खेल » ‘फिल्म पेशे का अपमान…’ मुंबई के बाद, अब दिल्ली के एडवोकेट ने की ‘जॉली एलएलबी 3’ पर बैन लगाने की मांग

‘फिल्म पेशे का अपमान…’ मुंबई के बाद, अब दिल्ली के एडवोकेट ने की ‘जॉली एलएलबी 3’ पर बैन लगाने की मांग

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Demand To Ban Jolly LLB 3: फिल्म पर बैन लगाने की शुरुआत पुणे से हुई थी, जहां एक स्थानीय वकील ने फिल्म के ट्रेलर के आधार पर जनहित याचिका (PIL) दायर कर दी. याचिका में कहा गया कि ट्रेलर ‘वकीलों और जजों की छवि खराब…और पढ़ें

मुंबई के बाद, अब दिल्ली के एडवोकेट ने की 'जॉली एलएलबी 3' पर बैन लगाने की मांगरिलीज से पहले बढ़ी फिल्म ‘जॉली एलएलबी 3’ की मुश्किलें.
नई दिल्ली. अक्षय कुमार और अरशद वारसी की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘जॉली एलएलबी 3’ अगले महीने 19 सितंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है. वहीं, रिलीज से पहले ही फिल्म की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है. इस फिल्म को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और तूल पकड़ता जा रहा है. मुंबई के वकीलों द्वारा सेंसर बोर्ड (CBFC) को पत्र लिखकर फिल्म की रिलीज रोकने की मांग के बाद अब दिल्ली के वकील भी मैदान में उतर आए हैं.

दिल्ली के एकवोकेट एपी सिंह ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म वकीलों को जोकर की तरह दिखाती है और न्यायपालिका का मजाक उड़ाती है. उन्होंने कहा, ‘हम वकील हैं, कॉमेडियन नहीं. वकालत दुनिया का सबसे पवित्र पेशा है और यह फिल्म हमारे काम को हास्यास्पद बना रही है.’ उन्होंने यह भी दावा किया कि दुनियाभर के वकील इस ट्रेलर से आहत हैं और इसे न्याय व्यवस्था पर लोगों के भरोसे के लिए खतरनाक बताया.

उन्होंने आगे कहा, ‘सिनेमा की ताकत बहुत बड़ी है. अगर जनता वकीलों को जोकर के रूप में देखने लगेगी, तो फिर न्याय प्रणाली का सम्मान कौन करेगा?’ बता दें, ये बवाल की शुरुआत पुणे से हुई थी, जहां एक स्थानीय वकील ने फिल्म के ट्रेलर के आधार पर जनहित याचिका (PIL) दायर कर दी. याचिका में कहा गया कि ‘जॉली एलएलबी 3’ का ट्रेलर ‘वकीलों और जजों की छवि खराब करता है.’ इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए पुणे की अदालत ने अभिनेता अक्षय कुमार, अरशद वारसी और निर्देशक सुभाष कपूर को समन जारी किया. इस कदम ने पहले ही कलात्मक स्वतंत्रता बनाम न्यायपालिका की गरिमा पर राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है.

जहां एक ओर बार एसोसिएशन सेंसर बोर्ड को पत्र लिखकर फिल्म पर कार्रवाई की तैयारी कर रही हैं, वहीं आलोचकों का कहना है कि इस तरह की याचिकाएं ‘फ्रिवलस लिटिगेशन’ की श्रेणी में आती हैं और पहले से बोझिल अदालतों का समय बर्बाद करती हैं. देश की अदालतों में 4 करोड़ से ज्यादा मामले लंबित हैं और ऐसे में किसी फिल्म के ट्रेलर पर बहस को कई लोग हास्यास्पद मानते हैं.

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Pratik Shekhar

Pratik Shekhar is leading the entertainment section in News18 Hindi. He has been working in digital media for the last 12 years. After studying from Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Co…और पढ़ें

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