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तापसी पन्नू-अनुभव सिन्हा की अस्सी फिल्म में संवेदनशील मुद्दे

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नई दिल्ली.  निर्देशक अनुभव सिन्हा और एक्ट्रेस तापसी पन्नू की जोड़ी पिछले कुछ वर्षों में हिंदी सिनेमा की सबसे प्रभावशाली क्रिएटिव साझेदारियों में शुमार हो चुकी है. ‘मुल्क’ और ‘थप्पड़’ जैसी चर्चित फिल्मों के बाद अब दोनों तीसरी बार अपनी आगामी फिल्म अस्सी में साथ काम कर रहे हैं. फिल्म के प्रमोशन के दौरान न्यूज18 हिंदी से खास बातचीत में दोनों कलाकारों ने इस प्रोजेक्ट से जुड़ी कई दिलचस्प बातें साझा कीं और फिल्म के भावनात्मक सफर पर खुलकर चर्चा की.

‘अस्सी’ एक संवेदनशील विषय पर आधारित फिल्म है, जो एक रेप सर्वाइवर की कहानी को केंद्र में रखती है. इस बारे में बात करते हुए तापसी पन्नू ने बताया कि जब अनुभव सिन्हा ने उन्हें फिल्म के लिए अप्रोच किया, तो वह एक ही बार में पूरी स्क्रिप्ट पढ़ नहीं पाईं. कहानी का प्रभाव इतना गहरा था कि उन्हें बीच-बीच में रुकना पड़ा. उनके मुताबिक, यह कहानी सिर्फ पढ़ने भर से ही मन को झकझोर देती है और लंबे समय तक भीतर असर छोड़ती है.

क्या ‘अस्सी’ के लिए अनुभव सिन्हा की पहली पसंद थीं तापसी पन्नू?

वहीं अनुभव सिन्हा ने खुलासा किया कि स्क्रिप्ट लिखते समय से ही उनके मन में तापसी इस किरदार के लिए तय थीं. उन्होंने बताया कि अक्सर वह कहानी लिखते हुए अपने मुख्य कलाकार की कल्पना पहले ही कर लेते हैं और फिर उसी के अनुरूप किरदार गढ़ते हैं. ‘अस्सी’ की कहानी भी उन्होंने तापसी को ध्यान में रखकर ही विकसित की थी, इसलिए वह इस फिल्म के लिए उनकी पहली और फाइनल पसंद थीं.

कैसे मिली ‘अस्सी’ की प्रेरणा?

सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों के चयन को लेकर अनुभव सिन्हा ने कहा कि जब वह रोजमर्रा की खबरें देखते हैं और समाज में घट रही घटनाओं के बारे में पढ़ते हैं, तो भीतर से विचलित हो जाते हैं. उनका मानना है कि सिनेमा समाज पर प्रभाव डालने का एक बेहद शक्तिशाली माध्यम है और इसी वजह से वह ऐसी कहानियां चुनते हैं, जो सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सोचने पर मजबूर करें.

तापसी पन्नू को बॉलीवुड ने किया टाइपकास्ट?
इंटरव्यू के दौरान तापसी से यह भी पूछा गया कि क्या उन्हें इंडस्ट्री ने एक खास तरह के किरदारों तक सीमित कर दिया है. इस पर उन्होंने साफ कहा कि अगर उन्हें दस फिल्मों के ऑफर मिलते हैं, तो उनमें से अधिकांश फीमेल-सेंट्रिक रोल ही होते हैं. उनके अनुसार, यह कहीं न कहीं मेकर्स की सीमित सोच को दर्शाता है, क्योंकि वे उन्हें अलग तरह के किरदारों में देखने का जोखिम कम उठाते हैं. तापसी कहती हैं कि ये मेकर्स की असफलता है कि वो उन्हें अन्य तरह के रोल्स में कास्ट नहीं कर पा रहे हैं.

15 सालों से फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय तापसी पन्नू कहती हैं कि अब दर्शकों के बीच फीमेल सेट्रिंक फिल्मों को लेकर स्वीकार्यता बढ़ गई है. वो कहती हैं कि जब वो साउथ से हिंदी फिल्मों की तरफ आई थीं, तब तक बॉलीवुड में फीमेल सेंट्रिक फिल्में सफल होने लगी थीं. ‘क्वीन’ और ‘तनु वेड्स मनु’ जैसी फिल्मों का उदाहरण देते हुए वो कहती हैं कि उनके बॉलीवुड में आने से पहले ही महिला केंद्रित फिल्मों का रास्ता खुल गया था और अब दर्शक भी इन फिल्मों के लिए खुले दिल से तैयार हैं.

तापसी पन्नू के लिए क्यों अलग है ‘अस्सी’?

‘अस्सी’ में अपने किरदार को लेकर तापसी ने एक दिलचस्प बात साझा की. उन्होंने बताया कि इस फिल्म में वह रेप सर्वाइवर का रोल नहीं निभा रही हैं, बल्कि एक वकील के किरदार में नजर आएंगी. उनका काम उस पीड़ा को ‘सेकेंड-हैंड’ तरीके से महसूस कर दर्शकों तक पहुंचाना है यानी खुद उस दर्द से गुजरे बिना भी उसे सच्चाई और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करना. तापसी के मुताबिक, यही इस किरदार की सबसे बड़ी चुनौती थी. एक इंसानी रिश्ते और संवेदना के स्तर पर उस दर्द को समझना और उसे पर्दे पर ईमानदारी से जीवंत करना.

कुल मिलाकर, ‘अस्सी’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक सामाजिक संवाद की तरह देखी जा रही है, जो दर्शकों को संवेदनशील मुद्दों पर सोचने और समाज में बदलाव की जरूरत को महसूस करने के लिए प्रेरित कर सकती है. समाज को झकझोर कर रखने वाली फिल्म ‘अस्सी’ 20 फरवरी को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है.

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