विदेश » बंदूक दो और बदले में झोला भरकर कैश ले जाओ! मौत के सौदागरों को सरकार का खुला ऑफर, बस एक शर्त है

बंदूक दो और बदले में झोला भरकर कैश ले जाओ! मौत के सौदागरों को सरकार का खुला ऑफर, बस एक शर्त है

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पापुआ न्यू गिनी में कबीलाई संघर्ष और बढ़ती हिंसा ने आम लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. हालात को काबू में करने के लिए सरकार ने एक अनोखी और आक्रामक योजना शुरू की है. अब वहां के नागरिक अपने अवैध हथियार पुलिस को सौंपकर मोटा कैश कमा सकते हैं. यह स्कीम 27 फरवरी से शुरू हो चुकी है और अगस्त के अंत तक चलेगी. प्रधानमंत्री जेम्स मारापे का कहना है कि अवैध बंदूकें परिवारों और गांवों को पूरी तरह बर्बाद कर रही हैं. सरकार चाहती है कि लोग खुद आगे आएं और हिंसा का रास्ता छोड़ें. इस एमनेस्टी यानी माफी योजना के दौरान हथियार देने वालों पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी. पुलिस मंत्री सर जॉन पुंडारी ने इसे शांति के लिए एक ‘नेशनल मूवमेंट’ करार दिया है.

अवैध हथियार सरेंडर करने पर पैसे के अलावा और क्या मिलेगा?

सरकार ने साफ किया है कि यह सिर्फ एक पुलिस ऑपरेशन नहीं है बल्कि लोगों के भविष्य को सुधारने की कोशिश है. जो लोग अपनी बंदूकें जमा करेंगे, उन्हें न केवल कैश मिलेगा बल्कि खेती या छोटा बिजनेस शुरू करने के लिए सरकारी मदद भी दी जाएगी. पेमेंट की राशि हर राज्य के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है.

पुंडारी के मुताबिक, अगर यह प्रोग्राम एक भी नरसंहार को रोकने में कामयाब रहता है, तो इसे केवल इनाम नहीं बल्कि इंसानी जान बचाने के लिए एक ‘रणनीतिक निवेश’ माना जाना चाहिए. सरकार का लक्ष्य उन हजारों युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाना है, जिनके हाथों में बाहरी लोगों ने डर और अराजकता फैलाने के लिए हथियार थमा दिए हैं.

पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे (फाइल फोटो : रॉयटर्स)

हाइलैंड्स रीजन में ही सबसे ज्यादा हिंसा क्यों हो रही है?

पापुआ न्यू गिनी का हाइलैंड्स इलाका लंबे समय से जमीन के विवाद और कबीलाई दुश्मनी का केंद्र रहा है. पहले यहां पारंपरिक हथियारों से लड़ाई होती थी, जिसमें जानमाल का नुकसान कम होता था. लेकिन अब ग्रेनेड और हाई-पावर राइफलों के आने से यहां लाशों के ढेर लगने लगे हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक देश में करीब 1 लाख अवैध हथियार मौजूद हैं. इनमें से सिर्फ 12 परसेंट ही रजिस्टर्ड हैं.

सरकार का पूरा फोकस इस समय हाइलैंड्स हाईवे को सुरक्षित करना है, क्योंकि यह रास्ता व्यापार और ट्रांसपोर्ट के लिए लाइफलाइन माना जाता है. वहां तनाव कम करने के लिए चर्च और कम्युनिटी लीडर्स की मदद भी ली जा रही है.

अगस्त के बाद हथियार रखने वालों का क्या होगा हश्र?

प्रधानमंत्री मारापे ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि एमनेस्टी पीरियड खत्म होने के बाद सरकार का रुख बहुत सख्त होगा. उन्होंने कहा, ‘अभी हम आपको गले लगा रहे हैं, लेकिन समय सीमा खत्म होने के बाद कार्रवाई समझौताविहीन होगी.’ साल 2027 में होने वाले नेशनल इलेक्शन से पहले सरकार पूरे हाइलैंड्स रीजन को हथियारों से मुक्त करना चाहती है. चुनाव के दौरान अक्सर वहां हिंसा की घटनाएं बढ़ जाती हैं.

हालांकि, विपक्ष के कुछ नेताओं ने इस ‘कैश फॉर गन्स’ स्कीम की आलोचना भी की है. उनका कहना है कि अपराधियों को पैसे देने के बजाय कानून व्यवस्था में बुनियादी सुधार करने चाहिए. एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि जब तक कड़े कानून नहीं बनेंगे, तब तक बंदूकों का खौफ पूरी तरह खत्म नहीं होगा.

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