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नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं सुशीला कार्की, जेन जेड की पसंद

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हंगामे, कई नामों और कानून दांव-पेचों में फंसने के बाद आखिर Gen Z आंदोलनकारियों की पहली पसंद सुशीला कार्की नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री बन गई हैं. शुक्रवार रात राष्ट्रपति ने उन्हें शपथ दिलाई और इतिहास रच दिया! 220 साल पुराने नेपाल के राजनैतिक इतिहास में पहली बार कोई महिला इस कुर्सी पर बैठी है. भारत के बनारस हिंदू व‍िश्‍व‍िद्यालय से मास्‍टर ड‍िग्री लेने वाली सुशीला की प्रेम कहानी भी इसी कॉलेज में शुरू हुई थी. लेकिन भव‍िष्‍य में सुशीला के पति बनने वाले दुर्गा प्रसाद सुबेदी का नाम उस प्‍लेन हाइजैक से जुड़ा है, ज‍िस प्‍लेन में 22 अन्‍य सवार‍ियों के साथ भारतीय एक्‍ट्रेस माला स‍िन्‍हा भी सवार थीं. चल‍िए बताते हैं आखिर क्‍या है नेपाल के इतिहास का ये सबसे चर्च‍ित प्‍लेन हाईजैक.

सुशीला कार्की 2016 में नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस बनीं. यह सिर्फ एक पद नहीं था, बल्कि महिलाओं के लिए एक मिसाल. सुशीला ने हमेशा न्याय को प्राथमिकता दी – चाहे वो कोर्ट में फैसले हों या समाज में बदलाव. सुशीला नेपाल में भ्रष्‍टाचार के ख‍िलाफ सबसे ऊंची आवाजों में से एक रही हैं. उनके इसी रवैये के चलते सरकार 2017 में उनके ख‍िलाफ महाभ‍ियोग लाई, पर जनता उनके समर्थन में सड़कों पर उतर गई. नेपाल के युवा, जो भ्रष्टाचार और बेरोजगारी से तंग आ चुके हैं, ने उन्हें चुना क्योंकि वे न्याय की मूर्ति हैं. और शुक्रवार की रात, जब राष्ट्रपति ने शपथ दिलाई, तो काठमांडू की सड़कें जश्न में डूब गईं.

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क‍िस्‍सा प्लेन हाईजैकिंग का…

सुशीला की पढ़ाई हुई बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से. यहीं उनकी मुलाकात हुई दुर्गा प्रसाद सुबेदी से. दोनों की नजरें मिलीं, बातें हुईं, और फिर जीवन भर का साथ निभाने का वादा. दुर्गा प्रसाद सुबेदी – नाम सुनते ही नेपाल के इतिहासकारों की आंखें चमक उठती हैं. वे एक क्रांतिकारी थे, जो राजशाही के खिलाफ आवाज उठाते थे और इसील‍िए उनका ये प्‍लेन हाईजैक भी नेपाल के इतिहास में सबसे फेमस है. ये घटना 10 जून 1973 को हुई. उस विमान में 22 यात्री सवार थे, जिनमें नेपाल के मशहूर अभिनेता दंपती सीपी लोहानी और भारत की सुपरस्टार माला सिन्हा भी थीं.

1973 का हाईजैकिंग: लूट नहीं, क्रांति का हथियार

यह कोई आम अपहरण नहीं था. दुर्गा प्रसाद ने नागेंद्र धुंगेल और बसंत भट्टाराई के साथ मिलकर यह ‘ऑपरेशन’ किया. इसका मकसद यात्रियों को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि विमान में लदी 32 लाख रुपए की नकदी लूटना था. यह पैसा बिराटनगर के बैंकों से आ रहा था, और राजा महेंद्र की राजशाही के खिलाफ चल रहे सशस्त्र आंदोलन को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल होने वाला था. इस प्‍लान के मास्टरमाइंड थे गिरिजा प्रसाद कोइराला – वही, जो बाद में नेपाल के प्रधानमंत्री बने.

जैसे ही प्लेन बिहार के फारबिसगंज में उतरा, जमीन पर इंतजार कर रहे साथी सक्रिय हो गए. कैश से भरे बक्से उतारे गए, सड़क मार्ग से दार्जिलिंग पहुंचा दिए गए. फिर विमान को बाकी यात्रियों समेत उड़ान भरने की इजाजत! कोई चोट, कोई ड्रामा नहीं – बस क्रांति का एक चतुर कदम. नेपाल के इतिहास की यह पहली हाईजैकिंग लंबे समय तक सुर्खियां बनी रही. एक साल के अंदर ज्यादातर अपहरणकर्ताओं को भारत में गिरफ्तार कर लिया गया. दुर्गा प्रसाद को दो साल की सजा हुई, लेकिन 1975 में भारत के आपातकाल के दौरान उन्हें रिहा कर दिया गया.

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