फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अगले हफ्ते भारत आने वाले हैं. इस भारत दौरे से ठीक पहले उन्होंने यूरोप के साथी देशों को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की नसीहत दी है. मैक्रों ने साफ शब्दों में कहा कि यूरोप को अब ‘जागने’ की जरूरत है और ट्रंप के दबाव में झुकने के बजाय एकजुट होकर कड़ा जवाब देना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप यूरोपीय संघ को तोड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, मैक्रों ने फ्रांसीसी अखबार ला मोंडे और फाइनेंशियल टाइम्स समेत कई अखबारों को दिए इंटरव्यू में कहा कि आने वाले महीनों में अमेरिका और यूरोप के बीच डिजिटल सेवाओं के नियमन को लेकर टकराव तय है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका यूरोपीय संघ के डिजिटल कानूनों को लेकर हमला करेगा और इसके जवाब में वॉशिंगटन ईयू पर नए टैरिफ भी लगा सकता है.
स्पेन और फ्रांस को अमेरिका से कैसा खतरा?
मैक्रों ने कहा, ‘यूरोप इस समय अमेरिका के मुकाबले न तो पर्याप्त तेजी से आगे बढ़ रहा है और न ही सही पैमाने पर काम कर रहा है. यह जागने का वक्त है.’ उनके इस बयान को ट्रंप प्रशासन की नीतियों के खिलाफ खुली चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है.
मैंक्रों कब आ रहे भारत?
याद दिला दें कि मैक्रों अगले हफ्ते तीन दिवसीय भारत दौरे पर आ रहे हैं. वह 17 फरवरी को मुंबई से अपने दौरे की शुरुआत करेंगे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन का उद्घाटन करेंगे. दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी होगी, जिसमें व्यापार, निवेश, रक्षा और तकनीक जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है.
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, मोदी और मैक्रों होराइजन 2047 रोडमैप के तहत द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर बातचीत करेंगे. इस दौरान इंडो-पैसिफिक क्षेत्र समेत वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होगा. मैक्रों 19 फरवरी को नई दिल्ली में होने वाले एआई इम्पैक्ट समिट में भी हिस्सा लेंगे.
राफेल डील पर लग सकती है मुहर
कुल मिलाकर भारत आने से पहले मैक्रों का यह सख्त बयान साफ संकेत देता है कि वह न सिर्फ यूरोप के भीतर एकजुटता बढ़ाने की कोशिश में हैं, बल्कि वैश्विक मंच पर अमेरिका की आक्रामक नीतियों के खिलाफ मजबूत रुख अपनाने के पक्षधर भी हैं. यही वजह है कि उनका यह संदेश ‘डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ सख्ती दिखाएं’ यूरोप के साथी देशों के लिए एक साफ राजनीतिक चेतावनी माना जा रहा है.





