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Alaska:अल्सेक ग्लेशियर पिघलने से झील का आकार दोगुना हो गया और ‘प्रो नॉब’ नाम की पहाड़ी अब नया द्वीप बन गई है. नासा सैटेलाइट ने इस बदलाव को दर्ज किया, जो जलवायु परिवर्तन का बड़ा संकेत है.
नासा सैटेलाइट ने कैद की तस्वीरें.अलास्का के दक्षिण-पूर्वी हिस्से से एक अनोखी तस्वीर सामने आई है. यहां एक ग्लेशियर के पिघलने से झील के बीचोंबीच नया द्वीप उभर आया है. ये सब नासा के सैटेलाइट्स ने अपनी आंखों से देखा और तस्वीरों में दर्ज किया.
ये नया द्वीप असल में ‘प्रो नॉब’ नाम की एक छोटी पहाड़ी है. पहले ये चारों तरफ से अल्सेक ग्लेशियर की बर्फ से घिरी रहती थी. बर्फ के पिघलने और पीछे हटने की वजह से झील का आकार बढ़ता गया. धीरे-धीरे पानी ने पूरी जगह को घेर लिया और प्रो नॉब बाकी ज़मीन से कटकर अलग हो गया.
नासा की पुरानी और नई तस्वीरों में फर्क
नासा के लैंडसैट-5 सैटेलाइट ने जुलाई 1984 में प्रो नॉब की तस्वीरें ली थीं. तब पहाड़ी का एक किनारा झील को छूता था, लेकिन ज्यादातर हिस्सा मोटी बर्फ की पकड़ में था. अगले चार दशकों में तस्वीरें बताती हैं कि कैसे अल्सेक ग्लेशियर लगातार पीछे हटता गया. इसके साथ ही दक्षिण की तरफ फैला ग्रैंड प्लेटो ग्लेशियर भी पिघलता रहा. दोनों ग्लेशियरों के पीछे हटने से झील का दायरा बढ़ता गया और प्रो नॉब अब अकेला द्वीप बन गया.
20वीं सदी में कैसी थी तस्वीर?
ग्लेशियर वैज्ञानिक बताते हैं कि 20वीं सदी की शुरुआत में अल्सेक ग्लेशियर कहीं ज्यादा विशाल था. तब ये प्रो नॉब से भी आगे जाकर लगभग 3 मील पश्चिम में स्थित ‘गेटवे नॉब’ तक फैला हुआ था. लेकिन 1984 से अब तक इसने तीन मील से ज्यादा का फासला पीछे खिसक लिया है.
ग्लेशियर के पीछे हटने का सीधा असर अल्सेक झील पर पड़ा. 1984 में ये झील करीब 17 वर्ग मील तक फैली थी. लेकिन आज इसका दायरा लगभग दोगुना होकर 30 वर्ग मील तक पहुंच गया है. वैज्ञानिक ऐसी झीलों को ‘प्रोग्लेशियल लेक’ कहते हैं, यानी वो झील जो ग्लेशियर के पिघलने से बनती और बढ़ती है.
New Delhi,Delhi
September 17, 2025, 19:22 IST





