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टॉप लीडरशिप के मारे जाने पर भी परमाणु हमला करने वाला रुसी ‘डेड हैंड’ सिस्टम

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शीत युद्ध के दिनों में सोवियत संघ ने एक ऐसा परमाणु जवाबी हमला करने वाला सिस्टम बनाया, जो तब भी सक्रिय रह सके जब उसका शीर्ष नेतृत्व और कमांड चेन पूरी तरह नष्ट हो जाए. इसे पश्चिम में ‘डेड हैंड’ (Dead Hand) और रूस में ‘परिमीटर’ (Perimeter) कहा गया.

1974 में गुप्त आदेश जारी हुआ—एक स्वचालित परमाणु कमांड का बैकअप तैयार किया जाए. 1979 में विशेष रूप से सुधार की गई UR-100 ICBM पर शक्तिशाली रेडियो-ट्रांसमीटर के साथ उड़ान परीक्षण शुरू हुए. नवंबर 1984 में बड़े अभ्यास में साबित हो गया कि “कमांड मिसाइल” दूर से RS-20 (SS-18) ICBM को लॉन्च आदेश दे सकती है. जनवरी 1985 में इसे आधिकारिक तौर पर सेवा में शामिल कर लिया गया.

इसकी सबसे बड़ी वजह थी अमेरिका द्वारा अचानक “डिकैपिटेशन स्ट्राइक” का खतरा—ऐसा हमला जिसमें पहले ही वार में नेतृत्व और कंट्रोल सेंटर खत्म कर दिए जाएं. डेड हैंड इस स्थिति में अपने आप जवाबी हमला करने का आदेश दे सकता है. पश्चिमी विशेषज्ञों ने इसकी तुलना Dr. Strangelove फिल्म के “डूम्सडे डिवाइस” से की थी. इसकी मौजूदगी शीत युद्ध के अंत तक पूरी तरह गुप्त रही और 1990 के दशक में ही दुनिया को इसके बारे में जानकारी मिली.

कब शुरू हुआ था ‘डेड हैंड’ का काम?
1974:
सोवियत संघ ने स्वचालित परमाणु जवाबी प्रणाली का गुप्त आदेश जारी किया.
1979: रेडियो-ट्रांसमीटर वारहेड वाली UR-100 मिसाइल का सफल परीक्षण.

नवंबर 1984: कमांड मिसाइल ने RS-20 ICBM को लॉन्च आदेश भेजा, टेस्ट सफल रहा.
जनवरी 1985: डेड हैंड ऑपरेशनल हुआ.

1995: सोवियत विघटन के बाद इसे बंद किया गया.

दिसंबर 2011: रूसी कमांडर सर्गेई कराकायेव ने सार्वजनिक रूप से इसके पुनः सक्रिय होने की पुष्टि की.
2018: पूर्व कमांडर विक्टर यसिन के मुताबिक, सिस्टम को और आधुनिक बनाया गया.

2025: पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने अमेरिका को इसकी याद दिलाई.

असली मक़सद
डेड हैंड का मूल उद्देश्य रूस की सेकंड-स्ट्राइक क्षमता को पक्का करना है—यानी पहले हमला झेलने के बाद भी दुश्मन को परमाणु जवाब देना. यह हज़ारों परमाणु वारहेड को एक केंद्रीकृत लॉन्च नेटवर्क से जोड़ देता है. अगर पहला हमला नेतृत्व और कमांड सेंटर को खत्म कर दे, तब भी जवाबी हमला रुकता नहीं.

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह केवल पश्चिम को डराने के लिए नहीं, बल्कि सोवियत कमांडरों को भरोसा दिलाने के लिए बनाया गया था कि उनका सेकंड-स्ट्राइक सुरक्षित है, जिससे वे तनाव में जल्दबाज़ी में हमला न करें. रूसी रणनीतिकार इसे एक तरह का इंश्योरेंस पॉलिसी मानते हैं. सीधे शब्दों में कहें तो, ‘डेड हैंड’ सिस्टम रूस के न्यूक्लियर डॉक्ट्रिन में एक अंतिम हथियार जैसा है – अगर रूस के अस्तित्व को खतरा हो, तो यह बड़े पैमाने पर जवाबी हमला सुनिश्चित करता है.

क्या है ‘डेड हैंड’?
‘डेड हैंड’ एक तरह का “फेल-सेफ” कमांड-एंड-कंट्रोल नेटवर्क है, जो खास तरह की बैलिस्टिक मिसाइलों से जुड़ा है.  इसमें सेंसर, एक बेहद सुरक्षित कंट्रोल सेंटर और “कमांड मिसाइलें” शामिल हैं जो पूरे देश की स्ट्रेटेजिक फोर्सेस को लॉन्च का आदेश भेज सकती हैं.

कैसे काम करता है?
डेड हैंड एक फेल-सेफ कमांड-एंड-कंट्रोल नेटवर्क है, जिसमें शामिल हैं

– सेंसर (भूकंपीय, रेडिएशन, वायुदाब और राडार)
– भूमिगत सुरक्षित कंट्रोल सेंटर
– “कमांड मिसाइलें” जो पूरे देश की स्ट्रेटेजिक फोर्सेस को लॉन्च आदेश भेजती हैं

उच्च सतर्कता के दौरान, राष्ट्रीय नेतृत्व इसे “प्री-ऑथराइज” करता है. इसके बाद सिस्टम हमले के संकेत मॉनिटर करता है—परमाणु धमाके की चमक, ज़मीन में झटका, रेडिएशन में बढ़ोतरी और कमांड नेटवर्क का टूटना.

यह तभी सक्रिय होता है जब:
– प्री-ऑथराइजेशन पहले से मौजूद हो
– मॉस्को से सभी कमांड लिंक टूट जाएं
– सेंसर पुष्टि करें कि परमाणु धमाका हुआ है

लॉन्च प्रक्रिया
रूस का मुख्य युद्धकालीन कमांड सिस्टम “Kazbek” कहलाता है, जो राष्ट्रपति के न्यूक्लियर ब्रीफकेस “Cheget” से जुड़ा है. डेड हैंड एक बैकअप या सिमिलर कमांड लेयर की तरह काम करता है. इसका कंट्रोल सेंटर एक भूमिगत बंकर में होता है, जहां ड्यूटी ऑफिसर तैनात रहते हैं.

डेड हैंड “लॉन्च-ऑन-वॉर्निंग” पर आधारित नहीं है, बल्कि “लॉन्च-आफ्टर-डिटोनेशन” पर काम करता है—पहले हमला होगा, फिर जवाब. इससे झूठे अलार्म पर गलती से हमला करने का खतरा लगभग खत्म हो जाता है. अंतिम आदेश इंसान द्वारा ही दिया जाता है, यानी यह पूरी तरह स्वचालित नहीं है.

निष्कर्ष
डेड हैंड रूस की परमाणु रणनीति का अंतिम सुरक्षा कवच है—एक ऐसा सिस्टम जो यह सुनिश्चित करता है कि रूस के अस्तित्व पर खतरा होने की स्थिति में दुश्मन को किसी भी हालत में विनाशकारी जवाब मिलेगा. शीत युद्ध में यह गुप्त हथियार था, लेकिन आज यह रूस की अंतिम चेतावनी बन चुका है—तबाही के बाद भी वार करने वाला.

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