भारत का उभरता हुआ हाइपरसोनिक मिसाइल प्रोग्राम रुद्रम-4 को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है. यह एयर-टू-सर्फेस (यानी हवा से जमीन पर मार करने में सक्षम) हाइपरसोनिक मिसाइल भारतीय वायुसेना (IAF) की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ाने के लिए डिज़ाइन की गई है. रुद्रम-4 की सबसे बड़ी ताकत इसकी हाइपरसोनिक स्पीड है, जो मैक-5 से अधिक बताई जा रही है. इस गति के कारण ट्रेडिशनल रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम इसे ट्रैक या इंटरसेप्ट करने में असमर्थ हो जाती हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मिसाइल दुश्मन को महज़ कुछ सेकंड की प्रतिक्रिया अवधि देती है, जिससे उसकी हिट-रेट लगभग सुनिश्चित हो जाती है.

टार्गेट पर सटीक प्रहार
रुद्रम-4 मिसाइल न केवल एयर डिफेंस नेटवर्क को दबाने (SEAD) बल्कि पूरी तरह नष्ट करने (DEAD) में भी सक्षम होगी. इसकी मारक क्षमता दुश्मन के रडार, बंकर, और संचार ठिकानों को भी ध्वस्त कर सकती है, जिन पर सामान्य क्रूज़ या बैलिस्टिक मिसाइलें असर नहीं डाल पातीं. प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, रुद्रम-4 की मारक क्षमता 300 से 1,500 किलोमीटर तक हो सकती है. अनुमान है कि इसमें डुअल-स्पीड हाइब्रिड प्रोपल्सन सिस्टम होगी. शुरुआत में सॉलिड रॉकेट बूस्टर और उसके बाद स्क्रैमजेट या रैमजेट इंजन जो इसे लंबी दूरी तक हाइपरसोनिक गति से उड़ान भरने में सक्षम बनाएंगे.
कई फाइटर जेट पर तैनाती

रुद्रम सीरीज का अगला चरण
भविष्य की तैयारी
रुद्रम-4 का विकास DRDO की हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल (HSTDV) परियोजना और स्क्रैमजेट इंजन अनुसंधान से जुड़ा हुआ है. हालांकि, इसके ऑपरेशनल इंडक्शन की तारीख गोपनीय है, लेकिन उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में इसके प्रोटोटाइप परीक्षण शुरू हो सकते हैं.रुद्रम-4 केवल एक मिसाइल नहीं, बल्कि एक फोर्स मल्टीप्लायर है. इसकी हाइपरसोनिक गति, लंबी रेंज, मल्टी-प्लेटफॉर्म तैनाती और सटीक मार्गदर्शन इसे भारतीय वायुसेना की रणनीतिक क्षमता में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला हथियार बनाते हैं. यह भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में ले जाएगा, जिनके पास हाइपरसोनिक सिस्टम हैं.





