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देश के 5 राज्य जापान को दे रहे टक्कर, मगर साथ में बढ़ रही चिंता, कही अस्तित्व पर न आ जाए संकट

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ये 5 राज्य जापान को दे रहे टक्कर, साथ ही बढ़ी चिंता, अस्तित्व पर न आ जाए संकटदक्षिण के राज्यों में फर्टिलिटी रेट काफी कम हो गई है.
समय काफी तेजी से बदल रहा है. इसके साथ-साथ देश के लोगों की सोच भी बदल रही है. अब भारत वह भारत नहीं रहा आज से 30-40 साल पहले था. आज अपना मुल्क कई मामलों में दुनिया के सबसे विकसित मुल्कों को टक्कर दे रहा है. जापान भी एक ऐसा ही मुल्क है. यह दुनिया के सबसे विकसित मुल्कों में शामिल है. यह कई मायनों में अमेरिका और यूरोप से आगे है. लेकिन, अब इस जापान को अपने देश के कुछ राज्य टक्कर दे रहे हैं. हालांकि, अन्य राज्य अब भी बहुत पीछे हैं.

दरअसल, हम बात कर रहे है देश की जनसंख्या वृद्धि दर की. देश में औसत फर्टिलिटी रेट घटकर अब दो फीसदी से नीचे आ गई है. संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के अनुसार 2025 में भारत की समग्र फर्टिलिटी रेट घटकर 1.9 फीसदी पर आ गई है. देश में समस्याओं और गरीब-परेशानी के लिए अत्यधिक जनसंख्या को दोषी ठहराने वालों को यह पसंद आने वाली रिपोर्ट है. दरअसल, किसी भी समाज या राज्य को अपनी मौजूदा जनसंख्या को बनाए रखने के लिए कम से कम 2.1 फीसदी की फर्टिलिटी रेट चाहिए होती है. फर्टिलिटी रेट का मतलब एक महिला के शरीर से पैदा होने वाले बच्चों से है. किसी राज्य में मौजूदा जनसंख्या को बनाए रखने के लिए वहीं महिलाओं को औसतन 2.1 बच्चों को जन्म देना होता है. लेकिन, देश में यह रेट घटकर 1.9 फीसदी पर आ गई है. यानी अब भारत की जनसंख्या ठहराव और फिर गिरावट की ओर बढ़ रही है.

उत्तर भारत के राज्य पिछड़े

लेकिन, इस आंकड़े के भीतर भी राज छिपे हैं. देश के अलग-अलग राज्यों में इस फर्टिलिटी रेट में जमीन-आसमान का अंतर है. आज भी उत्तर भारत के पिछले राज्य जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश और पूर्वी भारत के राज्यों में फर्टिलिटी रेट औसत से काफी अधिक है. वहीं दक्षिण के पांचों राज्यों तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में फर्टिलिटी रेट अब चिंताजनक स्तर तक गिर चुकी है. इस फर्टिलिटी रेट के मामले में ये राज्य जापान को टक्कर दे रहे हैं. जापान में इस वक्त फर्टिलिटी रेट 1.3 के आसपास है. तमिलनाडु में भी फर्टिलिटी रेट 1.3 है. केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी यह 1.5-1.6 के बीच है.

तमिलनाडु की बात करें तो यहां प्रति 1,000 लोगों पर जन्म दर मात्र 12.1 है, जो राष्ट्रीय औसत 19.1 से काफी कम है. फर्टिलिटी रेट घटाने में महिलाओं की उच्च शिक्षा और उनका सशक्तिकरण सबसे अहम कारण है. शिक्षित महिलाएं करियर पर फोकस करती हैं. उनमें परिवार नियोजन और देरी से शादी का चलन बढ़ा है. तमिलनाडु सरकार ने परिवार नियोजन कार्यक्रम को इतनी सफलता से लागू किया है कि अब वहां जनसंख्या में कमी की चिंता होने लगी है. इससे आने वाले वक्त में युवा कामकाजी आबादी कम हो जाएगी. बूढ़े लोगों की संख्या बढ़ जाएगी और फिर कुछ लंबे समय में अस्तित्व पर संकट आ जाएगा. लेकिन, राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो बिहार में फर्टिलिटी रेट अब भी 3.0 और उत्तर प्रदेश 2.6 है. मध्य प्रदेश और राजस्थान में फर्टिलिटी रेट 2.5 है. इसी तरह छत्तीसगढ़, झारखंड और असम में भी फर्टिलिटी रेट औसत से अधिक है. ये राज्य देश के स्तर पर फर्टिलिटी रेट बढ़ा रहे हैं.

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