वैसे तो पूरे जापान में करीब 53,974 भारतीय नागरिक रहते हैं. ये दिसंबर 2024 के आंकड़ों पर आधारित है. जून 2024 की एक रिपोर्ट में यह संख्या 51,345 बताई गई. इसमें करीब 15 हजार लोग तो इस लिटिल इंडिया में रहते हैं. जहां भारतीयों की संख्या लगातार बढ़ रही है. यहां रह रहे कई भारतीय तो दो तीन पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं, स्थायी तौर पर बस चुके हैं.
तोक्यो के इस लिटिल इंडिया में क्या है
तो अब हम बताते हैं कि लिटिल इंडिया किस इलाके को कहते हैं और यहां क्या क्या है. तोक्यो में एदोगावा वार्ड को लिटिल इंडिया कहा जाता है. यहां भारतीय त्योहार, मंदिर, रेस्टोरेंट, इंटरनेशनल स्कूल हैं. ये इलाका जापानियों के साथ साल में एक बार नमस्ते इदोगावा के नाम से एक कल्चरल प्रोग्राम चलाता है, जिसमें जापानी लोगों को भारतीय घरों में भोजन के लिए बुलाया जाता है और आपसी समझ और तालमेल बढाते हैं.

एदोगावा की प्रसिद्ध मिठाई की दुकान, जो भारतीय खाना परोसने वाला एक प्रसिद्ध रेस्टोरेंट भी है.
भारतीय रेस्टोरेंट, किराना दुकानें, मसाला शॉप्स
यहां वही भोजन मिल जाता है जो भारत में जुबान पर चढ़ा हुआ है यानि करी, डोसा, बिरयानी से लेकर मिठाई तक. अक्सर जापान की राजधानी तोक्यो आने वाले भारतीय इंडियन फूड जायके लिए यहां आते हैं. यहां सुपर मार्केट में भारतीय मसाले, सब्जियां, दाल, चावल और आटा मिल जाता है

योगेंद्र पौराणिक जो एदोगावा इलाके से पहले भारतीय विधानसभा सदस्य बने.
यहां एक इंडियन इंटरनेशनल स्कूल
इस इलाके में भारतीयों का एक इंडियन इंटरनेशनल स्कूल है. यहीं पर भारतीय एसोसिएशन और कल्चरल क्लब भी सक्रिय हैं. सप्ताहांत पर पार्कों और सामुदायिक हॉल में क्रिकेट मैच, योग क्लास और बॉलीवुड डांस क्लास जैसी गतिविधियां होती हैं.

धीरे धीरे इस इलाके में हुई भारतीयों की बसावट
2000 के बाद जापान में सॉफ़्टवेयर और आईटी सर्विसेज़ की भारी मांग हुई. टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़, इंफोसिस और विप्रो जैसी भारतीय कंपनियों ने टोक्यो में ऑफिस खोले. इसके चलते बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियर और उनके परिवार टोक्यो आए. आज तोक्यों में मौजूद भारतीयों का बड़ा हिस्सा यहीं रहता है.
जापान का पहला भारतीय हिंदू मंदिर कहां और कब बना
जापान का पहला हिंदू मंदिर इस्कॉन ने तोक्यो में खोला. बाद में फिर अक्षरधाम और स्वामिनारायण मंदिर और अन्य हिंदू मंदिरों की स्थापना हुई. वैसे ध्यान देने वाली बात यह है कि जापान में हिंदू देवी-देवता का प्रभाव बौद्ध धर्म के जरिए सदियों पहले से ही है. इसका मतलब यह है कि परंपरागत हिंदू मंदिर की तरह की संरचनाएं भले बाद में बनी हों लेकिन हिंदू देवी-देवताओं की पूजा जापान में लंबे समय से चल रही है. जनवरी 2025 तक जापान में करीब 28 हिंदू मंदिर हैं.





