Agency:एजेंसियां
Last Updated:
Israel-Gaza War: गाजा में तबाही और भूखमरी के बावजूद यूरोप इजरायली हथियारों पर निर्भर है. विरोध-प्रदर्शन और पाबंदियों की बातें हो रही हैं, लेकिन अरबों डॉलर की डील्स यूरोप को पीछे हटने नहीं देतीं.
यूरोप अरबों डॉलर के इजरायली हथियार अभी भी ले रहा है. गाजा में तबाही और भूखमरी की खबरें लगातार आ रही हैं. इसी बीच कतर में हुए हालिया हमले के बाद यूरोप के कई नेता इजरायल पर गुस्सा दिखा रहे हैं. बातें हो रही हैं कि शायद इजरायल पर पाबंदियां लगाई जाएं और रिश्तों पर फिर से सोचा जाए. लेकिन असली खेल कहीं और है. गुस्से के बावजूद यूरोप का इजरायल से सबसे बड़ा रिश्ता उसके हथियारों से है. इजरायली डिफेंस सेक्टर अरबों डॉलर का है और यूरोप की सेनाएं इसके सबसे बड़े खरीदार हैं. सिर्फ पिछले साल ही यूरोप ने इजरायल से 8 अरब डॉलर के हथियार खरीदे, जो इजरायल की कुल रक्षा निर्यात का आधा हिस्सा है. और आने वाले समय में ये मांग और बढ़ने वाली है.
ट्रंप के समय नाटो देशों पर दबाव डाला गया कि वे अपने जीडीपी का बड़ा हिस्सा रक्षा खर्च पर लगाएं. पहले ये 2% था, अब 2035 तक 5% करने का टारगेट रखा गया है. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद ये और जरूरी माना जाने लगा. लेकिन बिना इजरायली हथियारों के ये लक्ष्य पाना आसान नहीं है.
तेल अवीव की एक रिसर्च कंपनी के एक्सपर्ट ने कहा कि भले ही लोगों के बीच इजरायल को लेकर गुस्सा है, लेकिन जब हथियारों की क्वालिटी की बात आती है तो यूरोप के पास ज्यादा ऑप्शन नहीं है.
इजरायल की तीन बड़ी डिफेंस कंपनियां– एल्बिट सिस्टम्स, राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स और इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज– यूरोप में सिर्फ सामान नहीं बेचतीं, बल्कि वहां की कंपनियों के साथ मिलकर काम भी करती हैं. मतलब ये कि भले ही यूरोप में लोग सड़कों पर इजरायल के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हों, लेकिन सरकारें हथियारों का सौदा जारी रखने के लिए मजबूर हैं. इसी वजह से यूरोप इजरायल को गाजा में ऑपरेशन रोकने या धीमा करने के लिए मजबूर करने में कामयाब नहीं हो पा रहा.
विरोध और तोड़फोड़
पश्चिमी देशों में जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं. खासकर इजरायल की हथियार कंपनियों को निशाना बनाया जा रहा है. जर्मनी के उल्म शहर में एल्बिट की फैक्ट्री पर हमला हुआ. ब्रिटेन में भी इस कंपनी की कई लोकेशंस को टारगेट किया गया, जिसके बाद सरकार ने कार्रवाई शुरू की.
हथियारों के नए-नए सौदे
एल्बिट की यूरोप को हुई बिक्री 2021 के मुकाबले दोगुनी हो गई है. अगस्त में कंपनी ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा डील किया— 1.6 अरब डॉलर का, वो भी किसी यूरोपीय देश के साथ. राफेल कंपनी अपने आयरन डोम और आयरन बीम सिस्टम के लिए जानी जाती है. उसने जर्मनी में पार्टनरशिप के जरिए अपने प्रोजेक्ट्स और फैलाए हैं. यूरोप उसकी इंटरनेशनल सेल्स का करीब आधा हिस्सा है.
यूरोप की आधी-अधूरी पाबंदियां
जर्मनी ने पिछले महीने गाजा में इस्तेमाल होने वाले कुछ हथियारों की सप्लाई रोक दी. लेकिन ये पाबंदी सिर्फ एक्सपोर्ट तक सीमित रही. उल्टा, इसके बाद जर्मनी ने इजरायल से करीब एक अरब यूरो के ड्रोन खरीदने का प्लान बना लिया. यानी यूरोप दबाव तो दिखाता है, लेकिन हथियारों के मामले में पीछे नहीं हटता.
New Delhi,Delhi
September 13, 2025, 16:56 IST





