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दुबई के पहले हिन्‍दू मंदिर ने रचा इतिहास, ऑडियोविजुअल जगत का ‘ऑस्कर’ आवार्ड मिला

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अबू धाबी के बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर को ‘द फेयरी टेल’ प्रस्तुति के लिए मानडो-डीआर MONDO-DR अवॉर्ड 2025 मिला, जिसने तकनीकी इनोवेशन और आध्यात्मिकता का संगम दिखाया.

दुबई के पहले हिन्‍दू मंदिर ने रचा इतिहास, ऑडियोविजुअल उद्योग का ‘ऑस्कर’ मिला‘द फेयरी टेल’ के लिए प्रतिष्ठित मानडो-डीआर (MONDO-DR)अवॉर्ड 2025को लेते बीएपीएस के वरिष्‍ठ संत ब्रह्मविहार स्‍वामी जी, साथ ही अवार्ड को देखते हुए बीएपीएस के प्रमुख महंत स्‍वामी जी महाराज.

मुंबई. अबू धाबी में स्थित बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर ने अपनी अनूठी प्रस्तुति ‘द फेयरी टेल’ के लिए प्रतिष्ठित मानडो-डीआर (MONDO-DR)अवॉर्ड 2025 जीता है. इस पुरस्कार को ऑडियोविजुअल जगत का ‘ऑस्कर’ माना जाता है, जो तकनीकी इनोवेशन, क्रिएटिविटी, एक्‍सेलेंस और इमोशनल प्रभाव के लिए दिया जाता है.

यह पुरस्कार हर साल मानडो-डीआर मैगजीन द्वारा मनोरंजन, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक स्थानों में उत्कृष्ट एवी डिजाइन और तकनीक के लिए दिया जाता है. ‘द फेयरी टेल’ एक आकर्षक अनुभव है, जो आधुनिक तकनीक और आध्यात्मिकता का अनोखा संगम है. इसने न केवल दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के एक पैनल को भी प्रभावित किया, जिन्होंने इसे इस पुरस्कार के लिए चुना.

यह पुरस्कार तकनीक को कला, अनुभव और प्रेरणा में बदलने वालों को सम्मानित करता है. बीएपीएस मंदिर का यह सम्मान ग्‍लोबल स्तर पर आध्यात्मिक इनोवेशन और तकनीकी एक्‍सेलेंसी का प्रतीक है. बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर, अबू धाबी, अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के लिए पहले से ही प्रसिद्ध है.
‘द फेयरी टेल’ अनुभव ने इस मंदिर को और भी खास बना दिया है. इस आकर्षक प्रस्तुति में विजिटर्स को एक कहानी के माध्यम से आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों का अनुभव कराया जाता है, जो तकनीक के उपयोग से जीवंत हो उठता है. इसने न केवल भारत की समृद्ध परंपराओं को प्रदर्शित किया, बल्कि ग्‍लोबल मंच पर तकनीकी और रचनात्मक कौशल का लोहा भी मनवाया.

यह पुरस्कार बीएपीएस संगठन के लिए गर्व का क्षण है, जो आध्यात्मिकता और आधुनिकता के संयोजन का प्रतीक है. यह उपलब्धि दर्शाती है कि कैसे तकनीक का उपयोग करके आध्यात्मिक संदेश को और प्रभावशाली बनाया जा सकता है. इस जीत ने अबू धाबी के बीएपीएस मंदिर को ग्‍लोबल स्तर पर एक नई पहचान दी है और यह भारत की सांस्कृतिक धरोहर को ग्‍लोबल मंच पर ले जाने का एक शानदार उदाहरण है.

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