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SUBMARINE HUNTER: नए आधुनिक ASW शैलो वॉटर क्राफ्ट पुराने हो चुके अभय क्लास कोर्वेट को रिप्लेस करेंगे. 16 में से एक नौसेना में शामिल हो चुका है. दूसरा सिंतबर में शामिल हो जाएगा. सभी भारतीय नौसेना को सौंपे जाने क…और पढ़ें
पाक सबमरीन का भारतीय शिकारी होंगर सबमरीन का असली शिकारी
पाकिस्तान की खराब आर्थिक स्थिति के बावजूद सैन्य उपकरणों की खरीद में कोई कमी नहीं आ रही. पिछले एक दशक से पाकिस्तान का यही हाल है. बावजूद इसके, साल 2015 में पाकिस्तान ने चीन के साथ 5 से 6 बिलियन डॉलर खर्च कर आठ 039B यूआन क्लास सबमरीन के एक्सपोर्ट वर्जन हंगोर क्लास सबमरीन खरीदी. प्रोजेक्ट S-26 के तहत चीन ने 8 यूआन क्लास एयर इंडीपेंडेंट सबमरीन का करार किया है. 8 सबमरीन में से 4 चीन में और बाकी 4 कराची शिपयार्ड में ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी के तहत तैयार हो रही हैं. अब तक पाकिस्तान को 3 सबमरीन मिल चुकी हैं. जब तक पाकिस्तान के पास सभी 8 सबमरीन आएंगे उससे पहले भारत के पास 16 ASW शैलो वॉटर क्राफ्ट मौजूद होंगे.
सबमरीन का इस्तेमाल डिफेंसिव और ऑफेंसिव ऑपरेशन के लिए किया जाता है. यह आसानी से 30-40 मीटर की गहराई वाले इलाकों में ऑपरेट कर सकती है. अगर कभी पाकिस्तानी हंगोर सबमरीन तट के पास भारतीय जंगी जहाज को निशाना बनाने की कोशिश करेगी, तो शैलो वॉटर क्राफ्ट उसका पता लगाएगी और उसे खत्म कर देगी. एंटी सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट की खासियत है कि यह तट से 100 से 150 नॉटिकल मील दूरी पर दुश्मन की सबमरीन का पता लगा सकती है. यह वॉरशिप नेवल हार्बर से मूव करने वाले बड़े वॉरशिप के लिए रूट को क्लियर करता है. इसमें एंटी सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, लाइट वेट टॉरपीडो, 30 mm नेवल गन, ASW कॉम्बेट सूट, हल माउंटेड सोनार और लो फ्रीक्वेंसी वेरियेबल डेप्थ सोनार से लैस है. यह 25 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार से मूव कर सकता है और एक बार में 3300 किलोमीटर तक सेल कर सकता है.
खासियतों का पावर हाउस है ASW शैलो वॉटर क्राफ्ट
आत्मनिर्भर भारत की आत्मनिर्भर नेवी तेजी से आगे बढ़ रही है. सबसर्फेस सर्वेलांस, सर्च एंड रेस्क्यू मिशन और कम तीव्रता वाले मेरिटाइम ऑपरेशन के लिए बनाया गया है. 1490 टन भारी ASW अजेय की लंबाई 77 मीटर है. साल 2013 में रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने भारतीय नौसेना के लिए कुल 16 ASW शैलो वॉटर क्राफ्ट खरीदने की मंजूरी दी थी. जून 2014 में बाय एंड मेक इंडिया के तहत टेंडर जारी किया गया था. 2019 में कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत हुए. 16 में से 8 कोचिन शिपयार्ड में और 8 GRSE शिपयार्ड कोलकाता में बनाए जा रहे हैं.
August 29, 2025, 18:57 IST





