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किस देश में अभी जब पहली बार मिले 3 मच्छर तो क्यों मचा तहलका, ये कैसे पहुंचे वहां

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अब तक आइसलैंड को ऐसे देश के रूप में जाना जाता था, जहां कोई मच्छर नहीं होते. ये मच्छर फ्री देश कहा जाता था. लेकिन इसी महीने में जब वहां तीन मच्छर मिले तो ये उस देश के लिए बड़ी खबर बन गई. इसने तहलका मचा दिया कि ये वहां कैसे आए और कैसे वहां की ठंडी आबोहवा के बाद भी जिंदा बचे रहे.

आइसलैंड में इससे पहले तक कभी कोई मच्छर नहीं मिले थे. ना ही इस देश में उनकी कोई आबादी थी. ये देश शान से दुनिया को कहता था कि हम दुनिया के ऐसे दो तीन देशों में जो मच्छर मुक्त हैं. यहां की सर्दियां लंबी और अत्यधिक ठंडी होती हैं. इसका तापमान (−10°C या उससे भी कम होता है. सर्दियों में जल-स्रोत पूरी तरह जम जाते हैं, जिससे मच्छरों के अंडे या लार्वा जीवित नहीं रह पाते. गर्मियां बहुत छोटी और ठंडी रहती हैं, जिनमें मच्छरों का जीवन-चक्र पूरा नहीं हो पाता.

अब अचानक मच्छर आए कहां से

वैज्ञानिकों को जब तीन मच्छर मिले तो उन्होंने इसकी 3 मुख्य संभावनाएं मानी हैं.
– कहीं ये मच्छर किसी यात्री और कार्गो शिप के जरिए तो नहीं आया.
– हाल के वर्षों में आइसलैंड के बंदरगाहों और हवाई अड्डों से अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक बढ़ा है. खासकर ब्रिटेन, नॉर्वे, और उत्तरी यूरोप से. लिहाजा मच्छर अंडे, लार्वा या प्युपा अवस्था में किसी कंटेनर, जहाज, हवाई माल, या वाहन के टायर में छिपे हो सकते हैं. यूरोप में क्यूलिसेटा एनूलेटा मच्छर की प्रजाति खूब आम है, इसलिए संभव है कि ये जहाजों और हवाई माल से वहां पहुंची हो.

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अब तक आइसलैंड को मच्छर मुक्त देश माना जाता था. ये मानते थे कि यहां की ठंडी जलवायु में मच्छर जिंदा ही नहीं रह सकते.

वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट कहती है, “मच्छर शायद किसी आयातित माल या पौधों के साथ छिपकर आए होंगे. आइसलैंड की असामान्य गर्मियों ने उन्हें जीवित रहने का मौका दिया.”

कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि यह प्रजाति तेज़ हवा या प्रवासी पक्षियों के साथ आई हो सकती है. यूरोप के कई मच्छर हल्के होते हैं और तेज़ हवाओं में कई सौ किलोमीटर तक उड़ सकते हैं. आइसलैंड में हर साल हजारों प्रवासी पक्षी आते हैं – खासकर स्कैंडिनेविया और ब्रिटेन से. इनके पंखों या शरीर पर लार्वा या अंडे चिपककर आ सकते हैं. हालांकि ये संभावना कम मानी जा रही है, लेकिन पूरी तरह नकारा भी नहीं गया है.

क्या ये जलवायु परिवर्तन से संभव हुआ

एक संभावना यह है कि ये मच्छर पहले भी कभी-कभी पहुंचते रहे हों लेकिन ठंड की वजह से मर जाते थे. अब 2020 के बाद से आइसलैंड का औसत तापमान बढ़ा है. गर्मियों में यह 13–15°C तक पहुँच जाता है, जो कुछ प्रजातियों के लिए “जीवित रहने योग्य” है. यानि मच्छर अब ना केवल वहां पहुंच सकते हैं बल्कि कुछ सप्ताह तक टिक भी सकते हैं. यह केवल एक आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन का संकेत है कि ठंड के क्षेत्र अब मच्छरों के लिए पाबंदी वाले नहीं रहे.

मच्छर किस जगह पर पाए गए

तीनों मच्छरों में दो मादा हैं और एक नर. इन्हें जोसारह्रेपर नामक ग्रामीण इलाके में पकड़े गए. यह राजधानी रेक्जाविक से करीब 30 किलोमीटर दूर है. स्थानीय नागरिक वैज्ञानिक ने शराब में भीगी रस्सी से इन्हें पकड़ा. यह तकनीक आमतौर पर जैव-निगरानी के लिए प्रयोग होती है. बाद में आइसलैंड इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरल हिस्ट्री ने लैब में डीएनए टेस्ट कर पुष्टि की कि ये मच्छर क्यूलिसेटा एनूलेटा हैं.

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अब मच्छरों को आइसलैंड में आने से रोकने के लिए सघन अभियान चलाया जा रहा है. एयरपोर्ट से लेकर बंदरगाहों पर सर्विलांस चल रहा है.

अब इन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाया गया

अब इन्हें रोकने के लिए आइसलैंड के स्वास्थ्य और पर्यावरण मंत्रालय ने कई कदम उठाए हैं. सभी प्रमुख हवाई अड्डों और समुद्री बंदरगाहों पर इनसेक्ट वेक्टर सर्विलांस शुरू कर दिया गया है. विशेष रूप से रेक्जाविक और अकुरेयरी बंदरगाह पर हर आयातित कंटेनर की जांच की जा रही है. जलाशयों, तालाबों और निर्माण स्थलों में लार्वा के सैंपल लिए जा रहे हैं. नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी अजीब दिखने वाले कीट की रिपोर्ट करें.

मौसम और जलवायु डेटा क्या कहते हैं

पिछले 50 वर्षों में आइसलैंड का औसत तापमान करीब 1.5°C बढ़ा है. गर्मियों में पिघलती झीलों और दलदलों का तापमान अब पहले से ज़्यादा देर तक ऊंचा रहता है. यह स्थिति मच्छरों के लिए उपयुक्त बनती जा रही है. 2024 की गर्मियों में तापमान रिकॉर्ड स्तर (17°C) तक गया था. शायद इसी वजह से मच्छर जीवित रह सके.

आइसलैंड के अलावा वो जगहें जहां मच्छर नहीं पाए जाते

1. अंटार्कटिका – यहां मच्छर बिल्कुल नहीं मिलते. ये पूरी तरह मच्छर-मुक्त महाद्वीप. यह पृथ्वी का एकमात्र महाद्वीप है जहां अब तक कोई मच्छर नहीं पाया गया. ये पूरे साल बर्फ से ढका रहता है. हर जगह तापमान शून्य से नीचे रहता है. हालांकि कुछ उप-अंटार्कटिक द्वीपों जैसे साउथ जॉर्जिया पर मिजेस नाम के कीट मिलते हैं लेकिन ये असली मच्छर नहीं हैं.

2. फरोए द्वीपसमूह – ये द्वीप समूह डेनमार्क का हिस्सा हैं. ये उत्तरी अटलांटिक में आइसलैंड और नॉर्वे के बीच हैं. यहां भी स्थायी मच्छर आबादी नहीं पाई जाती. ठंडी हवाएं और तेज़ समुद्री झोंके मच्छरों को उड़ने या टिकने नहीं देते. साल में 300 से ज़्यादा दिन बारिश या तेज़ हवा, जिसमें लार्वा का विकास असंभव है.

3. ग्रीनलैंड – ये देश भी लगभग मच्छर-मुक्त है. हालांकि तकनीकी रूप से ग्रीनलैंड के कुछ दक्षिणी हिस्सों में गर्मियों में मच्छर दिखे हैं. इस देश के 80% हिस्से में यानी बर्फीले क्षेत्र में मच्छर नहीं पनप सकते. वहां पानी या मिट्टी दोनों साल के ज़्यादातर समय जमी रहती हैं. इसे करीब मच्छर मुक्त देशों में गिना जाता है.

4. सेशेल्स, मॉरीशस और मालदीव के कुछ द्वीप – ये गर्म देश हैं, लेकिन कुछ छोटे द्वीप प्राकृतिक रूप से मच्छर-मुक्त हैं. मच्छरों को अंडे देने के लिए मीठे या स्थिर पानी की ज़रूरत होती है. इन द्वीपों पर मीठे पानी की झीलें नहीं हैं, केवल खारा समुद्री पानी या बहते स्रोत हैं. हालांकि पर्यटन और मानव गतिविधि के साथ अब यहां के कई द्वीपों में मच्छर पहुंचने लगे हैं.

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