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दक्षिण के राज्यों में फर्टिलिटी रेट काफी कम हो गई है.दरअसल, हम बात कर रहे है देश की जनसंख्या वृद्धि दर की. देश में औसत फर्टिलिटी रेट घटकर अब दो फीसदी से नीचे आ गई है. संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के अनुसार 2025 में भारत की समग्र फर्टिलिटी रेट घटकर 1.9 फीसदी पर आ गई है. देश में समस्याओं और गरीब-परेशानी के लिए अत्यधिक जनसंख्या को दोषी ठहराने वालों को यह पसंद आने वाली रिपोर्ट है. दरअसल, किसी भी समाज या राज्य को अपनी मौजूदा जनसंख्या को बनाए रखने के लिए कम से कम 2.1 फीसदी की फर्टिलिटी रेट चाहिए होती है. फर्टिलिटी रेट का मतलब एक महिला के शरीर से पैदा होने वाले बच्चों से है. किसी राज्य में मौजूदा जनसंख्या को बनाए रखने के लिए वहीं महिलाओं को औसतन 2.1 बच्चों को जन्म देना होता है. लेकिन, देश में यह रेट घटकर 1.9 फीसदी पर आ गई है. यानी अब भारत की जनसंख्या ठहराव और फिर गिरावट की ओर बढ़ रही है.
उत्तर भारत के राज्य पिछड़े
तमिलनाडु की बात करें तो यहां प्रति 1,000 लोगों पर जन्म दर मात्र 12.1 है, जो राष्ट्रीय औसत 19.1 से काफी कम है. फर्टिलिटी रेट घटाने में महिलाओं की उच्च शिक्षा और उनका सशक्तिकरण सबसे अहम कारण है. शिक्षित महिलाएं करियर पर फोकस करती हैं. उनमें परिवार नियोजन और देरी से शादी का चलन बढ़ा है. तमिलनाडु सरकार ने परिवार नियोजन कार्यक्रम को इतनी सफलता से लागू किया है कि अब वहां जनसंख्या में कमी की चिंता होने लगी है. इससे आने वाले वक्त में युवा कामकाजी आबादी कम हो जाएगी. बूढ़े लोगों की संख्या बढ़ जाएगी और फिर कुछ लंबे समय में अस्तित्व पर संकट आ जाएगा. लेकिन, राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो बिहार में फर्टिलिटी रेट अब भी 3.0 और उत्तर प्रदेश 2.6 है. मध्य प्रदेश और राजस्थान में फर्टिलिटी रेट 2.5 है. इसी तरह छत्तीसगढ़, झारखंड और असम में भी फर्टिलिटी रेट औसत से अधिक है. ये राज्य देश के स्तर पर फर्टिलिटी रेट बढ़ा रहे हैं.
September 04, 2025, 10:16 IST





