईडी’ की रिलीज से पहले गुरु दत्त ने ओपी नैय्यर से वादा किया था कि अगर फिल्म हिट हुई, तो वे उन्हें गिफ्ट में कार देंगे, लेकिन आगे चलकर गुरु दत्त अपना वादा भूल गए, जिससे ओपी नैय्यर को ठेस पहुंची और दोनों का साथ छूट गया.
गुरु दत्त ने आगे चलकर धर्मेंद्र के साथ फिल्म ‘बहारे फिर भी आएंगी’ बनाने की योजना बनाई, जिसका संगीत रचने के लिए एसडी बर्मन को चुना, लेकिन यहां किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एसडी बर्मन को दिल का दौर पड़ा और डॉक्टरों ने उन्हें आराम की सलाह दी. गुरु दत्त ने जब सुना, तो उन्होंने एसडी बर्मन से कहा कि अगर आप काम नहीं कर सकते, तो मुझे नया संगीतकार लाकर दीजिए. एसडी बर्मन को उनकी बातों से ठेस पहुंची. उन्होंने कहा कि संगीत तैयार है, आप आरडी बर्मन को अपने साथ ले जाएं. मोहम्मद रफी के साथ फिल्म का टाइटल ट्रेक ‘बहारें फिर भी आएंगी’ रिकॉर्ड हो चुका था, लेकिन गुरु दत्त को भरोसा नहीं हुआ. उन्होंने ओपी नैय्यर से संपर्क किया और अपने किए के लिए माफी मांगी, जिसके बाद फिल्म के लिए नया संगीत तैयार हुआ.
टूटी दोस्ती और कलाकार के बदले की टीस
गुरु दत्त ने फिल्म ‘बहारें फिर भी आएंगी’से एसडी बर्मन का संगीत और मोहम्मद रफी का गाना बाहर कर दिया. वक्त गुजरता गया, लेकिन एसडी बर्मन उस अनदेखी को भूले नहीं पाए. उन्होंने ठुकराए संगीत को जिंदा करने का निर्णय किया और उन्हें यह मौका देव आनंद की फिल्म ‘ज्वेल थीफ’ से मिला. वह धुन जो ‘बहारें फिर भी आएंगी’ में रफी साहब की आवाज में जन्मी थीं, अब किशोर कुमार की आवाज में अमर हो गईं. एसडी बर्मन ने अपने संगीत को गाने ‘ये दिल न होता बेचारा’ में पिरो दिया. गाना बहुत मशहूर हुआ. विडंबना यह रही कि रफी साहब की आवाज में न वह पहला वर्जन उस वक्त सामने आया और न ही ‘ज्वेल थीफ’ के गाने की सफलता गुरु दत्त देख पाए. आज हम देव आनंद पर फिल्माया गाना ‘ये दिल न होता बेचारा’ सुनते हैं, तो उसमें रोमांटिक धुन के अलावा टूटी दोस्ती और कलाकार के बदले की टीस सुनाई देती है.
अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें
अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल… और पढ़ें
August 28, 2025, 16:46 IST





