भारत » जम्‍मू-पंजाब से दिल्‍ली तक क्‍यों टूटे रहे बारिश के रिकॉर्ड, क्‍या हैं वे तीन सिस्‍टम, जो इसके लिए जिम्‍मेदार – why southwest monsoon rain why northwest india face deluge 3 system low pressure cyclonic circulation western disturbances explainer

जम्‍मू-पंजाब से दिल्‍ली तक क्‍यों टूटे रहे बारिश के रिकॉर्ड, क्‍या हैं वे तीन सिस्‍टम, जो इसके लिए जिम्‍मेदार – why southwest monsoon rain why northwest india face deluge 3 system low pressure cyclonic circulation western disturbances explainer

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Monsoon Heavy Rain Explain: भारत का वेदर सिस्‍टम कई तरीके से प्रभावित होता है. हिमालय से आने वाली हवाएं अपना पूरा असर डालती हैं. उतना ही असर समंदर से आने वाली हवाओं का भी देश के मौसम पर पड़ता है. दक्षिण-पश्चिम मानसून इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. ला-नीना और अल-नीनो दो ऐसे सिस्‍टम हैं, जिसका असर एशिया से लेकर लैटिन अमेरिका और नॉर्थ अमेरिका तक पर पड़ता है. ला-नीना के प्रभावी होने से मानसून के मजबूत होने की संभावना प्रबल रहती है. इस बार कुछ ऐसे ही हालात हैं. पर सबसे बड़ा सवाल है कि इस बार के मानसून में खासकर उत्‍तर और पश्चिम भारत में इतनी ज्‍यादा बारिश क्‍यों हो रही है? सूरत से लेकर जम्‍मू, शिमला, उत्‍तरकाशी, गुरदासपुर जैसी जगहों पर भीषण बारिश के चलते व्‍यापक पैमाने पर तबाही मची है.

लगातार मूसलाधार बारिश की वजह से जम्‍मू का हाल बेहाल है. बादल फटने की ताबड़तोड़ कई घटनाओं ने घर से मकान और सड़कों तक को ध्‍वस्‍त कर दिया है. फ्लैश फ्लड ने मुसीबत को और बढ़ा दिया है. पंजाब का हर जिला बाढ़ से परेशान है. फसलों को व्‍यापक पैमाने पर नुकसान पहुंचा है. उत्‍तराखंड और हिमाचल प्रदेश की हालत तो और भी खराब है. भारी बारिश की वजह से लगातार लैंडस्‍लाइड की घटनाएं हो रही हैं. जानमाल का काफी नुकसान हुआ है. देश के ऊपरी हिस्‍सों में लगातार बारिश होने की वजह से दिल्‍ली-एनसीआर के साथ ही हरियाणा में भी बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है. इस बार के मानसून सीजन में औसत से ज्‍यादा बारिश होने के पीछे एक्‍सपर्ट मोटे तौर पर तीन वजहें गिना रहे हैं – लो-प्रेशर सिस्‍टम, साइक्‍लोनिक सर्कुलेशन और पश्चिम विक्षोभ यानी वेस्‍टर्न डिस्‍टर्बेंस.

Punjab Flood
अमृतसर के अजनाला गांव में लोगों को बचाने के लिए सेना को उतरना पड़ा. (पीटीआई)

लो-प्रेशर सिस्टम और साइक्‍लोनिक सर्कुलेशन

लो-प्रेशर यानी कम दबाव वाले क्षेत्र वातावरण में नमी और हवा को ऊपर की ओर खींचते हैं. जब यह हवा ऊपर जाकर ठंडी होती है तो बारिश का कारण बनती है. इसी तरह, चक्रवाती परिसंचरण (cyclonic circulation) हवा को सर्कुलर तरीके से हवा को खींचते हैं, जिससे मानसून के दौरान व्यापक वर्षा होती है. बता दें कि साइक्‍लोनिक सर्कुलेशन एक तरह से चक्रवात जैसी परिस्थितियों का निर्माण करते हैं. इस मानसून सीजन में अगस्त के दूसरे पखवाड़े में अकेले चार बड़े लो-प्रेशर सिस्टम बने हैं. यह कम दबाव वाले क्षेत्र जब जमीन से लगभग 1.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर लंबी आकृति में फैलते हैं, तो इसे मानसून ट्रफ कहा जाता है. 25 अगस्त को ऐसे ही ट्रफ का फैलाव बंगाल की खाड़ी से उत्तर-पश्चिमी राज्यों तक देखा गया, जिसने व्यापक बारिश की पृष्ठभूमि तैयार की.

पश्चिमी विक्षोभ: बारिश की बड़ी वजह

हालांकि, 25 अगस्त को यह मानसून ट्रफ पूरे क्षेत्र में सक्रिय था, लेकिन उत्तर-पश्चिमी राज्यों (खासकर जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और पंजाब) में बारिश की तीव्रता का मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ रहा. पश्चिमी विक्षोभ आमतौर पर भूमध्यसागर से उठते हैं और उत्तरी भारत को प्रभावित करते हैं. ये भी लो-प्रेशर और साइक्‍लोनिक सर्कुलेशन वाले तूफान होते हैं, लेकिन ऊंचे वायुमंडलीय स्तर पर सक्रिय रहते हैं और सामान्य तौर पर मानसून के महीनों (जुलाई और अगस्त) में कम ही दिखाई देते हैं. साल 1971 से 2020 के बीच अगस्त महीने में औसतन 1.42 पश्चिमी विक्षोभ ही दर्ज किए गए. कई बार तो एक भी नहीं. इसके विपरीत, अगस्त 2025 में अकेले पांच विक्षोभ रिकॉड किए गए.इसने मानसून की गतिविधियों को असामान्य रूप से तीव्र बना दिया. नॉर्थवेस्‍ट इंडिया में इसकी वजह से व्‍यापक और औसत से ज्‍यादा बारिश हो रही है.

Uttarakhand Landslide
उत्‍तराखंड के धराली में फ्लैश फ्लड की वजह से व्‍यापक तबाही मचाई है. (पीटीआई)

अगस्त 2025 की असामान्य गतिविधि क्यों?

25-27 अगस्त के बीच ईरान के ऊपर लगभग 12 किलोमीटर ऊंचाई पर हवाएं स्थिर रहीं. वहां 200 mb स्तर पर हवाएं सामान्य चक्रवाती दिशा (एंटी-क्लॉकवाइज) के बजाय घड़ी की दिशा (क्लॉकवाइज) में बह रही थीं. इसे वायुमंडलीय ‘ब्लॉकिंग’ कहा जाता है. इस स्थिरता ने पश्चिमी विक्षोभों के रास्ते को बदल दिया और उन्हें दक्षिण की ओर भारत की तरफ खिसका दिया. नतीजतन मानसून से पहले से उपलब्ध नमी के साथ इन विक्षोभों का मेल हुआ और जम्मू-कश्मीर सहित पूरे उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश ने विकराल रूप ले लिया. यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग में रिसर्च साइंटिस्‍ट अक्षय डिओरास बताते हैं, ‘मानसून नमी की आपूर्ति करता है, लेकिन जब पश्चिमी विक्षोभ इसमें शामिल हो जाते हैं तो यह नमी भारी और व्यापक वर्षा में बदल जाती है. सामान्य तौर पर ऐसा मेल मानसून के शुरू होने या इसके लौटने के समय देखने को मिलता है, अगस्त में नहीं.’

दोहरे प्रभाव से आपदा

साल 2013 में उत्तराखंड में आई विनाशकारी बाढ़ भी इसी तरह की स्थिति का परिणाम थी, जब पश्चिमी विक्षोभ और मानसून सिस्टम ने एक-दूसरे को मजबूत किया था. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इनकी दो प्रकार की परस्पर क्रियाएं होती हैं. पहली, जब एक प्रणाली दूसरी को नमी उपलब्ध कराती है और दूसरी, जब दोनों आपस में मिलकर बारिश की तीव्रता बढ़ा देते हैं. अगस्त 2025 की घटनाओं में दूसरी स्थिति सामने आई, जहां पश्चिमी विक्षोभों ने मानसून ट्रफ को और मजबूत किया. इसने उत्तर-पश्चिम भारत को दिनों तक लगातार और असामान्य बारिश में डुबोए रखा.

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