लगातार मूसलाधार बारिश की वजह से जम्मू का हाल बेहाल है. बादल फटने की ताबड़तोड़ कई घटनाओं ने घर से मकान और सड़कों तक को ध्वस्त कर दिया है. फ्लैश फ्लड ने मुसीबत को और बढ़ा दिया है. पंजाब का हर जिला बाढ़ से परेशान है. फसलों को व्यापक पैमाने पर नुकसान पहुंचा है. उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की हालत तो और भी खराब है. भारी बारिश की वजह से लगातार लैंडस्लाइड की घटनाएं हो रही हैं. जानमाल का काफी नुकसान हुआ है. देश के ऊपरी हिस्सों में लगातार बारिश होने की वजह से दिल्ली-एनसीआर के साथ ही हरियाणा में भी बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है. इस बार के मानसून सीजन में औसत से ज्यादा बारिश होने के पीछे एक्सपर्ट मोटे तौर पर तीन वजहें गिना रहे हैं – लो-प्रेशर सिस्टम, साइक्लोनिक सर्कुलेशन और पश्चिम विक्षोभ यानी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस.

अमृतसर के अजनाला गांव में लोगों को बचाने के लिए सेना को उतरना पड़ा. (पीटीआई)
लो-प्रेशर सिस्टम और साइक्लोनिक सर्कुलेशन
पश्चिमी विक्षोभ: बारिश की बड़ी वजह
हालांकि, 25 अगस्त को यह मानसून ट्रफ पूरे क्षेत्र में सक्रिय था, लेकिन उत्तर-पश्चिमी राज्यों (खासकर जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और पंजाब) में बारिश की तीव्रता का मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ रहा. पश्चिमी विक्षोभ आमतौर पर भूमध्यसागर से उठते हैं और उत्तरी भारत को प्रभावित करते हैं. ये भी लो-प्रेशर और साइक्लोनिक सर्कुलेशन वाले तूफान होते हैं, लेकिन ऊंचे वायुमंडलीय स्तर पर सक्रिय रहते हैं और सामान्य तौर पर मानसून के महीनों (जुलाई और अगस्त) में कम ही दिखाई देते हैं. साल 1971 से 2020 के बीच अगस्त महीने में औसतन 1.42 पश्चिमी विक्षोभ ही दर्ज किए गए. कई बार तो एक भी नहीं. इसके विपरीत, अगस्त 2025 में अकेले पांच विक्षोभ रिकॉड किए गए.इसने मानसून की गतिविधियों को असामान्य रूप से तीव्र बना दिया. नॉर्थवेस्ट इंडिया में इसकी वजह से व्यापक और औसत से ज्यादा बारिश हो रही है.

उत्तराखंड के धराली में फ्लैश फ्लड की वजह से व्यापक तबाही मचाई है. (पीटीआई)
अगस्त 2025 की असामान्य गतिविधि क्यों?
दोहरे प्रभाव से आपदा
साल 2013 में उत्तराखंड में आई विनाशकारी बाढ़ भी इसी तरह की स्थिति का परिणाम थी, जब पश्चिमी विक्षोभ और मानसून सिस्टम ने एक-दूसरे को मजबूत किया था. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इनकी दो प्रकार की परस्पर क्रियाएं होती हैं. पहली, जब एक प्रणाली दूसरी को नमी उपलब्ध कराती है और दूसरी, जब दोनों आपस में मिलकर बारिश की तीव्रता बढ़ा देते हैं. अगस्त 2025 की घटनाओं में दूसरी स्थिति सामने आई, जहां पश्चिमी विक्षोभों ने मानसून ट्रफ को और मजबूत किया. इसने उत्तर-पश्चिम भारत को दिनों तक लगातार और असामान्य बारिश में डुबोए रखा.





