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ईरान की मिसाइल सिटी क्या है भूमिगत सैन्य नेटवर्क की पूरी जानकारी.

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इस समय जबकि अमेरिका की फौजें ईरान के बगल में जाकर खड़ी हो गई हैं और उसे काफी हद तक घेर चुकी हैं, तब भी पहाड़ों के आधा किलोमीटर नीचे बनी हुई ईरान की मिसाइल सिटी उसके लिए रहस्य बनी हुई है. ये सिटी एक कमरा या छोटा हॉल नहीं है. ये हजारों किलोमीटर में फैले एक भूमिगत नेटवर्क का हिस्सा है.

ईरान की मिसाइल सिटीज की लंबाई-चौड़ाई को लेकर ईरान ने कभी कोई सटीक नक्शा तो जारी नहीं किया है. ये टॉप सीक्रेट है लेकिन सैटेलाइट तस्वीरों, लीक हुई वीडियो फुटेज और सैन्य विशेषज्ञों के विश्लेषण के आधार पर ये अंदाज लगाया जा रहा है कि ईरान की मिसाइल सिटी काफी बड़ी है. ये किसी भुलभुलैया की तरह भी है.

ये कोई एक सीधी सुरंग नहीं होती. यह हजारों कमरों और रास्तों का एक जाल है. दुश्मन को यह पता ही नहीं होता कि मिसाइलें असल में किस हिस्से में रखी हैं.

जाहिर है कि इन मिसाइल सिटी में ना केवल मिसाइलों का जखीरा रखा है बल्कि पहाड़ों के नीचे सुरंगों में बनी इस सिटी की लंबाई के बारे में किसी को कोई अंदाज नहीं. ये जरूर कहा जा रहा है कि पहाड़ों ने नीचे सुरंगों के तौर पर बनी ये मिसाइल सिटी इतनी लंबी हैं कि इनके अंदर ट्रक और मिसाइल लॉन्चर्स आसानी से एक छोर से दूसरे छोर तक दौड़ सकते हैं.

जमीन के नीचे नेशनल हाइवे जैसा विशाल नेटवर्क

ईरान का दावा है कि उसकी भूमिगत “मिसाइल सिटीज” देश के लगभग हर प्रांत में हैं. अगर इन सबको जोड़ दिया जाए तो ये एक भूमिगत नेशनल हाईवे जैसा विशाल नेटवर्क बन जाता है. ईरान की आधिकारिक मीडिया द्वारा जारी वीडियो में देखा गया है कि ये सुरंगें इतनी चौड़ी हैं कि दो बड़े मिसाइल ट्रक एक-दूसरे के बगल से गुजर सकते हैं.

इनकी ऊंचाई लगभग 30 से 50 फीट तक होती है, ताकि विशाल बैलिस्टिक मिसाइलों जैसे शहाब-3 या खुर्रमशहर को खड़ा किया जा सके. उन्हें वर्टिकल पोजीशन में रखा जा सके. विशेषज्ञों ने सैटेलाइट के जरिए कुछ खास मिसाइल सिटी ठिकानों की पहचान की है.

कहां – कहां ईरान में मिसाइल सिटी

फारस की खाड़ी के तट पर यानि समुद्र के किनारे पहाड़ों के नीचे मीलों लंबी सुरंगें हैं. यहां से मिसाइलें सीधे समुद्र में जहाजों पर दागी जा सकती हैं. ये किसी भी दुश्मन के अंदर डर पैदा करती हैं. ऐसी ही मिसाइल सिटी पश्चिम ईरान में है. इसकी सुरंगें बहुत गहरी और पहाड़ी इलाकों में फैली हैं. माना जाता है कि यहां इजरायल को निशाना बनाने वाली मिसाइलें रखी गई हैं.

मध्य ईरान यानि सेमनान, नतेंज में जमीन के नीचे बनी मिसाइल सिटी में मिसाइलों के साथ-साथ परमाणु कार्यक्रम से जुड़े रिसर्च सेंटर भूमिगत हैं. यहां का एरिया कई वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है.

ईरान ने इन सुरंगों को इस तरह बनाया है कि अगर एक हिस्सा बमबारी में ढह भी जाए, तो दूसरा हिस्सा काम करता रहे. इसे “कंपार्टमेंटलाइजेशन” कहते हैं, यानी एक हिस्सा दूसरे से पूरी तरह कटा हो सकता है. कुल मिलाकर ये मिसाइल सिटी पहाड़ों के नीचे बने आधुनिक सैन्य शहर हैं.

ईरान के लिए ये मिसाइल सिटीज उसकी दूसरी प्रहार क्षमता का आधार हैं. यदि ऊपर की सतह पर ईरान की वायुसेना तबाह भी हो जाए, तो भी ये भूमिगत मिसाइलें सुरक्षित रहेंगी और जवाबी हमला कर सकेंगी.

आत्मनिर्भर शहर की तरह काम

मिसाइल सिटी केवल मिसाइल रखने की जगह ही नहीं हैं बल्कि एक आत्मनिर्भर शहर की तरह काम करती है. इसमें असेंबली हॉल हैं, जहां मिसाइलों के पुर्जे जोड़कर उन्हें तैयार किया जाता है. फ्यूल डिपो हैं, जिसमें मिसाइल ईंधन को सुरक्षित रखने के लिए अलग सेक्शन हैं. इनमें बैरक भी हैं, जहां हजारों सैनिकों के रहने के लिए कमरे हैं. खाने की जगह के लिए मेस है और मेडिकल सेंटर भी. युद्ध की स्थिति में ये मिसाइल सिटी कमांड सेंटर का काम भी करने लगती हैं, यहां युद्ध के दौरान पूरी सैन्य कार्रवाई को जमीन के नीचे से ही कंट्रोल किया जाता है.

कितने नीचे

ये शहर जमीन से लगभग 500 मीटर तक की गहराई पर स्थित हैं. इतनी गहराई इन्हें बंकर-बस्टर बमों और परमाणु हमलों से भी सुरक्षा प्रदान करती है. ईरानइन सुरंगों को ईरान का लौह मुक्का कहता है.

क्या बम इन्हें नष्ट कर सकते हैं

साधारण बम अगर इनसे टकराएं तो केवल जमीन की सतह पर केवल गड्ढा बना सकते हैं. अमेरिका के पास मौजूद सबसे शक्तिशाली बंकर बम भी करीब 60 मीटर तक ही कंक्रीट को भेद सकता है. 500 मीटर की गहराई और ठोस पहाड़ की चट्टानों को पार करना इसके लिए भी करीब असंभव है.

क्या परमाणु बम कर सकता है काम तमाम

इसका जवाब हां भी है और शायद नहीं भी. अगर एक शक्तिशाली परमाणु बम ठीक उसी पहाड़ के ऊपर फटता है जिसके नीचे सुरंग है, तो भीषण गर्मी और दबाव से पहाड़ का ऊपरी हिस्सा ढह सकता है. इससे सुरंग के निकास द्वार (Exit Points) बंद हो सकते हैं, जिससे मिसाइलें अंदर ही फंस जाएंगी. परमाणु विस्फोट से पैदा होने वाली भूकंपीय लहरें इतनी तीव्र होती हैं कि वे सुरंग के अंदर के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और मिसाइल गाइडिंग सिस्टम को खराब कर सकती हैं.

अगर सुरंग बहुत गहरी और शॉक-एब्जॉर्बिंग तकनीक से बनी है, तो परमाणु धमाके के बावजूद मिसाइलें सुरक्षित रह सकती हैं. पहाड़ की सैकड़ों फीट मोटी चट्टानें रेडिएशन और गर्मी के खिलाफ दुनिया की सबसे मजबूत ढाल का काम करती हैं.

फिर अगर बमबारी करके एक दरवाजा बंद भी कर दें, तो इन शहरों में दर्जनों गुप्त रास्ते होते हैं जहां से मिसाइलें बाहर निकल सकती हैं.

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