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डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस में ली जे म्युंग संग मुलाकात में किम जोंग उन की तारीफ की. दोनों नेताओं के बीच सख्त छवि, ड्रामा और डीलमेंकिंग जैसी समानता.
डोनाल्ड ट्रंप अक्सर उन नेताओं की प्रशंसा करते हैं जो निरंकुश हैं.डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ओवल ऑफिस में की गयी यह टिप्पणी उस राष्ट्रपति के लिए कोई आश्चर्य की बात नहीं थी. उन्होंने अक्सर दुनिया के सत्तावादियों की प्रशंसा की है और उन्होंने 2019 में किम जोंग-उन से मिलने के लिए ऐतिहासिक यात्रा की थी. लेकिन जिस संदर्भ में डोनाल्ड ट्रंप ने यह टिप्पणी की उस समय दक्षिण कोरिया के नए राष्ट्रपति ली जे म्युंग उनके बगल में बैठे थे. यह चौंकाने वाला था कि ली जे म्युंग ने कोई आपत्ति नहीं जतायी.
ट्रंप को क्यों पसंद आते हैं किम जोंग?
सवाल ये है कि डोनाल्ड ट्रंप को किम जोंग उन क्यों पसंद आते हैं. दरअसल दोनों नेताओं के बीच संबंधों की कहानी विरोधाभासों से भरी है. शुरुआत में ट्रंप ने किम को ‘रॉकेट मैन’ कहकर मजाक उड़ाया था और यहां तक कि परमाणु हमले की धमकी तक दे डाली थी. लेकिन कुछ ही समय बाद वही ट्रंप किम की तारीफ करने लगे और कहा कि उनकी केमिस्ट्री बहुत अच्छी है. कुछ अहम वजहें जिनकी वजह से ट्रंप किम को पसंद करते हैं…

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग के साथ मुलाकात में डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन की बार-बार प्रशंसा की.
सख्त और निरंकुश छवि
डोनाल्ड ट्रंप अक्सर उन नेताओं की प्रशंसा करते हैं जो सख्त, निरंकुश और ‘बॉस’ जैसे दिखते हैं. जैसे व्लादिमीर पुतिन, शी जिनपिंग या किम जोंग उन. उनके लिए ये नेता ‘डीलमेकर्स’ की तरह हैं, जिनसे सीधी बातचीत हो सकती है, न कि लोकतांत्रिक सिस्टम के झंझटों से गुजरना पड़े.
डोनाल्ड ट्रंप को लगता था कि वह व्यक्तिगत केमिस्ट्री के जरिए दुनिया के बड़े संकट हल कर सकते हैं. इसलिए उन्होंने किम के साथ सीधे संवाद को तरजीह दी और इसे अपनी कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर पेश किया. ट्रंप खुद को एक बिजनेसमैन और डीलमेकर मानते हैं. नॉर्थ कोरिया का परमाणु संकट उन्हें एक ‘बड़ी डील’ का मौका लगता था. अगर वह किम से समझौता करा लेते, तो ये उनके लिए ऐतिहासिक जीत होती.
कई मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि ट्रंप और किम दोनों में एक समानता है. दोनों को ड्रामा पसंद है, दोनों अपने देश में खुद को ‘सुपरहीरो’ की तरह पेश करते हैं. दोनों को मीडिया की सुर्खियों में रहना अच्छा लगता है. यही कारण है कि उनकी व्यक्तिगत मुलाकातें अक्सर तमाशे जैसी लगती थीं. अमेरिका में ट्रंप अपने समर्थकों को दिखाना चाहते थे कि उन्होंने ‘खतरनाक दुश्मन’ को दोस्त बना लिया. ये उनके लिए चुनावी राजनीति में भी काम आता था.
किम जोंग के दबदबे से प्रभावित
ट्रंप कई बार कहते रहे कि किम जोंग उन अपने देश पर पूरा कंट्रोल रखते हैं और लोग उनसे डरते हैं. इस कंट्रोल को ट्रंप एक तरह की लीडरशिप क्वालिटी मानते हैं, भले ही पश्चिमी लोकतंत्र इसे डिक्टेटरशिप कहे. दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग से मुलाकात के दौरान ट्रंप ने किम जोंग से फिर मिलने के अवसर के बारे में कहा, “मैं उनसे मिलना चाहूंगा. मैं भविष्य में किम जोंग-उन से मिलने के लिए उत्सुक हूं.”
ट्रंप ने पहली बार वाशिंगटन में ली जे म्युंग से मुलाकात की. क्योंकि अमेरिकी प्रशासन का ध्यान चीन पर केन्द्रित होने के कारण दोनों देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं. पत्रकारों के सामने एक घंटे लंबे सत्र में ट्रंप ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच गठबंधन पर बात की. उन्होंने कहा कि अमेरिका दक्षिण कोरिया से विमानों के अनुबंध पर विचार कर रहा है और द्वितीय विश्व युद्ध में हम प्रतिदिन एक विमान बनाते थे. उन्होंने भविष्यवाणी की कि उद्योग का वह युग वापस आएगा और दक्षिण कोरियाई निवेश भी अमेरिका में होगा.
उ. कोरिया की यात्रा को किया याद
डोनाल्ड ट्रंप बार-बार किम जोंग के साथ अपने संबंधों पर अड़े रहे. अमेरिकी राष्ट्रपति ने बार-बार बताया कि उनके बीच अच्छी बनती है और किम जोंग से मिलने की अपनी यात्रा को याद किया. जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रतीकात्मक रूप से विसैन्यीकृत क्षेत्र की सीमा रेखा पार करके उत्तर कोरिया की ओर प्रस्थान किया था. ट्रंप ऐसा करने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति थे. उस मुलाकात से पहले उन्होंने और किम जोंग ने एक-दूसरे को गालियां दीं और हमलों की धमकियां दीं.
New Delhi,Delhi
August 27, 2025, 18:53 IST





