Last Updated:
Recession in American : अमेरिका में मंदी का खतरा बढ़ता जा रहा है. हालिया सर्वे से पता चला है कि उपभोक्ताओं का भरोसा अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर कमजोर हो रहा, जबकि बेरोजगार बढ़ने के साथ देश पर कर्जा भी लगातार बढ़…और पढ़ें
अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर उपभोक्ताओं का सेंटिमेंट कमजोर हो रहा है. आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका की मौजूदा सरकार अपनी सालाना जीडीपी का करीब 44 फीसदी खर्चा कर रही है, जो दूसरे विश्व युद्ध और साल 2008 की महामंदी से भी ज्यादा है. कोनाकाल में तो यह खर्चा जीडीपी का 54 फीसदी पहुंच गया था, जबकि पिछले 2 साल में ही अमेरिका पर कर्ज बढ़कर 37.2 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया है. ट्रंप के आने के बाद इसमें और बढ़ोतरी हो रही है, जो 48 दिनों में ही 1 ट्रिलियन डॉलर बढ़ गया है. अगस्त महीने के शुरुआती 3 सप्ताह में ही यह आंकड़ा 200 अरब डॉलर से ज्यादा बढ़ चुका है.
अमेरिकी सरकार का खर्चा पिछले महीने जुलाई में 9.7 फीसदी बढ़कर 630 अरब डॉलर पहुंच गया है, जो जनवरी के बाद से सबसे अधिक है. दूसरी ओर, जुलाई में कमाई की बात करें तो सरकार का राजस्व 2.5 फीसदी ही बढ़ा और सिर्फ 338 अरब डॉलर रहा, जिसमें 30 अरब डॉलर टैरिफ से मिले हैं. ब्याज दरें ज्यादा होने की वजह से अमेरिकी सरकार को कर्ज के ब्याज का भुगतान ही काफी ज्यादा करना पड़ता है. अगर इसकी ब्याज दर 1 फीसदी भी कम हो जाए तो सरकार सालाना 291 अरब डॉलर की बचत कर सकती है.
सर्वे में कमजोर हुआ उपभोक्ताओं का नजरिया
अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर वहां के उपभोक्ताओं का नजरिया अगस्त में मामूली रूप से कमजोर हुआ है. कमजोर होते रोजगार बाजार को लेकर चिंता लगातार आठवें महीने बढ़ी है, जबकि कॉन्फ्रेंस बोर्ड ने बताया कि उसका उपभोक्ता विश्वास सूचकांक अगस्त में 1.3 अंक गिरकर 97.4 पर आ गया, जो जुलाई के 98.7 अंक से कम है. अमेरिकियों के बीच अपनी आय, कारोबारी हालात और रोजगार बाजार के लिए अल्पकालिक अपेक्षाओं का एक मापक 1.2 अंक गिरकर 74.8 पर आ गया. यह एक ऐसा संकेतक है, जो आने वाली मंदी की ओर इशारा कर सकता है.
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि… और पढ़ें
New Delhi,Delhi
August 27, 2025, 12:36 IST





