खेल » ‘आजकल भीड़ कहां है…’, राजेश खन्ना के सुपरस्टार बनते ही जब बदला मंजर, शम्मी कपूर को मिलते थे ताने

‘आजकल भीड़ कहां है…’, राजेश खन्ना के सुपरस्टार बनते ही जब बदला मंजर, शम्मी कपूर को मिलते थे ताने

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नई दिल्ली. बॉलीवुड का इतिहास गवाह है कि हर दौर में एक नया चेहरा उभरकर सामने आया और दर्शकों की पसंद बदल गई. 50–60 के दशक में राज कपूर, दिलीप कुमार और देव आनंद तीनों बड़े सितारे माने जाते थे. फिर 60–70 के दशक में शम्मी कपूर का करिश्मा छाया रहा. इसके बाद राजेश खन्ना सुपरस्टार कहलाए, जिनके बंगले ‘आशीर्वाद’ के बाहर हजारों की भीड़ जमा होती थी. हाल ही में बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर आशीष विद्यार्थी ने एक इंटरव्यू में शम्मी कपूर से जुड़ी एक दिलचस्प घटना का जिक्र किया है. उन्होंने बताया कि जब राजेश खन्ना बॉलीवुड के नए सुपरस्टार बन गए, तो शम्मी कपूर को लोग ताने मारने लगे थे.

सिद्धार्थ कन्नन से बातचीत के दौरान दिग्गज एक्टर आशीष विद्यार्थी ने शम्मी कपूर के उन शब्दों को याद किया जो उनके लिए जीवन की सीख बन गए. उन्होंने याद बताया कि कैसे राजेश खन्ना के हीरो बनते ही लोग उन्हें (शम्मी कपूर) को खुलआम ताने मारा करते थे.

राजेश खन्ना बने सुपरस्टार तो शम्मी कपूर को मिलने लगे ताने

आशीष विद्यार्थी ने बताया, ‘शम्मी जी ने मुझे कई साल पहले एक बात कही थी. मैं शारजाह में ‘दास्तान’ नाम के एक सीरियल की शूटिंग कर रहा था और शम्मी कपूर वहां ‘चट्टान’ की शूटिंग के लिए एक प्रोड्यूसर के साथ आए थे. एक दिन अचानक उन्होंने मुझे सलाह दी और कहा, ‘बेटा, याद रखना, इस इंडस्ट्री के लोग तुम्हारी हवा निकाल देंगे. जब मेरी स्टारडम कम होने लगी, तो लोग मुझसे कहने लगे, ‘शम्मी जी, क्या हुआ, आजकल भीड़ कहां है?’ मैंने उन्हें जवाब दिया, ‘बेटा, आजकल वो आशीर्वाद (राजेश खन्ना का बंगला) के बाहर है.’

लोग तुम्हें छोड़ देंगे, जो तुम्हारी तारीफ…

आशीष ने आगे कहा कि शम्मी कपूर के ये शब्द उनके मन में हमेशा के लिए बस गए. उन्होंने समझाया, ‘उनका मतलब था कि लोग तुम्हें छोड़ देंगे. वही लोग जो तुम्हारी तारीफ करते थे, एक दिन दूर चले जाएंगे और तुम अकेले रह जाओगे. सफलता तुम्हारी किस्मत से मिली है, इसलिए उस पल का जश्न मनाओ, लेकिन उसे हमेशा का मत समझो.’

डांस स्टाइल, चार्म और वर्सेटाइल एक्टिंग से बने ‘रेबेल स्टार’

शम्मी कपूर 1960 के दशक के सुपरस्टार थे, जिन्हें उनके डांस स्टाइल, चार्म और वर्सेटाइल एक्टिंग के लिए जाना जाता है. उन्होंने कई हिट फिल्में की हैं, जिसमें  ‘प्रोफेसर’ (1962), ‘कश्मीर की कली’ (1964), ‘तीसरी मंजिल’ (1966), ‘ब्रह्मचारी’ (1968) और ‘एन इवनिंग इन पेरिस’ (1967) जैसी कई फिल्में उन्होंने की. उन्हें ‘रेबेल स्टार’ का नाम दिया गया. 2011 में भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. 1970 के दशक में राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन के उभरने के बाद शम्मी ने लीड रोल्स से दूरी बना ली थी.

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