भारत » तेजस इंजन, राफेल, Su-57… अब हीलाहवाली नहीं, 12 महीने में नहीं किया ये काम तो हजारों करोड़ का फटका लगना तय – tejas fighter jet engine rafale su57 no purchase delay tolerated modi government change emergency defence contract

तेजस इंजन, राफेल, Su-57… अब हीलाहवाली नहीं, 12 महीने में नहीं किया ये काम तो हजारों करोड़ का फटका लगना तय – tejas fighter jet engine rafale su57 no purchase delay tolerated modi government change emergency defence contract

Facebook
Twitter
WhatsApp

Last Updated:

Emergency Defence Contract: ऑपरेशन सिंदूर के बाद मोदी सरकार देश की सुरक्षा को लेकर काफी चौकस हो गई है. ताबड़तोड़ ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं, जिससे डिफेंस सेक्‍टर की कमियों को दूर किया जा सके. सरकार ने अब एक और बड…और पढ़ें

तेजस इंजन, राफेल, Su-57... अब हीलाहवाली की तो हजारों करोड़ का फटका लगना तयमोदी सरकार ने इमर्जेंसी रूट से होने वाले डिफेंस परचेज से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है.
Emergency Defence Contract: भारत अपने डिफेंस सिस्‍टम को अपग्रेड करने के लिए लगातार कदम उठा रहा है. फाइटर जेट के इंजन की खरीद से लेकर पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के न‍िर्माण से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए हैं. एयर डिफेंस सिस्‍टम को लेकर भी बड़ा निर्णय लिया गया है. देश को किसी भी हवाई हमले से पूरी तरह से सुरक्ष‍ित करने के लिए S-500 और गोल्‍डन डोम की तर्ज पर वायु सुरक्षा प्रणाली डेवलप करने का भी फैसला किया गया है. अब मोदी सरकार ने इमर्जेंसी रूट से डिफेंस परचेज से जुड़े प्रावधानों में बड़ा बदलाव किया है. इसके तहत रक्षा खरीद सौदों को न केवल रफ्तार मिलेगी, बल्कि सालों की देरी से भी बचा जा सकेगा. उम्‍मीद है कि इससे तेजस फाइटर जेट के लिए इंजन की आपूर्ति में भी तेजी आएगी. इसके अलावा अन्‍य आर्म्‍स और एम्‍यूनिशन की खरीद भी जल्‍द से जल्‍द संभव हो सकेगी. डिफेंस परचेज में यह बड़ा बदलाव है.

दरअसल, मोदी सरकार ने इमर्जेंसी रूट से होने वाली रक्षा खरीद से जुड़े प्रावधानों में बड़ा बदलाव किया है. यह आर्म्‍स और अन्‍य डिफेंस परचेज को इमर्जेंसी विंडो से खरीदने वाले प्रोवीजन से जुडा है. बदले प्रवधान के तहत यदि कोई डिफेंस डली इस रूट से किया जाता है तो उसे 12 महीनों में अंजाम तक पहुंचाना आवश्‍यक है, नहीं तो कॉन्‍ट्रैक्‍ट कैंसिल हो जाएगा. रक्षा खरीद प्रणाली को और अधिक तेज और पारदर्शी बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. रक्षा सचिव ने एक कार्यक्रम के दौरान जानकारी दी कि रक्षा खरीद सायकल (procurement cycle) की समयसीमा में पहले ही 69 हफ्तों की कटौती की जा चुकी है. इससे रक्षा सौदों को समय पर पूरा करने की दिशा में अहम सुधार देखने को मिलेगा. रक्षा खरीद की लंबी प्रक्रिया में कई चरण शामिल होते हैं. विक्रेताओं से सूचना की मांग (Request for Information), सेवाओं की गुणवत्‍ता संबंधी आवश्‍यकताएं (SQRs) तय करना, डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल द्वारा आवश्‍यकता की स्‍वीकृति (Acceptance of Necessity) देना, निविदा (RFP) जारी करना, तकनीकी और मैदानी परीक्षण, और अंत में कॉन्‍ट्रैक्‍ट पर बातचीत. इन सभी चरणों में लगने वाले समय को कम करने की दिशा में यह सुधार महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है.

स्‍पेशल पैनल

सरकार ने साथ ही यह भी ऐलान किया है कि डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर (DAP)-2020 को और सरल बनाने की प्रक्रिया जारी है. इसके लिए महानिदेशक (अधिग्रहण) की अध्यक्षता में एक पैनल का गठन किया गया है. यह पैनल रक्षा खरीद से जुड़े विभिन्‍न पहलुओं की समीक्षा कर रहा है, जिनमें कैटेगराइजेशन, Ease of Doing Business, ट्रायल प्रक्रिया का संचालन, कॉन्‍ट्रैक्‍ट के बाद का मैनेजमेंट, त्‍वरित प्रक्रियाएं (Fast Track Procedures) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों का समावेश शामिल है. विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा खरीद प्रक्रिया में यह सरलीकरण न केवल समय की बचत करेगा, बल्कि देश की रक्षा तैयारियों को भी मजबूत बनाएगा. सरकार का फोकस अब पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने पर है, ताकि आधुनिक तकनीकों और हथियार प्रणालियों की खरीद समयबद्ध ढंग से हो सके.

गलवान से ऑपरेशन सिंदूर तक

इस वर्ष मई में ऑपरेशन सिंदूर से पहले रक्षा मंत्रालय ने जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के तुरंत बाद पहली बार भारतीय सेना को 300 करोड़ रुपये तक की पूंजीगत खरीद के लिए आपातकालीन शक्तियां प्रदान की थीं. फरवरी 2019 में बालाकोट हवाई हमले और 2016 में उरी सर्जिकल स्ट्राइक के बाद तीनों सेनाओं को राजस्व खरीद के लिए भी आपातकालीन शक्तियां प्रदान की गई थीं. पूंजीगत खरीद शक्तियां पूंजीगत संपत्तियों, हथियारों/शस्त्र प्रणालियों और अन्य ऑपरेशनल रूप से महत्वपूर्ण उपकरणों के अधिग्रहण से संबंधित हैं, जिससे रक्षा बलों की ऑपरेशनल कैपेबिलिटी में स्थायी वृद्धि होती है. राजस्व खरीद शक्तियां इन संपत्तियों को बनाए रखने या बनाए रखने के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण पुर्जों और गोला-बारूद की खरीद से संबंधित हैं.

authorimg

Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु… और पढ़ें

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
homenation

तेजस इंजन, राफेल, Su-57… अब हीलाहवाली की तो हजारों करोड़ का फटका लगना तय

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share Market

Share Market

Gold & Silver Price

Should NEET exam be conducted again?

टॉप स्टोरी