खेल » ‘मेरी ही बदकिस्मती थी…’, मोहम्मद रफी के बारे में कुछ ऐसा कह गए जावेद अख्तर, आखिर क्यों रहा ताउम्र रहा मलाल

‘मेरी ही बदकिस्मती थी…’, मोहम्मद रफी के बारे में कुछ ऐसा कह गए जावेद अख्तर, आखिर क्यों रहा ताउम्र रहा मलाल

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जावेद अख्तर ने अपने करियर में एक से बढ़कर एक फिल्मों के लिए स्क्रिप्ट लिखी हैं. उन्होंने कई एक्टर को सुपरस्टार बनाया है. लेकिन मोहम्मद रफी के साथ काम न कर पाने का मलाल उन्हें ताउम्र रहेगा.

'मेरी ही बदकिस्मती थी...', मोहम्मद रफी के बारे में कुछ ऐसा कह गए जावेद अख्तरजावेद अख्तर का वायरल हो रहा बयान
नई दिल्ली. मुंबई में शनिवार को हुए रूह-ए-रफी कार्यक्रम में महान गायक मोहम्मद रफी को याद किया गया. रफी साहब की याद में इस इवेंट को ऑर्गेनाइज मशहूर संगीतकार और लेखक राजेश धाबरे ने किया था. मंच पर कई जानी-मानी हस्तियां मौजूद थीं, जिन्होंने रफी साहब से जुड़ी यादें और अपने विचार शेयर किए . इस दौरान जावेद अख्तर ने अपनी दिली इच्छा जाहिर की, वहीं जितेंद्र ने उस दौर के नगीनों को याद किया.

गीतकार और पद्मश्री सम्मान से नवाजे गए जावेद अख्तर और वेटरन एक्टर जितेंद्र इस इवेंट में खास मेहमान के तौर पर आए थे. यहां जावेद अख्तर ने कहा कि उनका एक सपना अधूरा रह गया . रफी साहब के लिए गीत लिखना.

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ये हैं जावेद अख्तर के पसंदीदा गीत

इस इवेंट में मीडिया से बातचीत में जावेद अख्तर ने कहा, ‘एक सभ्य समाज हमेशा कलाकारों को याद करता है और उन्हें सम्मान देता है. रफी साहब की आवाज तो पहले ही लोगों के दिलों में बस चुकी है और आज भी उसे वही प्यार और पहचान मिल रही है. मुझे इस बात की खुशी है.जब उनसे उनके पसंदीदा रफी गीतों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि रफी साहब के सारे गाने ही उनके पसंदीदा हैं, लेकिन अगर चुनना पड़े तो जाग दिल-ए-दीवाना, मेरी दुनिया में तुम आई, साथी ना कोई मंजिल और हुई शाम उनका ख्याल आ गया उनके बेहद करीब हैं.

ताउम्र रहा मलाल

जावेद अख्तर ने आगे अपनी बात रखते हुए कहा, ‘यह मेरी बदकिस्मती थी कि मैंने उनके जिंदा रहते गीत लिखना शुरू नहीं किया. उस समय मैं इंडस्ट्री में सिर्फ स्क्रिप्ट राइटर था. आज भी मेरे दिल में यही तमन्ना है कि काश रफी साहब मेरी लिखी हुई लाइनें गाते. उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि मुझे इस बात का हमेशा अफसोस रहा है कि वो मेरे लिखे गीत नहीं गा पाए.

बता दें कि वहीं अभिनेता जितेंद्र ने भी रफी साहब को याद करते हुए कहा, ‘एक वक्त था जब इंडस्ट्री में सिर्फ 4-5 गायक ही हुआ करते थे. अब देश में इतनी प्रतिभा है कि हर दूसरे दिन कोई नया गायक सामने आ जाता है. लेकिन लता जी, आशा जी, रफी साहब और किशोर दा का जादू फिर से वापस लाना नामुमकिन है.’

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