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अबू धाबी के बीएपीएस हिंदू मंदिर पहुंचे के. अन्नामलाई, वास्तुकला और आध्यात्मिक माहौल से प्रभावित हुए

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के. अन्नामलाई ने 15 अगस्त 2025 को अबू धाबी के बीएपीएस हिंदू मंदिर का दौरा किया. उन्होंने मंदिर की वास्तुकला, ‘टॉलरेंस ट्रीज़’ और ‘डोम ऑफ हार्मनी’ की प्रशंसा की.

अबू धाबी के बीएपीएस हिंदू मंदिर पहुंचे के. अन्नामलाईके. अन्नामलाई ने बीएपीएस हिन्‍दू मंदिर अबू धाबी का भ्रमण किया.

नई दिल्‍ली. अबू धाबी के बीएपीएस हिंदू मंदिर का दौरा राजनीतिक नेता और समाजसेवी के. अन्नामलाई ने  किया. मंदिर पहुंचने पर स्वामी ब्रह्मविहारिदास ने ‘डोम ऑफ हार्मनी’ के नीचे उनका माल्यार्पण कर स्वागत किया. अन्नामलाई ने मंदिर के प्रांगण में 6,500 साल पुराने जीवाश्म हैं और विविधता में एकता का संदेश देने वाले ‘टॉलरेंस ट्रीज़’ देखे. उन्होंने पुरस्कार विजेता ऑडियो-विज़ुअल शो ‘द फेयरी टेल’ का भी आनंद लिया, जो विभिन्न धर्मों के बीच सद्भाव का संदेश देता है. मंदिर की अनूठी वास्तुकला और आध्यात्मिक माहौल ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया.

मंदिर में अन्नामलाई ने परम पूज्य प्रभु स्वामी महाराज की आध्यात्मिक विरासत को याद किया, जिनके विजन से यह मंदिर बना है. उन्होंने ‘पिलर ऑफ पिलर्स’ की नक्काशी की तारीफ की और सातों वेदियों पर प्रार्थना की. उन्होंने कहा, “यह मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि सहिष्णुता, अहिंसा और एकता का जीवंत प्रतीक है. हर किसी को इसे देखना चाहिए”. उन्होंने भावुक होकर कहा, “यहां आकर मैंने भारत के हर कोने का अहसास किया. जब कार्य पवित्रता और आशीर्वाद के साथ होता है, तो चमत्कार होते हैं”. उन्होंने स्वामी ब्रह्मविहारिदास और स्वयंसेवकों के समर्पण की प्रशंसा की, जिनके प्रयासों से यह मंदिर निर्माण संभव हुआ.

मंदिर की नक्काशी को देखकर उन्होंने कहा, “यह हाल के वर्षों की सबसे सुंदर नक्काशी है. यह साबित करता है कि भारत की प्राचीन कला आज भी जीवित है”. वैश्विक सहयोग पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “यह मंदिर 21वीं सदी का सबसे बड़ा सहयोग है.  बीएपीएस संत की पहल और दूसरे धर्म के शासकों की उदारता ने इस चमत्कार को जन्म दिया. यह इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा.अन्नामलाई ने सभी से इस मंदिर को देखने और इसके संदेश को आत्मसात करने की अपील की. उनकी यह यात्रा भारत और यूएई के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को और मजबूत करती है.

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