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नीला, हरा, भूरा या कुछ और… जानें कैसे तय होता है आपकी आंखों का रंग, विज्ञान से समझिए

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आंखों का रंग आइरिस में मेलेनिन और जेनेटिक्स से तय होता है. भूरी, नीली, हरी आंखें विरासत, संस्कृति और प्रकृति का अनोखा मेल दर्शाती हैं. केट बोसवर्थ, मिला कुनिस उदाहरण हैं.

नीला, हरा, भूरा या... जानें कैसे तय होता है आंखों का रंग, विज्ञान से समझिएआपकी आंखों के रंग कैसे तय होते हैं?
Color Of Eyes:  जब आप किसी से पहली बार मिलते हैं, तो अक्सर उनकी आंखें आपका ध्यान खींचती हैं. गहरा भूरा, हल्का नीला, या दुर्लभ हरा रंग, जो रोशनी के साथ बदलता प्रतीत होता है, हर आंख की अपनी कहानी होती है. आंखों का रंगसिर्फ सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि यह विज्ञान और जेनेटिक्स का भी कमाल है. आइए जानते हैं कि आंखों के रंग के पीछे क्या राज छिपा है.

मेलेनिन का खेल: आंखों का रंग निर्धारित होता है आइरिस में, जो पुतली के चारों ओर रंगीन छल्ले जैसी संरचना है. इसमें मेलेनिन नामक पिगमेंट मुख्य भूमिका निभाता है. भूरी आंखों में मेलेनिन की मात्रा अधिक होती है, जो रोशनी को सोखकर गहरा रंग देता है. नीली आंखों में मेलेनिन बहुत कम होता है, और इनका रंग टिंडल प्रभाव से बनता है, जैसे आसमान नीला दिखता है. नीली रोशनी बिखरती है, और कम मेलेनिन के कारण यह रंग हावी हो जाता है. हरी आंखें मेलेनिन और प्रकाश बिखराव के संतुलन से बनती हैं, जबकि हेजल आंखों में मेलेनिन का असमान वितरण रंग को रोशनी के साथ बदलता दिखाता है.

जेनेटिक्स का कमाल: पहले माना जाता था कि आंखों का रंग एक ही जीन तय करता है, जिसमें भूरा नीले पर हावी होता है. लेकिन अब वैज्ञानिकों ने पाया कि कई जीन मिलकर रंग तय करते हैं. यही कारण है कि एक ही परिवार में बच्चों की आंखों के रंग अलग-अलग हो सकते हैं. दो नीली आंखों वाले माता-पिता का बच्चा हरी या हल्की भूरी आंखों वाला हो सकता है. यूरोपीय मूल के कई नवजात नीली या सलेटी आंखों के साथ पैदा होते हैं, क्योंकि उनके मेलेनिन का स्तर कम होता है. जन्म के बाद पहले कुछ सालों में मेलेनिन बढ़ने से रंग बदल सकता है.

बदलता रंग और अनोखी खासियत: वयस्कों में आंखों का रंग आमतौर पर स्थिर रहता है, लेकिन रोशनी, कपड़ों या पुतली के आकार से यह बदलता प्रतीत होता है. नीली-सलेटी आंखें कभी नीली, कभी हरी दिख सकती हैं. कुछ खास मेडिकल स्थिति भी रंग बदल सकती है. हेटरोक्रोमिया एक दुर्लभ स्थिति है, जहां एक आंख का रंग दूसरी से अलग या आइरिस में दो रंग दिखते हैं. हॉलीवुड अभिनेत्री केट बोसवर्थ और मिला कुनिस इसका उदाहरण हैं. गायक डेविड बोवी की आंखें चोट के कारण अलग रंग की दिखती थीं.

सांस्कृतिक और वैज्ञानिक नजरिया: विश्व में भूरी आंखें सबसे आम हैं, खासकर अफ्रीका और एशिया में. नीली आंखें उत्तरी और पूर्वी यूरोप में ज्यादा दिखती हैं, जबकि हरी आंखें केवल 2% आबादी में पाई जाती हैं. भारत में भूरी और हेजल आंखें आम हैं, लेकिन नीली और हरी आंखें दुर्लभ और आकर्षक मानी जाती हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि आंखों का रंग सिर्फ जेनेटिक्स और भौतिकी का मेल नहीं, बल्कि यह हमारी विरासत और व्यक्तित्व का प्रतीक है.

आंखें सिर्फ देखने का साधन नहीं, बल्कि इंसान को इंसान से जोड़ने का जरिया हैं. हर जोड़ी आंखें एक अनोखी कहानी कहती हैं- वंश, संस्कृति और प्रकृति के चमत्कार की. चाहे नीली, हरी, भूरी या कुछ और, हर आंख में एक छोटा सा ब्रह्मांड बसता है.

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Deep Raj Deepak

दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें

दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व… और पढ़ें

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