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Harpoon Anti-Ship Missile: चीन आर्मी, एयरफोर्स और नेवी को मॉडर्न वेपन सिस्टम से लैस करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहा है. बीजिंग का लक्ष्य दुनिया का सबसे ताकतवर देश बनना है. यही वजह है कि अमेरिका के बाद चीन ही वह देश है, जिसका रक्षा बजट सबसे ज्यादा है. कटिंग एज टेक्नोलॉजी से लैस फाइटर जेट, एयरक्राफ्ट कैरियर और मिसाइल डिफेंस पावर का मुख्य आधार है. इन सबके बावजूद चीन को क्षेत्रीय स्तर पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

Harpoon Anti-Ship Missile: अमेरिका ने चीन के कट्टर दुश्मन रिपब्लिक ऑफ चाइना यानी ताइवान को हार्पून एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम की खेप डेलिवर किया है. (फाइल फोटो/Reuters)
Harpoon Anti-Ship Missile: चीन दुनिया का बेताज बादशाह बनना चाहता है. अपनी इस महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए वह सबसे पहले क्षेत्रीय ताकतों को दंत और नख विहीन यानी पूरी तरह से कमजोर बनाकर छोड़ना चाहता है. ताइवान, वियतनाम, जापान, साउथ कोरिया समेत पूर्वी एशिया के कई ऐसे देश हैं, जिनकों ड्रैगन की सनक का शिकार होना पड़ रहा है. चीन के बढ़ते दखल को देखते हुए ताइवान, वियतनाम और जापान जैसे देशों ने खुद को आधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस करना शुरू कर दिया है. जापान इस दिशा में लगातार प्रगति कर रहा है. हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, जापान ने ऐसा लेजर वेपन सिस्टम डेवलप किया है जो मेटल को भी चीर सकता है. इसे खासतौर पर ड्रोन को मार गिराने के लिए तैयार किया गया है. दूसरी तरफ, ताइवान भी देसी टेक्नोलॉजी के साथ ही इंपोर्टेड हथियारों की मदद से खुद को सशक्त बनाने में जुटा है. इसी क्रम एक बड़ी खबर सामने आई है, जिससे चीन का टेंशन बढ़ना तय है. बताया जा रहा है कि अमेरिका ने ताइवान को हार्पून एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम्स की नई खेप मुहैया कराई है. यह रिपोर्ट उस समय सामने आई है, ताइवान के तटवर्ती इलाकों में चीनी नौसेना ने अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं.
अमेरिका ने ताइवान की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए रिपब्लिक ऑफ चाइना आर्म्ड फोर्सेज (RoCAF) को हार्पून एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी शुरू कर दी है. हाल में सामने आई तस्वीरों में मोबाइल मिसाइल लॉन्चर, रडार वाहन और कमांड-एंड-कंट्रोल यूनिट्स को देखा गया है, जो इस नई कोस्टल डिफेंस सिस्टम का हिस्सा हैं. ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने अमेरिका से कुल 100 लैंड-बेस्ड हार्पून कोस्टल डिफेंस सिस्टम और उनसे जुड़ी 400 मिसाइलों का ऑर्डर दिया है, जिन्हें ताइवान की समुद्री सुरक्षा रणनीति में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला माना जा रहा है. 1949 के बाद से RoCAF का मुख्य बल ताइवान द्वीप पर केंद्रित रहा है, जहां भौगोलिक परिस्थितियों के कारण तटीय रक्षा प्रणालियों की भूमिका बेहद अहम है. अमेरिकी और ताइवानी अधिकारियों के बीच तय कार्यक्रम के अनुसार इन प्रणालियों की डिलीवरी चरणबद्ध तरीके से की जा रही है. योजना के तहत 2026 के अंत तक 32 सिस्टम सौंपे जाएंगे, जबकि शेष 68 सिस्टम 2027 तक मिलने की उम्मीद है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा ताइवान की समुद्री निगरानी और जवाबी कार्रवाई की क्षमता को कहीं अधिक लचीला और गतिशील बनाएगा.
- बोइंग द्वारा विकसित हार्पून मिसाइल एक आधुनिक, हर मौसम में काम करने वाली सबसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल है. यह 124 से 280 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अधिक दूरी तक मार कर सकती है और समुद्र की सतह के बेहद करीब उड़ान भरती है.
- यह मिसाइल जहाज, पनडुब्बी, विमान और जमीन आधारित प्लेटफॉर्म से दागी जा सकती है. इसमें सक्रिय रडार गाइडेंस और जीपीएस आधारित नेविगेशन सिस्टम मौजूद है.
- हार्पून के RGM-84, UGM-84 और AGM-84 जैसे अलग-अलग वेरिएंट उपलब्ध हैं. ब्लॉक-II संस्करण तटीय ठिकानों और बंदरगाह में खड़े जहाजों को भी निशाना बना सकता है.
- इसमें करीब 500 पाउंड वजनी ब्लास्ट-पेनेट्रेशन वारहेड लगाया गया है. कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता इसे दुश्मन रडार से बचाने में मदद करती है.
- 1977 में सेवा में आई यह मिसाइल आज भी 30 से अधिक देशों में इस्तेमाल हो रही है. नए अपग्रेड के साथ इसे आधुनिक समुद्री युद्ध जरूरतों के अनुरूप बनाया जा रहा है.
Harpoon Anti-Ship Missile: हार्पून मिसाइल तकरीबन 280 किलोमीटर तक किसी वॉरशिप को तबाह करने में सक्षम है. (फाइल फोटो/Reuters)
ड्रैगन होगा लाल
RoCAF के लिए मंगाई गई मिसाइलें RGM-84L-4 ब्लॉक II (U) वेरिएंट की हैं, जिनमें पहले के मॉडलों की तुलना में बेहतर रेंज, उन्नत गाइडेंस और लक्ष्य निर्धारण क्षमताएं हैं. हालांकि, इसके बावजूद हार्पून मिसाइलों की आधुनिक युद्ध परिदृश्यों में प्रभावशीलता पर सवाल भी उठ रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इन मिसाइलों की अपेक्षाकृत धीमी गति और सीमित रेंज के कारण इन्हें अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम या लड़ाकू विमानों द्वारा रोका जा सकता है. इसके अलावा इनकी लागत अधिक होने के कारण इन्हें बड़े पैमाने पर ‘स्वार्म अटैक’ रणनीति में इस्तेमाल करना भी मुश्किल माना जा रहा है. फिर भी ताइवान की नेवी के लिए मोबाइल लॉन्च वाहनों और रडार सिस्टम्स का यह नेटवर्क चीन के खिलाफ उसकी असममित ‘एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल’ रणनीति का एक अहम स्तंभ बना हुआ है. तटीय इलाकों से दागी जा सकने वाली ये मिसाइलें संभावित शत्रु नौसैनिक जहाजों की आवाजाही को सीमित करने और ताइवान जलडमरूमध्य में शक्ति संतुलन बनाए रखने में सहायक मानी जा रही हैं. विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे मोबाइल सिस्टम दुश्मन की खुफिया निगरानी से बचते हुए तेजी से तैनात किए जा सकते हैं, जिससे उनकी जीवित रहने की क्षमता और प्रभावशीलता बढ़ जाती है.
यह डिलीवर क्यों अहम?
हार्पून सिस्टम की डिलीवरी अमेरिका द्वारा ताइवान की सैन्य क्षमता को व्यापक स्तर पर मजबूत करने की नीति का हिस्सा है. इसी क्रम में एडवांस्ड टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम (ATACMS), हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम (HIMARS) और संयुक्त रूप से विकसित सिंगल यूज मानव रहित हमलावर विमानों की आपूर्ति भी प्रस्तावित है. इन प्रणालियों का उद्देश्य ताइवान की उस क्षमता को बढ़ाना है, जिससे वह चीनी मुख्य भूमि पर महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को जोखिम में डाल सके. दिसंबर 2025 में अमेरिकी रक्षा विभाग ने 11.1 अरब डॉलर के हथियार सौदे को मंजूरी दी थी, जिसमें 420 ATACMS मिसाइलों का ट्रांसफर शामिल था. HIMARS आर्टिलरी सिस्टम के पहले 11 लॉन्चर नवंबर 2024 में ही ताइवान पहुंच चुके थे और इनसे लैस पहली ताइवानी सैन्य इकाई जुलाई 2025 की शुरुआत में गठित की गई थी. रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, इन नई प्रणालियों से ताइवान की लंबी दूरी तक सटीक हमले करने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें
February 09, 2026, 13:44 IST





