विदेश » छोटी मकड़ी का बड़ा जुगाड़!’ खुद जैसा डरावना नकली रूप बनाकर शिकारियों को देती है चकमा

छोटी मकड़ी का बड़ा जुगाड़!’ खुद जैसा डरावना नकली रूप बनाकर शिकारियों को देती है चकमा

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घने जंगलों में रहने वाली कुछ छोटी-छोटी मकड़ियां अब अपने बचाव के लिए ऐसा कमाल कर रही हैं, जिसे देखकर वैज्ञानिक भी हैरान हैं. ये मकड़ियां अपने जाल पर खुद जैसा ही एक ‘नकली मकड़ा’ (Dummy Spider) बना रही हैं ताकि शिकारी उन्हें असली समझकर डर जाएं और हमला न करें.

पहली बार देखा गया ऐसा व्यवहार
वैज्ञानिकों ने बताया कि साइक्लोसा नाम की इन मकड़ियों की दो प्रजातियां फिलीपींस और पेरू के वर्षावनों में पाई गई हैं. इन दोनों को पहली बार ऐसा करते हुए देखा गया है. ये अपने जाल पर रेशम, पत्तों, सूखे कीड़ों के शरीर और पेड़ों के टुकड़ों से खुद जैसी बड़ी मूर्ति तैयार करती हैं.

वैज्ञानिकों के मुताबिक यह किसी भी जीव द्वारा “डराने वाला पुतला” बनाने का पहला मामला है. यानी ये मकड़ियां खुद को बचाने के लिए अपने ही जैसे डरावने “मॉडल” तैयार कर लेती हैं.

असली से 10 गुना बड़ा नकली मकड़ा
शोध में पता चला कि कई बार ये नकली मकड़ा असली मकड़ी से 10 गुना तक बड़ा होता है. इसे मकड़ी अपने जाल के बिल्कुल बीचोंबीच रखती है. और जब कोई शिकारी पास आता है, तो वो पूरा जाल हिलाने लगती है ताकि ऐसा लगे कि वही बड़ा नकली मकड़ा हिल रहा है. इससे शिकारी डरकर वहां से भाग जाता है.

शोधकर्ताओं ने लिखा है, “हमने पहली बार दो महाद्वीपों की साइक्लोसा प्रजातियों में ऐसे जाल देखे हैं, जिनके बीच बना ‘सजावटी हिस्सा’ बिल्कुल बड़े मकड़े जैसा दिखता है.”

रात में करती हैं ये कमाल
पेरू में देखी गई Cyclosa मकड़ी रात होते ही अपना नकली मकड़ा तैयार करती है. वो अंधेरे में ये काम शुरू करती है और सुबह होने से पहले बाकी जाल को पूरा करती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि ये मकड़ी की रक्षा रणनीति का हिस्सा है.

रात में शिकारी मक्खियाँ या चिड़ियाँ कम सक्रिय होती हैं, इसलिए उस समय मकड़ी सुरक्षित रहती है. वो सबसे पहले अपना नकली मकड़ा बना लेती है ताकि दिन निकलते ही अगर कोई शिकारी आए, तो उसे भ्रम हो जाए कि यहाँ पहले से ही बड़ा शिकारी बैठा है.

मकड़ी का यह जुगाड़ बना उसकी सुरक्षा की ढाल
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह विकास (Evolution) का हिस्सा है. यानी वक्त के साथ इन मकड़ियों ने अपने बचाव के लिए यह अनोखा तरीका सीख लिया है. इससे दिन के वक्त वे कम समय तक खतरे में रहती हैं.

वैज्ञानिक अब ये समझना चाहते हैं कि आखिर इन खास मकड़ियों में ही ऐसा व्यवहार क्यों विकसित हुआ. क्या यह सिर्फ शिकारियों के डर से हुआ या इसके पीछे कोई और कारण है?

आगे और रिसर्च की तैयारी
शोध करने वाली टीम का कहना है कि आगे के प्रयोगों में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि क्या बड़े या छोटे नकली मकड़े सच में ज्यादा सुरक्षा देते हैं या नहीं.

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