तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कलेश्वरम लिफ्ट इरिगेशन प्रोजेक्ट (KLIP) में हुई कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की जांच सीबीआई को सौंपने का ऐलान किया है. रविवार देर रात विधानसभा में करीब दस घंटे चली लंबी बहस के बाद सरकार ने यह निर्णय लिया. इस दौरान सरकार ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष की अध्यक्षता वाले आयोग की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी. यह पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव का ड्रीम प्रोजेक्ट था, जिसके सहारे वह तेलंगाना की कुर्सी पर वापसी का सपना देखते थे.
घोष आयोग को परियोजना के निर्माण में भ्रष्टाचार, धन के दुरुपयोग और लापरवाहियों की जांच के लिए गठित किया गया था. आयोग ने अपनी रिपोर्ट 31 जुलाई को सौंपी थी, जिसे राज्य मंत्रिमंडल ने 4 अगस्त को मंजूरी देकर विधानसभा में पेश करने का निर्णय लिया.
KCR पर गंभीर आरोप
रिपोर्ट में मेदीगड्डा, अन्नाराम और सुंडिल्ला बैराजों के निर्माण में लापरवाही, तथ्यों को दबाना और वित्तीय गड़बड़ियां उजागर हुईं. इसमें यह भी पाया गया कि निर्माण के दौरान संरचनात्मक खामियां रह गईं और इसके लिए पूर्ववर्ती बीआरएस सरकार तथा तत्कालीन मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव को जिम्मेदार ठहराया गया.
राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (NDSA) की रिपोर्ट ने भी मेदीगड्डा बैराज में आई खराबी का कारण डिज़ाइन, गुणवत्ता नियंत्रण और रखरखाव की कमी बताया.
विधानसभा में बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि इस परियोजना में कई केंद्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियां, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां जैसे WAPCOS और वित्तीय संस्थान जैसे पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) शामिल थे. ऐसे में केवल सीबीआई ही व्यापक जांच कर सकती है. उन्होंने आरोप लगाया कि बीआरएस शासन ने इस परियोजना के नाम पर जनता का पैसा लूटा.
तेलंगाना पर पड़ गया भारी कर्ज
मुख्यमंत्री ने बताया कि कलेश्वरम कॉरपोरेशन ने परियोजना के लिए कुल 85,449 करोड़ रुपये का कर्ज लिया, जिसमें 27,738 करोड़ रुपये PFC से 11.5 प्रतिशत ब्याज पर और 30,536 करोड़ रुपये अन्य ऋणदाताओं से 12 प्रतिशत ब्याज पर उधार लिए गए. अब तक राज्य सरकार 19,879 करोड़ रुपये मूलधन और 29,956 करोड़ रुपये ब्याज, यानी कुल 49,835 करोड़ रुपये चुका चुकी है. बावजूद इसके राज्य पर अभी भी 60,869 करोड़ रुपये का कर्ज बाकी है और शेष कार्य पूरा करने के लिए अतिरिक्त 47,000 करोड़ रुपये की जरूरत है.
‘जनता के पैसे लूटने वालों से मांगा जाएगा हिसाब’
रेवंत रेड्डी ने यह भी याद दिलाया कि 21 अक्टूबर 2020 को एक इंजीनियर ने महादेवपुर थाने में मेदीगड्डा बैराज को हुए नुकसान की शिकायत दर्ज कराई थी और उस समय पुलिस बल को मौके पर तैनात करना पड़ा था. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री केसीआर ने बैराज का स्थान तुम्मीडीहट्टी से बदलकर मेदीगड्डा कर दिया और उस समय के सिंचाई मंत्री टी. हरीश राव ने तकनीक बदलने में अहम भूमिका निभाई.
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने यह जांच स्थापित दिशा-निर्देशों के अनुसार सीबीआई को सौंपी है. सच्चाई सामने आनी चाहिए और कलेश्वरम परियोजना के नाम पर जनता का धन लूटने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा.
क्या है यह प्रोजेक्ट?
कलेश्वरम लिफ्ट इरिगेशन प्रोजेक्ट (KLIP) तेलंगाना राज्य की सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजनाओं में से एक है. इसे गोदावरी नदी पर बनाया गया है और इसे दुनिया की सबसे बड़ी लिफ्ट इरिगेशन परियोजनाओं में गिना जाता है.
यह एक लिफ्ट इरिगेशन प्रोजेक्ट है, यानी पानी को प्राकृतिक ढलान से नहीं बल्कि पंपिंग और मोटरों के जरिए ऊंचाई पर उठाकर सिंचाई और पेयजल के लिए पहुंचाया जाता है. इस परियोजना का लक्ष्य गोदावरी नदी से पानी उठाकर तेलंगाना के सूखे और जल-संकटग्रस्त जिलों तक पहुंचाना है.
इसके मुख्य उद्देश्य लाखों एकड़ जमीन को पानी उपलब्ध कराना, ग्रामीण और शहरी इलाकों को पीने का पानी देना और राज्य में स्थापित होने वाले उद्योगों को पानी उपलब्ध कराना.