नायर सर्विस सोसाइटी (एनएसएस) और एसएनडीपी योगम जैसे प्रभावशाली संगठनों के सरकार के साथ होने से भाजपा बैकफुट पर आ गई है. यह घटना आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले एलडीएफ की हिंदू वोटरों तक पहुंच बनाने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है. ग्लोबल अयप्पा संगमम ट्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड (टीडीबी) के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है.
भाजपा ने राजनीति नाटक बताया
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा ने इस आयोजन को राजनीतिक नाटक करार दिया है. प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि यह लोगों को बेवकूफ बनाने की रणनीति है, जो चुनावों से ठीक पहले हिंदू भावनाओं का शोषण करने का प्रयास है. उन्होंने विजयन और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर हिंदू धर्म का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों को माफी मांगनी चाहिए. चंद्रशेखर ने 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एलडीएफ सरकार द्वारा भक्तों पर दमन और गिरफ्तारियों का जिक्र किया, जब महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई थी. भाजपा ने इस कार्यक्रम में स्टालिन को आमंत्रित करने पर भी सवाल उठाए, क्योंकि स्टालिन के बेटे डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने हिंदू धर्म को वायरस कहा था.
विरोध करेंगे भाजपा कार्यकर्ता
सरकार ने एनएसएस की मांग मान ली है कि राजनीतिक नेता समिति से बाहर रहें, जिसके बाद संगठन ने अपना प्रतिनिधि भेजने का फैसला किया है. एसएनडीपी योगम एझावा समुदाय का प्रमुख संगठन है. उसने भी पूर्ण समर्थन दिया है. महासचिव वेल्लापल्ली नाटेसन ने कहा कि महिलाओं के प्रवेश से जुड़ा पिछला विवाद अब खत्म हो चुका है.
परंपराओं का उल्लंघन नहीं करने का आश्वासन
नाटेसन के बेटे थुषार वेल्लापल्ली भाजपा की सहयोगी भारत धर्म जन सेना के अध्यक्ष हैं, लेकिन थुषार ने कहा कि उनकी पार्टी का रुख तय नहीं हुआ है. यह मामला 2018 के सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद एलडीएफ के लिए राजनीतिक झटके को दर्शाता है, जब हिंदू समुदाय में असंतोष फैला था. 2019 लोकसभा चुनावों में एलडीएफ को भारी नुकसान हुआ, लेकिन 2021 विधानसभा में वापसी हुई. 2024 लोकसभा में फिर हार के बाद माकपा के राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने कहा कि संगमम साबरीमाला के विकास के लिए है और भक्तों को साम्प्रदायिकता के खिलाफ लड़ाई में भूमिका निभानी चाहिए. विपक्षी कांग्रेस ने भी इसे बहुसंख्यक तुष्टिकरण बताया, लेकिन अब हिंदू संगठनों का समर्थन एलडीएफ को मजबूती दे रहा है.
दरअसल, एलडीएफ का परंपरागत रूप से धर्मनिरपेक्ष रहा है. लेकिन, वह भी अब हिंदू वोटरों को लुभाने के लिए धार्मिक आयोजनों का सहारा ले रही है. 2018 के साबरीमाला विवाद ने भाजपा को हिंदू एकता का मुद्दा दिया था, लेकिन एनएसएस और एसएनडीपी का समर्थन भाजपा की रणनीति को कमजोर कर रहा है. एनएसएस नायर समुदाय का प्रतिनिधित्व करता है. नायर प्रभावी जाति समूह है. पिछड़ी जातियों के संगठन एसएनडीपी एलडीएफ के साथ है. भाजपा खुद को केरल में मजबूत करने कोशिश कर रही है. वह हिंदू समुदाय से जुड़े मुद्दे उठाती है. लेकिन हिंदू धार्मिक संगठनों के एलडीएफ के साथ जाने से उसके मुहिम को चोट पहुंची है. यह उसके लिए 440 वोल्ट से झटके जैसा है.





