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रूस से चीन कैसे पहुंची पुतिन की खास लिमोजीन कार, जिसमें की मोदी के साथ सवारी

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चीन के तियानजिन शहर में एससीओ की मीटिंग हुई, जिसमें रूस के प्रेसीडेंट व्लादिमीर पुतिन भी आए हुए थे. उनकी शानदार और मजबूत किला माने जाने वाली कार कैसे रूस से वहां तक लाई गई. इसी कार में वह नरेंद्र मोदी के साथ करीब 45 मिनट तक बैठकर यात्रा करते रहे. उनकी ये कार ऐसी है कि किसी भी तरह के खतरे में उसका बालबांका भी नहीं हो सकता.

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के पास आधिकारिक तौर पर लिमोजिन औरस सेनेट कारों का काफिला है. इसी बेड़े की दो कारें मास्को से सीधे चीन के तियानजिन लाई गईं थीं. इन दो कारों को मास्को में उस इल्यूसिन2-76 विमान में चढ़ाया गया, जो जंबो कार्गो विमान कहलाता है.

पुतिन की कार पहले ही पहुंच चुकी थी

जब पुतिन अपने आधिकारिक विमान इल्यूसिनIl-96-300PU से तियानजिन पहुंचे तो उनकी कारें पहले ही पहुंचकर एयरस्ट्रिप के सामने उनकी आगवानी के लिए आ चुकी थीं. इस आधिकारिक विमान को अक्सर “फ्लाइंग क्रेमलिन” भी कहा जाता है, क्योंकि यह विमान सुरक्षा, संचार और लग्जरी सुविधाओं के मामले में राष्ट्रपति भवन जैसा ही है.

रूसी सीक्रेट सर्विस इस कार का ध्यान रखती है

रूसी प्रेसीडेंट की इस कार को मैनेज करने और चलाने का काम रूसी सरकार की फ़ेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस करती है. पुतिन जहां कहीं जाते हैं, वहां उनके पहुंचने से पहले ही ये कारें इल्यूसिन Il-76 जैसे बड़े विमान द्वारा भेजी जाती हैं.

जब एससीओ खत्म हुआ तो प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने इसी कार से तियानजिन के सम्मेलन स्थल से द्विपक्षीय वार्ता स्थल तक की यात्रा की. दोनों नेताओं ने कार में करीब 45 मिनट तक बातचीत की.

रूस में बनी है ये खास लिमोजीन कार

ये कार रूस में औरस मोर्टर्स द्वारा बनाई गई है. ये रूस की घरेलू तकनीक के साथ बनाई गई पहली स्टेट मोटरगाड़ी है. इस कार में 4.4-लीटर ट्विन-टर्बो V8 इंजन है, लगभग 600 हॉर्सपावर की शक्ति उत्पन्न करता है, सामान्य कारों का हार्सपॉवर इससे बहुत कम होता है.

भारी बख्तरबंद होते हुए भी यह कार केवल 6 सेकेंड में 100 किमी प्रति घंटा की स्पीड पकड़ सकती है. हालांकि इसकी टॉप स्पीड 250 की है. इस कार में ऑल-व्हील-ड्राइव सिस्टम है.

बहुत सुरक्षित है ये कार किसी किले जैसी

ये कार सुरक्षा के लिहाज से बहुत सुरक्षित है. ये बख्तरबंद कार है. इसमें बुलेटप्रूफ ग्लास, एंटी ग्रेनेड स्ट्रक्चर और प्रोटेक्टर फिल्म लगी होती है. इसमें फायर सप्रेशन सिस्टम, इमरजेंसी ऑक्सीजन आपूर्ति, रन-फ्लैट टायर्स और अंडरबॉडी बम रक्षा प्रणाली शामिल है.

कार में एडवांस कम्युनिकेशन सिस्टम लगा हुआ है, ये किसी भी तरह की इमर्जेंसी में चलता रहता है. इसमें बैठकर पुतिन पूरे देश को चला सकते हैं. दिशार्निदेश दे सकते हैं.

अंदर पूरा कंफर्ट भी है इसमें

अगर लग्जरी की बात करें तो इसके अंदर भरपूर कंफर्ट दिया गया है. जिसमें मिनी फ्रिज से लेकर फोल्डिंग टेबल्स, घूमने वाली सीटें और इंफार्मेशन स्क्रीन लगी होती है. सीटों की गद्दी प्रीमियम लेदर की होती है. ड्राइवर के पास भी कम्युनिकेशन के सारे सिस्टम होते हैं. ये ड्राइवर कोई सामान्य शख्स नहीं होता बल्कि रूसी सीक्रेट सर्विस का आला अधिकारी ही होता है.

क्या है इस कार की कीमत

वैसे इस कार का सामान्य वजन 2,700 किलो है तो बख्तरबंद मॉडल का वजन करीब 6,200 किलो. ये 6.62 मीटर लंबी होती है. इसकी कीमत करीब 2.5 करोड़ है. कहा जा सकता है कि यह कार दमदार सुरक्षा फीचर्स जैसे आर्मी-ग्रेड आर्मर, रन-फ्लैट टायर्स, ऑक्सीजन सप्लाई, इमरजेंसी एस्केप सिस्टम और फायर प्रोटेक्शन आदि से लैस है.

लिमोजीन कारों का बेड़ा है पुतिन के पास

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के पास आधिकारिक लिमोजीन कारों का एक बेड़ा है, जिसमें प्रमुख रूप से औरस सेनट मॉडल शामिल हैं. वैसे पुतिन के काफिले में आमतौर पर दो आर्मर्ड लिमोज़ीन कारें चलती हैं.एक कार में वह खुद सवार होते हैं और दूसरी भ्रम पैदा करने के लिए होती है. उनके काफिले में सुरक्षा के करीब तीन लेयर होते हैं, जिसमें सुरक्षाकर्मी, आर्मर्ड गाड़ियां, तकनीकी उपकरण और जमीनी-हवाई सिस्टम शामिल हैं. उनके एक काफिले में कम से कम सात कारें तो होती ही हैं.

कैसे होती है पुतिन की सुरक्षा

दो लिमोजीन कारें, दो सिडान और तीन हथियारबंद वाहन, जो सपोर्ट टीम और सुरक्षा के लिए होती हैं. सुरक्षा लेयर इस तरह होते हैं

बाहरी सुरक्षा – काफिले के चारों ओर सुरक्षाकर्मी एवं पुलिस, एक्स्ट्रा हथियारबंद MPV और बुलेट-प्रूफ वाहनों की घेराबंदी.
तकनीकी सुरक्षा – रूट को अंतिम समय में फाइनल किया जाता है, GPS जामिंग, स्नाइपर्स छतों पर, मोबाइल कमांड सेंटर और ड्रोन निगरानी रहती है.
आंतरिक सुरक्षा – राष्ट्रपति की विशेष लिमोजीन में उनके बॉडीगार्ड वाहनों में अतिरिक्त ब्लड सप्लाई और मेडिकल सपोर्ट शामिल रहता है.

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