मनोरंजन » आरडी बर्मन की धुन-मजरूह के बोल, लता दी की आवाज ने बदली इश्क की परिभाषा, हर आशिक की जुबान पर रहता है ये गीत

आरडी बर्मन की धुन-मजरूह के बोल, लता दी की आवाज ने बदली इश्क की परिभाषा, हर आशिक की जुबान पर रहता है ये गीत

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बॉलीवुड संगीत के सुनहरे इतिहास में कुछ गीत ऐसे हैं, जो समय की दहलीज को पार करके आज भी उतने ही ताजा और मधुर लगते हैं, जितने अपने पहले दिन थे. इन अमर रचनाओं में से एक है 1973 में आई फिल्म ‘अनामिका’ का गीत ‘बाहों में चले आओ’. जो आज के आशिकों को भी लुभाता है. आर.डी. बर्मन यानी पंचम दी का जादुई संगीत और मजरूह सुल्तानपुरी के दिलकश बोलों ने इस गीत को अमर बना दिया. गीत की शुरुआत ही ‘बाहों में चले आओ, हो हमसे सनम क्या पर्दा’ से होती है, जो प्रेम की बेझिझक अभिव्यक्ति करती है. यह गीत फिल्म में जया भादुड़ी (जया बच्चन) और संजीव कुमार पर फिल्माया गया, जहां जया की मासूमियत और शरारत भरी आंखें लता की आवाज के साथ कमाल का तालमेल बनाती हैं. यह गीत 70 के दशक के बॉलीवुड संगीत का एक शानदार उदाहरण है, जो प्यार की मिठास और जज़्बात की गहराई को बखूबी बयां करता है.

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