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Gangotri Glacier System Survey: तापमान में लगातार हो रही वृद्धि से कई सिस्टम में बदलाव स्पष्ट तौर पर दिखने लगा है. गंगोत्री ग्लेशियर पर भी इसका असर पड़ रहा है. एक नए स्टडी में ग्लेशियर के पिघलने को लेकर च…और पढ़ें
गंगोत्री ग्लेशियर के पिघलने की रफ्तार तेज होने के संकेत मिले हैं. इससे भविष्य में गंगा जैसी नदियों के अस्तित्व के लिए खतरा पैदा हो गया है. (सांकेतिक तस्वीर)जलवायु परिवर्तन के बीच गंगोत्री ग्लेशियर सिस्टम (GGS) को लेकर किए गए एक महत्त्वपूर्ण अध्ययन ने संकेत दिए हैं कि इस क्षेत्र में बर्फ पहले की तुलना में जल्दी पिघलने लगी है. इससे न केवल गंगा की सहायक भागीरथी नदी के प्रवाह पर असर पड़ा है बल्कि जल संसाधन प्रबंधन की चुनौतियां भी बढ़ी हैं. यह अध्ययन Journal of the Indian Society of Remote Sensing में प्रकाशित हुआ है. इसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) इंदौर, अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ यूटा और यूनिवर्सिटी ऑफ डेटन तथा काठमांडू स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया है.

क्लाइमेट चेंज को रोकने का प्रयास नहीं किया गया तो एक दिन ऐसा आएगा जब गंगा नदी ढूंढे नहीं मिलेगी.
क्यों महत्त्वपूर्ण है GGS
अध्ययन में क्या निकला
रिसर्चर ने साल 1980 से 2020 तक के आंकड़ों को Spatial Processes in Hydrology (SPHY) मॉडल और Indian Monsoon Data Assimilation and Analysis (IMDAA) डाटासेट की मदद से जांचा परखा है.
- अध्ययन में पाया गया कि गंगोत्री ग्लेशियर सिस्टम से सबसे ज्यादा जल प्रवाह जुलाई में होता है, जो औसतन 129 घन मीटर प्रति सेकंड तक पहुंचता है.
- 1980–2020 के बीच वार्षिक औसत प्रवाह 28±1.9 घन मीटर प्रति सेकंड आंका गया. इसमें सबसे ज्यादा योगदान हिमपिघल (64%) का था, इसके बाद ग्लेशियर मेल्ट (21%), वर्षा-रनऑफ (11%) और बेस फ्लो (4%) का.
- 1990 के बाद जल प्रवाह का पीक अगस्त से खिसककर जुलाई में आ गया, जिसका कारण सर्दियों की वर्षा में कमी और शुरुआती गर्मियों में पिघलने की रफ्तार बढ़ना बताया गया.
- अध्ययन के अनुसार वार्षिक तापमान में बढ़ोतरी हुई है, हालांकि वर्षा और ग्लेशियर मेल्ट में कोई विशेष रुझान नहीं दिखा.
बेस फ्लो में वृद्धि
मौसम के तेवर हो सकते हैं तल्ख
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन भविष्य में ऐसे अत्यधिक वर्षा वाले घटनाक्रमों को बढ़ा सकता है. इसलिए इस तरह के अध्ययन यह बताने में मददगार हैं कि हिमनदों से पोषित नदी तंत्रों में जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण के लिए लगातार फील्ड मॉनिटरिंग और मॉडलिंग क्यों जरूरी है.

बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें
बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु… और पढ़ें
New Delhi,Delhi
August 31, 2025, 07:10 IST





