भारत » आसमान में खूब फड़फड़ाएगी फ्लाइट, अब पैसेंजर बार-बार खाएंगे हिचकोले, डरावना हो सकता है हवाई सफर, जानें क्‍यों? | Due to global warming and jet stream winds passengers may now have to face serious turbulence repeatedly during air travel

आसमान में खूब फड़फड़ाएगी फ्लाइट, अब पैसेंजर बार-बार खाएंगे हिचकोले, डरावना हो सकता है हवाई सफर, जानें क्‍यों? | Due to global warming and jet stream winds passengers may now have to face serious turbulence repeatedly during air travel

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Global Warming & Air Turbulence: ग्‍लोबल वार्मिंग और जेट स्‍ट्रीम विंड्स की वजह से अब पैसेंजर्स को एयर ट्रैवल के दौरान बार बार सीरियस टर्बुलेंस का सामना करना पड़ सकता है. रीडिंग यूनिवर्सिटी के एक शोध में इसको ल…और पढ़ें

खूब फड़फड़ाएगी फ्लाइट, पैसेंजर बार-बार खाएंगे हिचकोले, डरावना होगा हवाई सफर!
Global Warming & Air Turbulence: क्या आपने कभी एयर ट्रैवल के दौरान महसूस किया है कि आसमान में आपकी फ्लाइट अचानक मछली की तरह फड़फड़ाने लगी हो और इसके बाद एयरक्राफ्ट हिचकोले खाने लगी हो. आसमान में हुई इस घटना को एविएशन की भाषा में एयर टर्बुलेंस कहा जाता है और निश्चित तौर पर किसी भी पैसेंजर के लिए यह एक अनुभव बेहद डरावना होता है. हाल में सामने आई एक रिपोर्ट की मानें तो आने वाले समय में हवाई सफर के दौरान यह डरावना अनुभव का सामना पैसेंजर को बार-बार करना पड़ सकता है.

जी हां, वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी के गर्म होने की वजह से आने वाले समय में एयरक्राफ्ट्स को उड़ान के दौरान अधिक अस्थिर हवाओं का सामना करना पड़ सकता है, जिससे टर्बुलेंस की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. यूनाइटेड किंगडम की रीडिंग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में पाया कि ऊंचाई पर बहने वाली तेज जेट स्ट्रीम्स हवाओं में जलवायु परिवर्तन के कारण और अधिक अस्थिरता पैदा हो रही है. जेट स्ट्रीम्स ऐसी तेज हवाएं हैं, जो पृथ्वी के चारों ओर ऊंचाई पर बहती हैं. आमतौर पर एयरक्राफ्ट भी इन्‍हीं ऊंचाइयों पर उड़ान भरते हैं.

लिहाजा, जेट स्‍ट्रीम्‍स हवाओं में होने वाले बदलाव हवाई यात्रा अधिक जोखिम भरा बना सकते हैं. शोधकर्ताओं ने पहले के एक अध्ययन में पाया था कि 1979 से 2020 के बीच सीनियर टर्बुलेंस की घटनाएं में करीब 55 फीसदी का इजाफा हुआ है. अब, जर्नल ऑफ द एटमॉस्फेरिक साइंसेज में प्रकाशित नए अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि 2015 से 2100 के बीच जेट स्ट्रीम्स में हवा का दबाव (विंड शीयर) 16 से 27 फीसदी तक बढ़ सकता है. साथ ही, वायुमंडल 10 से 20 फीसदी तक कम स्थिर हो सकता है. यह बदलाव उत्तरी और दक्षिणी दोनों गोलार्धों में देखा जा सकता है.

राडार से भी नहीं नजर आएंगे ये टर्बुलेंस
अध्ययन की मुख्य लेखिका और रीडिंग यूनिवर्सिटी की पीएचडी शोधकर्ता जोआना मेडिरोस के अनुसार, हवा का बढ़ता दबाव और वायुमंडल की कम होती स्थिरता मिलकर ‘क्लियर-एयर टर्बुलेंस’ (सीएटी) के लिए अनुकूल स्थिति बनाते हैं. यह एक अचानक आने वाली टर्बुलेंस की स्थिति है, जो बिना किसी चेतावनी के एयरक्राफ्ट को हिला सकती है. तूफान से होने वाले टर्बुलेंस को रडार पर देखा जा सकता है, लेकिन क्लियर-एयर टर्बुलेंस को नहीं. ऐसे में, पायलटों के लिए इसे टालना बेहद मुश्किल हो सकता है. शोधकर्ताओं ने 26 वैश्विक जलवायु मॉडलों का उपयोग करके यह अध्ययन किया है.

35000 फीट की ऊंचाई पर सबसे अधिक असर
उन्होंने अपने अध्‍ययन में पाया कि जलवायु परिवर्तन से बढ़ते तापमान का सबसे अधिक असर असर उस ऊंचाई पर पड़ रहा है, जिस ऊंचाई पर सामान्‍यत: एयरक्राफ्ट उड़ान भरते हैं. और, यह ऊंचाई करीब 35,000 फीट के आसपास होती है. रीडिंग यूनिवर्सिटी के वायुमंडलीय विज्ञान के प्रोफेसर और सह-लेखक पॉल विलियम्स ने कहा कि हाल के वर्षों में सीरियस टर्बुलेंस की घटनाओं ने कई पैसेंजर्स को गंभीर चोटें दी हैं और कुछ मामलों में दुखद मौतें भी हुई हैं. बीते अनुभवनों और मौजूदा पर‍िस्थितियों को देखते हुए अब पायलटों को सीटबेल्ट साइन लंबे समय तक चालू रखना पड़ सकता है.

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Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें

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