विदेश » क्या है लाल सागर में बिछा तारों का जाल, जिससे चलता है पूरी दुनिया का इंटरनेट, थोड़ी सी गड़बड़ी से मच जाता है त्राहिमाम

क्या है लाल सागर में बिछा तारों का जाल, जिससे चलता है पूरी दुनिया का इंटरनेट, थोड़ी सी गड़बड़ी से मच जाता है त्राहिमाम

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Slow Internet Speed: मोबाइल फोन हो या लैपटॉप पूरी दुनिया को इंटरनेट कहां से मिलता है, जानते हैं आप? सिर्फ रिचार्ज करने से ही इंटरनेट नहीं चलता बल्कि इसके लिए समंदर के अंदर फाइबर ऑप्टिक्स का जाल बिछा हुआ है. इसम…और पढ़ें

क्या है लाल सागर में बिछा तारों का जाल, जिससे चलता है पूरी दुनिया का इंटरनेटलाल सागर में बिछे तारों के जाल का क्या काम है?
Why Internet Services Are Down: पूरी दुनिया को तेज और स्मूथ इंटरनेट और फोन सर्विस के लिए समंदर में तारों का नेटवर्क बिछाया गया है. ये तार फाइबर ऑप्टिक केबल होते हैं, जो इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करते हैं. इन केबल्स को समंदर के अंदर कुछ भी नुकसान होने से पूरी दुनिया के इंटरनेट प्रभावित होती है. मगर हम इसकी बात क्यों कर रहे है? आखिर क्या वजहगई कि इसके बारे में बात करनी पड़ रही है. दरअसल, लाल सागर में ऐसे ही केबल्स के जाल बिछे हुए है. शनिवार 6 सितंबर को भारतीय समयानुसार करीब 11:30 बजे (UTC 05:45 AM) बजे फाइबर केबल के कटने की खबर आई, जिससे भारत-पाकिस्तान समेत दुनियाभर के इंटरनेट और फोन सेवाओं पर असर पड़ा. पाकिस्तान इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ. पहले जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर ये फाइबर ऑप्टिक्स क्या बला है? ये दुनिया के इंटरनेट को कैसे जोड़ता है? ये समंदर में क्यों है?
शनिवार को लाल सागर में बिछे फाइबर ऑप्टिक केबल्स के कटने से पूरी दुनिया के इंटरनेट कनेक्टिविटी को झटका लगा है. इसका सबसे ज्यादा असर पाकिस्तान और कई दक्षिण एशियाई देशों पर हुआ है. इंटरनेट और फोन सेवाएं ठप हो गईं. माइक्रोसॉफ्ट, मिडिल ईस्ट इंस्टिट्यूट वेबसाइट के अलावा अन्य स्रोतों के अनुसार SMW4 और IMEWE जैसे प्रमुख केबल्स सबसे ज्यादा प्रभावित हुए है. हॉन्गकॉन्ग की टेलीकॉम कंपनी HGC ग्लोबल कम्युनिकेशंस ने बताया कि इस घटना से एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच 25% डेटा ट्रैफिक प्रभावित हुआ. कई देशों ने इंटरनेट स्पीड कम होने के प्रभाव को महसूस किया. चलिए जानते हैं कि आखिर क्या है फाइबर ऑप्टिक या फिर अंडरसी केबल्स (Under Sea Cables).

फाइबर ऑप्टिक्स क्या है?

फाइबर ऑप्टिक्स एक ऐसी तकनीक है, जिसमें डेटा को लाइट सिग्नल्स (लेजर या LED) के रूप में कांच या प्लास्टिक की पतली तंतुओं (फाइबर्स) के माध्यम से एक्सपैंड किया जाता है. ये फाइबर्स इंसानों के बाल से भी पतले होते हैं. ये डेटा को बिजली की तुलना में तेजी से और लंबी दूरी तक ले जाने में सक्षम होते हैं. प्रत्येक फाइबर ऑप्टिक केबल में कई फाइबर्स या तंतु रहते हैं, जो स्टील की परत और प्लास्टिक कोटेड रहते हैं. इ केबल्स को समुद्र तल पर बिछाई जाती हैं और इंटरनेट, टेलीफोन, और टेलीविजन सिग्नल्स को एक महाद्वीप से दूसरे तक पहुंचाया जाता है. एक फाइबर ऑप्टिक केबल प्रति सेकंड कई टेराबाइट (TB) या फिर 1024 गीगाबाइट (GB) ट्रांस्फर कर सकती है, जो लाखों लोगों के वीडियो स्ट्रीमिंग और मैसेज भेजने में मदद कर सकती हैं.

फाइबर ऑप्टिक्स कैसे काम करता है?

फाइबर ऑप्टिक्स तकनीक पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) के सिद्धांत पर काम करती है. जो डेटा के डिजिटल सिग्नल के रूप को प्रकाश की किरणों में बदलाते हुए, फाइबर के अंदर ही बार-बार परावर्तित होकर गंतव्य तक पहुंचती है. रास्ते में सिग्नल को और भी मजबूत करने के लिए रिपीटर्स का उपयोग किया जाता है. जो लंबी दूरी पर डेटा लॉस को रोकते हैं. ये केबल्स समुद्र तल पर बिछाई जाती हैं. हालांकि, इनते प्राकृतिक आपदाओं, जहाजों के लंगर या मछली पकड़ने के उपकरणों या फिर कि जानबूझ कर (जैसा कि कई मौके पर लाल सागर में हूति विद्रोहियों ने इसे नुकसान पहुंचाने की धमकी दी थी.) क्षतिग्रस्त हो सकती हैं. लाल सागर से कई केबल्स एक साथ गुजरती हैं. इसे इंटरनेट का चोकपॉइंट माना जाता है.

इंटरनेट कनेक्टिविटी पर प्रभाव

अंडरसी फाइबर ऑप्टिक केबल्स वैश्विक इंटरनेट की रीढ़ हैं. 95% से अधिक अंतरमहाद्वीपीय डेटा ट्रैफिक को संभालती हैं. लाल सागर में चार केबल्स (SEACOM, TGN, AAE-1, और EIG) के कटने से भारत, पाकिस्तान, और पूर्वी अफ्रीका में इंटरनेट स्पीड में 60% तक की कमी हो जाती हैं. इसकी वजह से आज की प्रचलित डिजिटल लेनदेन, ऑनलाइन क्लास, शेयर मार्केट या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसे रियल-टाइम जरूरतें या सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं. बता दें कि शनिवार को फाइबर के कटने की वजह से पाकिस्तान ऑनलाइन बिजनेस के साथ-साथ और कम्यूनिकेशन सर्विस ठप हो गया था. इसके अलावा पूरी दुनिया में स्टॉक एक्सचेंज और बैंकिंग सर्विस प्रभावित हुईं.

क्यों हुई यह घटना?

लाल सागर में फाइबर केबल्स के कटने के असली कारण अभी तक पता नहीं चला है. ऐसा अनुमान है कि पिछले साल हूती विद्रोहियों द्वारा हमला किए गए ब्रिटिश जहाज रुबिमार के डूबने से इसका लंगर समुद्र तल पर पहुंचने की वजह से केबल्स को नुकसान पहुंचा हो. हालांकि, हूती विद्रोहियों ने इस आरोप से इनकार किया है. वहीं, SEACOM ने बताया कि यमनी जलक्षेत्र में अस्थिरता के कारण मरम्मत में कम से कम एक महीने लग सकता है.

क्या है समाधान

हालांकि, इंटरनेट सर्विस पूरी तरह बंद नहीं हुआ है क्योंकि टेलीकॉम कंपनियां अन्य विकल्पों के जरिए सर्विस को जारी रखी हुई हैं. जमीन से चीन और प्रशांत महासागर के जरिए डेटा री-रूट कर रही हैं. लेकिन एक्सपर्टस का मानना है कि इस रूट पर भी भार बढ़ सकता है, तो फिर क्या उपाए है? कई एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि केबल्स की सुरक्षा के लिए केबल प्रोटेक्शन ज़ोन बनाए जाएं. वैकल्पिक मुख्यभूमि नेटवर्क विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है.

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Deep Raj Deepak

दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें

दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व… और पढ़ें

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