एक जमाने में वह रियल एस्टेट के दिग्गज थे. फिर ट्रंप के गोल्फ पार्टनर बने. अब वो ऐसे शख्स बन गए हैं, जिसने इजरायल और हमास के बीच समझौता कराने में सबसे अहम भूमिका अदा की, जिसके द्वारा बनाई गई योजना इजरायल और हमास दोनों को रास आई. अब इस समझौते का पहला चरण हकीकत बन चुका है. पूरी दुनिया इसका स्वागत कर रही है. इस रणनीतिकार का नाम स्टीव विटकॉफ है.
न्यूयॉर्क के रियल एस्टेट डेवलपर और निवेशक स्टीव विटकॉफ ने कथित तौर पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को यह संदेश देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई कि ट्रंप चाहते हैं कि यह समझौता हो जाए. वह ट्रंप के पुराने दोस्त भी हैं. उन्होंने मध्य पूर्व में ट्रंप के दूत के रूप में काम किया. बातचीत के दौरान इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और हमास के बीच संवाद को सुगम बनाने में अहम भूमिका निभाई.
उन्होंने ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और कतर, मिस्र और तुर्की के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर युद्धविराम समझौते और बंधक रिहाई समझौते को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. विटकॉफ के व्यावसायिक अनुभव और क्षेत्र में उनके संबंधों ने उन्हें दबाव बनाने और बातचीत को आगे बढ़ाने में मदद की, जिससे अक्टूबर 2025 में ट्रंप द्वारा घोषित शांति योजना का शुरुआती चरण शुरू हो चुका है.

40 सालों से ट्रंप के दोस्त
विटकॉफ चार दशकों से ट्रंप के दोस्त हैं. दोनों साथ में गोल्फ खेलते हैं. विटकॉफ खुद यहूदी हैं, लिहाजा इस पूरे मामले में और असरदार होकर उभरे. ट्रंप ने पिछले साल नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के तुरंत बाद विटकॉफ को अपने आगामी मध्य पूर्व दूत के रूप में घोषित किया था.
विदेश नीति का कोई अनुभव या ट्रेनिंग नहीं
उनके पास विदेश नीति का कोई अनुभव या प्रशिक्षण नहीं है, फिर भी उनकी नियुक्ति ट्रंप की कम विशेषज्ञता वाले अपरंपरागत लोगों को चुनने की पसंद के अनुरूप ही थी. ट्रंप ने तब अपने दोस्त के बारे में कहा, हमारे पास ऐसे लोग हैं जो मध्य पूर्व के बारे में सब कुछ जानते हैं, लेकिन वे ठीक से बोल नहीं पाते, वह एक बेहतरीन वार्ताकार हैं. ट्रंप और विटकॉफ के बीच घनिष्ठ और स्थायी संबंध हैं, वे एक दूसरे को 1980 के दशक से जानते हैं.
कैसे किया विटकॉफ ने अपना काम
अब ये जानते हैं इस साल जनवरी के बाद से विटकॉफ ने अपना काम कैसे किया. उन्होंने कतर की राजधानी दोहा में बाइडन टीम के साथ शामिल होकर वार्ताओं को गति दीं. कतरी पीएम शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने हमास के साथ बातचीत की, साथ ही इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू पर दबाव डालते रहे.
इसके बीच उतार चढ़ाव आते रहे.
विटकॉफ लगातार अमेरिका, कतर, मिस्र, गाजा, इजरायल और सऊदी अरब के बीच यात्राएं करते रहे ताकि डील लागू हो. इस साल मई में विटकॉफ अपने “विटकॉफ प्लान” के साथ तैयार थे. जिसमें 60-दिनों में युद्धविराम होना था. 10 जीवित बंधकों और 18 मृतकों की रिहाई होनी थी. साथ में इजरायली सेना IDF की आंशिक वापसी. ये योजना हमास को स्थायी युद्धविराम की ओर ले जाने वाली थी, लेकिन इजरायल ने इसे अस्थायी रखा.

अप्रैल, 2025 में पेरिस स्थित एलिसी पैलेस में विदेश मंत्री मार्को रुबियो, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट के साथ विशेष दूत के रूप में स्टीव विटकॉफ के साथ हिस्सा लेते हुए। (फ्रेडी एवरेट द्वारा आधिकारिक विदेश विभाग की तस्वीर)
लेकिन इस योजना में कहीं ना कहीं अड़चन भी आ रही थी. आखिरकार इस पूरे मामले में सफलता इस अक्टूबर में मिली. जब हमास और इजरायल दोनों ने “फर्स्ट फेज” पर सहमति कराई. अब इजरायल गाजा से अपने सैनिकों की वापसी पर सहमत है तो हमास बंधकों की रिहाई करने पर राजी हो गया. साथ ही इजरायल गाजा से पकड़े गए कैदजियों को छोड़ देगा.
मास्को जाकर पुतिन से भी मुलाकात की
बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि विटकॉफ ही वो शख्स भी थे, जिन्होंने मास्को में जाकर पुतिन से तब मुलाकात की, जब रूसी राष्ट्रपति पुतिन की ट्रंप से मुलाकात तय होने वाली थी. वह यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध में भी मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं.
गल्फ देशों से पुराने बिजनेस रिलेशन
दरअसल कहा जाता है कि विटकॉफ के गल्फ देशों में बिजनेस संबंध रहे हैं, जो हमास को प्रभावित करने में मददगार रहा. डिप्लोमेट न होने के बावजूद, विटकॉफ ने “डील क्लोजर” की तरह काम किया – दबाव, गारंटी और क्षेत्रीय मध्यस्थों का उपयोग. हमास ने इजरायल के वादा तोड़ने का आरोप लगाया लेकिन विटकॉफ ने गारंटर भूमिका से विश्वास बनाया.

विटकॉफ की खासियतें
1. उन्होंने कूटनीति में कोई पूर्व अनुभव नहीं होने के बावजूद, अपने डीलमेकर कौशल का उपयोग किया, जो उन्होंने रियल एस्टेट डीलिंग में सीखा. उनके कौशल ने मध्य पूर्व की जटिल और संवेदनशील राजनीतिक परिस्थितियों में बातचीत को आगे बढ़ाने में मदद की.
2. वह बाहरी व्यक्ति के रूप में आए, जिसकी वजह से वे पारंपरिक राजनीतिक बाधाओं को आसानी से पार कर पाए. वह नए तरीके से समाधान खोजने में सक्षम नजर आए.
3. विटकॉफ के पास ट्रंप के प्रति गहरी वफादारी और विश्वास था, जिससे ट्रंप ने उन्हें विशेष दूत बनाकर महत्वपूर्ण मध्यस्थता जिम्मेदारी सौंपी.
4. उनकी मध्यस्थता शैली में निजी संपर्क और भरोसेमंद रिश्तों का उपयोग प्रमुख था, जिसने उन्हें इज़राइल, हमास और अन्य मध्य पूर्व के खिलाड़ियों के बीच सेतु बनाने में मदद की.
5. वे बातचीत में धैर्य और लचक दिखाते हैं, जिससे जटिल विवादों को सुलझाने में सहूलियत होती है.
6. स्टीव विटकॉफ का जन्म 15 मार्च, 1957 को हुआ है. उनकी उम्र 68 वर्ष है.
7. विटकॉफ के पास एक बड़ी और विविध टीम है जिसमें कई विशेषज्ञ और मध्यस्थ शामिल हैं जो क्षेत्रीय राजनीति, कूटनीति, वित्त, और मानवतावाद से जुड़े मुद्दों पर काम करते हैं. उनके पास एक मजबूत, पेशेवर और उच्च स्तरीय टीम है जो विभिन्न पहलुओं में विशेषज्ञता रखती है.
8. स्टीवन चार्ल्स विटकॉफ वकील भी रहे हैं. वह एक रियल एस्टेट डेवलपमेंट फर्म विटकॉफ ग्रुप के संस्थापक और अध्यक्ष हैं. विटकॉफ ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और हॉफस्ट्रा विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की. उन्होंने रियल एस्टेट वकील के रूप में अपना करियर शुरू किया था.
9. विटकॉफ रूसी-यहूदी वंश के हैं. उनका जन्म न्यूयॉर्क शहर के ब्रोंक्स में हुआ. कुछ लोग दावा करते हैं कि उनके दादा-दादी रूसी साम्राज्य से संयुक्त राज्य अमेरिका आए थे. उनके तीन बेटे हैं.





