विदेश » 5 करोड़ सूरज जितना भारी, गैलेक्सी बनने से पहले ही पैदा हो गया था ये ‘ब्लैक होल’… टेलिस्कोप में कैद तस्वीर

5 करोड़ सूरज जितना भारी, गैलेक्सी बनने से पहले ही पैदा हो गया था ये ‘ब्लैक होल’… टेलिस्कोप में कैद तस्वीर

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Agency:एजेंसियां

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Black hole formation: जेम्स वेब टेलिस्कोप ने ब्रह्मांड के शुरुआती दौर में QSO1 नाम की रहस्यमयी लाल रोशनी पकड़ी. वैज्ञानिकों का दावा है यह 5 करोड़ सूर्यों जितना भारी ब्लैक होल हो सकता है.

5 करोड़ सूरज जितना भारी, गैलेक्सी बनने से पहले ही पैदा हो गया था ये ब्लैक होल!जेम्स वेब टेलिस्कोप ने ब्रह्मांड में एक रहस्यमयी लाल रोशनी खोजी है.

ब्रह्मांड की शुरुआत को समझने की कोशिश में वैज्ञानिकों को एक नई रोशनी मिली है. जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप (JWST) ने एक लाल बिंदु जैसी चमक पकड़ी है, जो बिग बैंग के करीब 600 मिलियन साल बाद की है. इस छोटी-सी लाल रौशनी को वैज्ञानिकों ने QSO1 नाम दिया है.

5 करोड़ सूर्यों जितना ताकतवर ब्लैक होल
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के एस्ट्रोफिजिसिस्ट इग्नास जुओज़बैलिस की टीम का कहना है कि
QSO1 असल में एक ब्लैक होल हो सकता है, जिसकी ताकत 5 करोड़ सूर्यों के बराबर है. अगर ये खोज सही साबित होती है तो ये ब्रह्मांड के शुरुआती ब्लैक होल बनने के सबूतों में से पहला होगा.

अब तक माना जाता रहा है कि ब्रह्मांड की शुरुआत में तारों, आकाशगंगाओं और ब्लैक होल्स का जन्म हुआ, लेकिन उनकी असली कहानी समझना मुश्किल रहा है. JWST खास तौर पर ऐसी दूर की और ‘रेडशिफ्टेड’ रोशनी देखने के लिए बनाया गया है. रेडशिफ्ट मतलब, रोशनी का फैलकर लाल रंग की ओर खिसक जाना, जो ब्रह्मांड के फैलाव की वजह से होता है.

ग्रेविटेशनल लेंस की मदद से हुई खोज 
वैज्ञानिकों ने सैकड़ों ऐसे लाल बिंदु (
Little Red Dots) देखे हैं. लेकिन ये क्या हैं, इस पर बहस जारी है. कुछ कहते हैं ये तारों के समूह हैं, तो कुछ इन्हें शुरुआती ब्लैक होल मानते हैं. मुश्किल ये है कि ब्लैक होल आमतौर पर एक्स-रे किरणों के साथ दिखते हैं, लेकिन इन लाल बिंदुओं के आसपास वो एक्स-रे रोशनी नहीं दिखती.

QSO1 को इसलिए चुना गया क्योंकि ये एक ‘ग्रेविटेशनल लेंस’ की वजह से और साफ दिखाई दे रहा था. यानी, बीच में मौजूद एक विशाल गैलेक्सी क्लस्टर की वजह से इसकी रोशनी और ज्यादा बढ़ गई. इस रोशनी का बारीकी से अध्ययन करने पर वैज्ञानिकों ने पाया कि QSO1 का द्रव्यमान तारों के समूह से मेल नहीं खाता. बल्कि इसकी घुमाव गति और हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम से निकला आंकड़ा बताता है कि यहां वाकई में एक विशाल ब्लैक होल है.

लेकिन खास बात ये है कि ब्लैक होल तो बहुत बड़ा है, पर उसके आसपास की गैलेक्सी बेहद छोटी. यानी ब्लैक होल अपने आप में ज्यादानंगानजररहा है. इससे ये संकेत मिलता है कि शायद शुरुआती ब्रह्मांड में पहले ब्लैक होल बने और फिर उनके आसपास गैलेक्सी ने आकार लिया.

वैज्ञानिकों का मानना है कि ये या तोडायरेक्ट कोलैप्स ब्लैक होलका नतीजा हो सकता है, जहां गैस का बादल सीधे ब्लैक होल में ढह गया, या फिर ये “प्राइमॉर्डियल ब्लैक होल” हो सकता है, जो बिग बैंग के तुरंत बाद बने थे. हालांकि, इन दोनों ही थ्योरीज़ की अभी और जांच की जरूरत है.

पेपर अभी पीयर-रिव्यू के लिए गया है, यानी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन इतना तय है कि ये छोटे-छोटे लाल बिंदु हमें ब्रह्मांड के जन्म के बारे में बड़ी और चौंकाने वाली जानकारी देने वाले हैं.

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