आयोग ने कहा कि देरी ‘तकनीकी खराबी के कारण’ हुई और एयरलाइन ‘आगे की यात्रा और उड़ान के रवाना होने तक अपने यात्रियों की देखभाल के अपने कर्तव्य से बच नहीं सकती.’ आयोग ने कहा कि एयरलाइन केवल यह कहकर खुद का बचाव नहीं कर सकती कि उड़ान के पुनर्निर्धारण, रद्द किये जाने और देरी आदि सामान्य बातें हैं.
आयोग ने कहा कि चूंकि एयरलाइन सेवा में कमी से जुड़े तथ्य पेश करने में विफल रही, इसलिए यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि उसके द्वारा की गई व्यवस्थाएं अपर्याप्त थीं. शिकायतकर्ता ने 27 जुलाई 2024 के लिए दुबई से मुंबई तक की यात्रा के वास्ते स्पाइसजेट की एक उड़ान में टिकट बुक किया था. लेकिन इस उड़ान में ‘अत्यधिक देरी’ हुई.
शिकायतकर्ता ने कहा कि इन दिशानिर्देशों में यह प्रावधान है कि एयरलाइन को यात्रियों को प्रतीक्षा समय के आधार पर भोजन और जलपान उपलब्ध कराना होगा, और जरूरत पड़ने पर, एक निश्चित अवधि की देरी होने पर होटल में ठहरने की व्यवस्था भी करनी होगी.
हालांकि, आयोग ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा कष्ट, तनाव, असुविधा, मानसिक और शारीरिक थकान के लिए 4,00,000 रुपये के मुआवजे के दावे के वास्ते ‘कोई पर्याप्त और पर्याप्त कारण’ नहीं हैं. इसने कहा कि शिकायतकर्ता ने भोजन आदि की खरीद पर हुए खर्च का कोई विवरण और प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया है.
मामले के तथ्यों पर विचार करते हुए, आयोग ने फैसला सुनाया कि यात्री को हुए खर्च और मानसिक पीड़ा के लिए 50,000 रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए. आयोग ने एयरलाइन को शिकायतकर्ता को मुकदमे की लागत के रूप में 5,000 रुपये देने का भी निर्देश दिया.





