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अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाया, सरकार आज करेगी फैसला

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अमेरिका ने भारतीय प्रोडक्ट्स पर टैरिफ 50% कर दिया, जिससे टेक्सटाइल, लेदर, इंजीनियरिंग गुड्स और SMEs को बड़ा नुकसान संभव है. भारत सरकार आज हाई-लेवल मीटिंग करेगी.

मोदी सरकार ने आज बुलाई हाई-लेवल मीटिंग, एक्सपोर्टर्स को मिल सकती है सौगातप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी.
अमेर‍िका ने भारतीय प्रोडक्‍ट पर टैर‍िफ दोगुना कर द‍िया है, जो बुधवार से लागू होने जा रहा है. इसके बाद बाजार में हलचल होनी तय है. इस फैसले ने भारतीय एक्‍सपोर्टर्स की‍ चिंता बढ़ा दी है क्‍योंक‍ि मुनाफे की मार्जिन पर सीधा असर पड़ा. भारत सरकार को भी इसका अंदाजा है. इसल‍िए सरकार ने 26 अगस्‍त यानी आज हाई-लेवल मीटिंग बुलाई है. सूत्रों के मुताबिक, इस मीटिंग में एक्‍सपोर्टस को बड़ी सौगात मिल सकती है.

सूत्रों के मुताबिक, मीटिंग की अध्यक्षता प्रधानमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी करेंगे. इसमें वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, निर्यात संवर्धन परिषद (EPCs) और एक्सपोर्टर्स के प्रतिनिधि शामिल होंगे. भारतीय निर्यातकों का कहना है कि पहले से ही 25% अमेरिकी टैरिफ ने उनकी लागत बढ़ा दी थी. अब इसे दोगुना करके 50% कर देने से उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता पर गंभीर असर पड़ेगा. खासकर टेक्सटाइल, लेदर, इंजीनियरिंग गुड्स और स्पेशलिटी केमिकल्स जैसे सेक्टर को सबसे ज्यादा नुकसान होने की आशंका है. कई कंपनियों का मानना है कि अमेरिकी बाजार में टिकना अब मुश्किल होगा. पहले से ही पतली मार्जिन में काम कर रहे छोटे और मध्यम उद्यम (SMEs) को यह झटका गहरा नुकसान पहुंचा सकता है.

सरकार के सामने विकल्प
वाणिज्य मंत्रालय निर्यातकों से लगातार संवाद कर रहा है. सरकार कई विकल्‍पों पर विचार कर रही है. सरकार पैकेज की बजाय चुनिंदा सेक्टरों को सपोर्ट दे सकती है. निर्यातकों ने इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) जैसी सुविधा मांगी है, जिसमें बिना गारंटी के वर्किंग कैपिटल और सरकारी जोखिम कवर उपलब्ध कराया जाए. माइक्रो और छोटे उद्यमों के लिए क्लस्टर स्तर पर वर्किंग कैपिटल फंड उपलब्ध कराने का सुझाव भी सक्रिय विचाराधीन है. सरकार का फोकस SMEs पर है. अधिकारियों के अनुसार, सरकार की रणनीति का मुख्य उद्देश्य निर्यात-उन्मुख इकाइयों और SMEs को बचाना है. ये यूनिट्स बाहरी झटकों के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील होती हैं और लाखों लोगों को रोजगार भी देती हैं.

बैठक से क्‍या उम्मीदें
26 अगस्त की बैठक में भारत की औपचारिक प्रतिक्रिया तय होने की संभावना है. सूत्रों का कहना है कि यह सिर्फ तत्काल राहत का सवाल नहीं है, बल्कि भारत के निर्यात सेक्टर की दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा बनाए रखने की चुनौती भी है. टैरिफ झटके से सप्लाई चेन बाधित हो सकती है, निर्यात ऑर्डर घट सकते हैं और विदेशी खरीदार अन्य देशों की ओर रुख कर सकते हैं. ऐसे में सरकार से ठोस और तुरंत असर करने वाले कदम उठाने की मांग तेज हो गई है.

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Gyanendra Mishra

Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें

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