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‘डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ सख्ती दिखाएं’, भारत आने से पहले मैक्रों की यूरोप के साथी देशों को नसीहत

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फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अगले हफ्ते भारत आने वाले हैं. इस भारत दौरे से ठीक पहले उन्होंने यूरोप के साथी देशों को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की नसीहत दी है. मैक्रों ने साफ शब्दों में कहा कि यूरोप को अब ‘जागने’ की जरूरत है और ट्रंप के दबाव में झुकने के बजाय एकजुट होकर कड़ा जवाब देना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप यूरोपीय संघ को तोड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं.

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, मैक्रों ने फ्रांसीसी अखबार ला मोंडे और फाइनेंशियल टाइम्स समेत कई अखबारों को दिए इंटरव्यू में कहा कि आने वाले महीनों में अमेरिका और यूरोप के बीच डिजिटल सेवाओं के नियमन को लेकर टकराव तय है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका यूरोपीय संघ के डिजिटल कानूनों को लेकर हमला करेगा और इसके जवाब में वॉशिंगटन ईयू पर नए टैरिफ भी लगा सकता है.

स्पेन और फ्रांस को अमेरिका से कैसा खतरा?

फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने चेताया कि खासतौर पर स्पेन और फ्रांस निशाने पर हो सकते हैं, क्योंकि दोनों देश बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहे हैं. ब्रिटेन, पुर्तगाल, डेनमार्क, ग्रीस, नॉर्वे, पोलैंड, ऑस्ट्रिया, आयरलैंड और नीदरलैंड जैसे यूरोप के कई अन्य देश भी ऐसे कदमों पर विचार कर रहे हैं. अगर ये प्रतिबंध लागू होते हैं तो इंस्टाग्राम, फेसबुक, स्नैपचैट, एक्स, टिकटॉक और यूट्यूब जैसी बड़ी डिजिटल कंपनियों पर सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि इससे उन्हें करोड़ों युवा यूजर्स और विज्ञापन से मिलने वाली मोटी कमाई से हाथ धोना पड़ सकता है.

मैक्रों ने कहा, ‘यूरोप इस समय अमेरिका के मुकाबले न तो पर्याप्त तेजी से आगे बढ़ रहा है और न ही सही पैमाने पर काम कर रहा है. यह जागने का वक्त है.’ उनके इस बयान को ट्रंप प्रशासन की नीतियों के खिलाफ खुली चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है.

मैंक्रों कब आ रहे भारत?

याद दिला दें कि मैक्रों अगले हफ्ते तीन दिवसीय भारत दौरे पर आ रहे हैं. वह 17 फरवरी को मुंबई से अपने दौरे की शुरुआत करेंगे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन का उद्घाटन करेंगे. दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी होगी, जिसमें व्यापार, निवेश, रक्षा और तकनीक जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है.

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, मोदी और मैक्रों होराइजन 2047 रोडमैप के तहत द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर बातचीत करेंगे. इस दौरान इंडो-पैसिफिक क्षेत्र समेत वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होगा. मैक्रों 19 फरवरी को नई दिल्ली में होने वाले एआई इम्पैक्ट समिट में भी हिस्सा लेंगे.

राफेल डील पर लग सकती है मुहर

मैक्रों के भारत दौरे से पहले रक्षा सहयोग भी चर्चा में है. सूत्रों के अनुसार, उनके आगमन से पहले रक्षा मंत्रालय भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद से जुड़े लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव पर विचार कर सकता है. यह परियोजना मौजूदा सुरक्षा हालात और वायुसेना की जरूरतों को देखते हुए बेहद अहम मानी जा रही है.

कुल मिलाकर भारत आने से पहले मैक्रों का यह सख्त बयान साफ संकेत देता है कि वह न सिर्फ यूरोप के भीतर एकजुटता बढ़ाने की कोशिश में हैं, बल्कि वैश्विक मंच पर अमेरिका की आक्रामक नीतियों के खिलाफ मजबूत रुख अपनाने के पक्षधर भी हैं. यही वजह है कि उनका यह संदेश ‘डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ सख्ती दिखाएं’ यूरोप के साथी देशों के लिए एक साफ राजनीतिक चेतावनी माना जा रहा है.

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