भारत » हो गया मोकामा का फैसला! या छोटे सरकार की उम्मीदवारी अधर में… अशोक-ललन के बीच में झूल रहा भूमिहार पॉलिटिक्स?

हो गया मोकामा का फैसला! या छोटे सरकार की उम्मीदवारी अधर में… अशोक-ललन के बीच में झूल रहा भूमिहार पॉलिटिक्स?

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Anant Lalan Ashok Meeting Inside story: जेडीयू के भीतर अनंत सिंह की उम्मीदवारी को लेकर क्या अभी भी मतभेद? अनंत सिंह की बाहुबली छवि और भूमिहार वोटों पर उनकी पकड़ मोकामा में जेडीयू की जीत सुनिश्चित कर सकती है…ल…और पढ़ें

हो गया मोकामा का फैसला! इन दो नेताओं के बीच में झूल रहा भूमिहार पॉलिटिक्स?अनंत सिंह को लेकर क्या होने वाला है?

पटना. बिहार चुनाव से पहले भूमिहार पॉलिटिक्स पूरे उफान पर है. मोकामा के पूर्व विधायक और बाहुबली अनंत सिंह इसके केंद्र में हैं. जेडीयू के भीतर एक तबका मोकामा से अनंत सिंह की उम्मीदवारी का विरोध कर रही है. वहीं, एक तबका अनंत सिंह के सपोर्ट में खड़ी है. इधर, अनंत सिंह एक दरबार से दूसरे दरबार के बीच हाजिरी लगाने में लगे हैं. शनिवार को अनंत सिंह उर्फ छोटे सरकार केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के दिग्गज ललन सिंह के साथ नजर आए. मोकामा की सड़कों पर ललन सिंह का खूब आदर-सत्कार हुआ. वहीं रविवार को अनंत सिंह दौड़े-दौड़े अशोक चौधरी के घर पटना पहुंच गए. यहां पर उनकी मुलाकात सीएम नीतीश कुमार से भी हो गई. ऐसे में बड़ा सवाल यह कि अनंत सिंह को लेकर आखिर क्या चल रहा है? क्या बीजेपी अनंत सिंह की उम्मीदवारी का विरोध कर रही है? या फिर मोकामा पर फैसला हो गया? या फिर अनंत सिंह की उम्मीदवारी दिलाने को लेकर ललन सिंह और अशोक चौधरी के बीच होड़? आखिर अनंत सिंह को लेकर क्या चल रहा है?

जनता दल (यूनाइटेड) के भीतर अनंत सिंह की उम्मीदवारी को लेकर जबरदस्त खींचतान शुरू हो गई है. एक तरफ केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के दिग्गज नेता ललन सिंह उनके साथ खुलकर मंच साझा कर रहे हैं तो दूसरी तरफ नीतीश कुमार के करीबी और बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी के घर अनंत सिंह की मुलाकात ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है. लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि बीजेपी अनंत सिंह की उम्मीदवारी का विरोध कर रही है. इसमें जेडीयू के ही कुछ नेता बिहार बीजेपी के बड़े नेताओं को उनकी छवि से नुकसान की बात कर रहे हैं. क्या अनंत सिंह का पुराना रिकॉर्ड उनके उम्मीदवारी के बीच में आ रहा है?

क्या हो गया मोकामा से सीट फाइनल?

अनंत सिंह मोकामा से चार बार विधायक रह चुके हैं. बिहार की सियासत में एक बड़ा नाम हैं. 2005 में जेडीयू के टिकट पर पहली बार मोकामा से जीतने वाले अनंत ने 2010 में भी सीट बरकरार रखी. 2015 में नीतीश कुमार से मतभेद के बाद उन्होंने निर्दलीय जीत हासिल की. 2020 में भी वह जीते. लेकिन अवैध हथियार रखने के आरोप में उनकी विधायकी चली गई. साल 2022 में अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी आऱजेडी के टिकट पर चुनाव में जीत दर्ज की. लेकिन 2024 में नीतीश कुमार के एनडीए में साथ आने के बाद फिर से अनंत सिंह की पत्नी जेडीयू खेमे में आ गई. अब अनंत सिंह जब अदालत से बरी हो चुके हैं तो उन्होंने खुद ही चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है.

ललन-अशोक के बीच अनंत कहां?

30 अगस्त 2025 को मोकामा में ललन सिंह और अनंत सिंह का रोड शो इस बात का सबूत था कि जेडीयू अनंत को फिर से मोकामा से मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है. ललन सिंह, जो खुद भूमिहार समुदाय से हैं और मुंगेर से सांसद हैं ने अनंत के साथ मंच साझा कर क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की. समर्थकों ने अनंत सिंह का स्वागत जेसीबी मशीनों से फूल बरसाकर किया. अनंत सिंह और ललन सिंह के काफिले में 100 से ज्यादा गाड़ियां देखी गईं. ललन सिंह ने इसे ‘महायात्रा’ करार दिया और कहा कि मोकामा में अनंत का जलवा बरकरार है.

मोकामा से पटना तक भूमिहार पॉलिटिक्स?

लेकिन अगले ही दिन, 31 अगस्त को अनंत सिंह ने अशोक चौधरी के पटना स्थित आवास पर जाकर नीतीश कुमार से मुलाकात की. अशोक चौधरी, जो जेडीयू के प्रभावशाली नेता और राज्य के कद्दावर मंत्री हैं, उन्होंने अनंत सिंह को सीएम नीतीश कुमार से मिलवाया. खास बात यह है कि इस मुलाकात में अनंत सिंह दो पुत्र नजर आए. अशोक चौधरी बिहार में दलितों के प्रभाशाली नेता हैं. उनकी बेटी शांभवी चौधरी समस्तीपुर से सांसद हैं और उनके पति सायण कुणाल भी बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के सदस्य हैं. भूमिहार जाति से आते हैं. चौधरी अनंत सिंह के पक्ष में पहले भी बयान दिए हैं. जनवरी 2025 में अनंत सिंह के एक गोलीकांड को अशोक चौधरी ने ‘आत्मरक्षा’ करार दिया था, जिसके बाद विपक्ष ने नीतीश सरकार पर अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया. इस मुलाकात ने सवाल खड़े कर दिए कि क्या अशोक चौधरी अनंत की उम्मीदवारी को अपने खाते में लेना चाहते हैं?

जेडीयू के भीतर अनंत सिंह की उम्मीदवारी को लेकर अभी भी मतभेद साफ दिख रहे हैं. एक धड़ा मानता है कि अनंत की बाहुबली छवि और भूमिहार वोटों पर उनकी पकड़ मोकामा में जदयू की जीत सुनिश्चित कर सकती है. दूसरी ओर, कुछ नेता उनकी आपराधिक छवि को लेकर सतर्क हैं, क्योंकि उनके खिलाफ 38 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें सात हत्या और चार अपहरण के मामले शामिल हैं. विपक्ष, खासकर आरजेडी, अनंत की रिहाई और जेडीयू के साथ उनकी नजदीकी को ‘सियासी सौदेबाजी’ करार दे रहा है.

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रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर

भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें

भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा… और पढ़ें

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