एम्स प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी में बताया गया कि इन सुरक्षा जवानों को सुरक्षा कौशल, निगरानी तकनीक, आगंतुक प्रबंधन, संघर्ष निवारण तकनीक, भीड़ नियंत्रण, कतार प्रबंधन, अग्नि सुरक्षा और निकासी प्रक्रिया, आपदा प्रबंधन, चिकित्सा आपातकालीन सहायता, आतंकवादी खतरे के बारे में जागरूकता, अस्पताल-विशिष्ट प्रोटोकॉल, संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा, वीवीआईपी गतिविधियों को संभालना और रोगी अनुरक्षण कर्तव्य के बारे में ट्रेंड किया गया है.
एक महीने तक चली यह ट्रेनिंग अपने आप में इसलिए भी एतिहासिक है क्योंकि इससे पहले एम्स के सुरक्षा गार्ड्स को ऐसी पुलिस ट्रेनिंग नहीं दी गई है. प्रशिक्षण में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को विशेष महत्व दिया गया ताकि एम्स के सुरक्षा जवान हर परिस्थिति में सक्षम बने रहें. यह ट्रेनिंग संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था को और भी बेहतर बनाने के लिए दी गई है. ताकि रोजाना आने वाले डॉक्टर, रोगियों, आगंतुकों और एम्स कर्मचारियों की सुरक्षा और भी बेहतर हो. जल्द ही सभी सुरक्षा गार्ड्स को ट्रेंड कर दिया जाएगा.
गौरतलब है कि एम्स में इलाज के लिए आने वाले मरीजों से लेकर डॉक्टरों की सुरक्षा का दारोमदार इन सुरक्षाकर्मियों पर ही रहता है. कई बार अस्पताल में टकराव होने पर भी सुरक्षा गार्ड्स उसे सुलझाने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं.





