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सेना प्रमुख की अल्जीरिया यात्रा: भारत-अल्जीरिया रक्षा सहयोग मजबूत

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ARMY CHIEF ALGERIA VISIT: भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की 25-28 अगस्त की अल्जीरिया यात्रा पर रहे. यह यात्रा भारत की डिफेंस डिप्लोमेसी में एक नया अध्याय की शुरूआत करती है. हाल के सालों में यह पहली बा…और पढ़ें

अफ्रीका बनेगा भारतीय हथियारों का नया बाजार, आर्मी चीफ का अल्जीरिया दौरा पूराअफ्रीका पर है भारत का फोकस
ARMY CHIEF ALGERIA VISIT : आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशी उपकरणों को देश अपना रहा है. भारत की डिफेंस इंडस्ट्री भी तेजी से आगे बढ़ रही है. दुनिया के कई देश भारतीय हथियारों और उपकरणों की खरीद करना चाहते हैं. भारत भी दुनिया के तमाम देशों के साथ सामरिक रिश्तों को बढ़ा रहा है.भारत लगातार इंडियन ओशन रीजन के देशों को प्राथमिकता दे रहा है, जिसमें अफ्रीका पर ज्यादा फोकस है. आर्थिक मदद के साथ सामरिक और सुरक्षा के क्षेत्र में भारत उन देशों के साथ जुड़ा है. इसी कड़ी को मजबूत करने के लिए भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी अल्जीरिया के दौरे पर गए. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आर्मी चीफ का यह पहला विदेशी दौरा है. अफ्रीकी देशों के साथ स्ट्रेटजिक साझेदारी को बढ़ाने के लिए यह भारत के लिए अहम है. चीफ के इस यात्रा का मुख्य फोकस रक्षा सहयोग को बढ़ावा देना रहा. सेना प्रमुख अल्जीरिया के साथ मिलिट्री टू मिलिट्री संबंध मजबूत करने, ट्रेनिंग कार्यक्रमों का विस्तार और क्षमता के विकास पर चर्चा की. भारत अपने अनुभव से अल्जीरिया को ट्रेनिंग और मेंटेनेंस में मदद कर सकता है. अल्जीरिया का सैन्य खर्च तेजी से बढ़ा है. SIPRI के मुताबिक 2023 में अल्जीरिया मिलिट्री आउटले 18.3 बिलियन डॉलर का ऑल टाइम हाई दर्ज किया है, जो 1974 के बाद से अल्जीरिया की सबसे बड़ी छलांग है. यह आधुनिकीकरण और ट्रेनिंग संसाधनों की तरफ इशारा करता है. यहां भारत अभ्यास और टेक्नॉलोजी सहयोग के साथ जुड़ सकता है. पिछले कुछ सालों में चीन ने अफ्रीका में अपनी गतिविधियों को तेजी से बढ़ाया है. आर्थिक और सामरिक तौर पर गरीब अफ्रीकी देशों को अपने जाल में फंसाया है.

अफ्रीका है भारत के लिए खास
सामरिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए सीडीएस जनरल अनिल चौहान पिछले साल अल्जीरिया गए थे, जहां उन्होंने अल्जीरियाई पीपुल्स नेशनल आर्मी के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल सईद चानेग्रिहा के साथ एक ऐतिहासिक रक्षा सहयोग समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे. अल्जीरिया के पास विशाल हाइड्रोकार्बन के भंडार हैं, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम हैं. साथ ही क्षेत्रीय अस्थिरता और सुरक्षा खतरों को देखते हुए भारत और अल्जीरिया आतंकवाद के खिलाफ पहल और खुफिया जानकारी साझा करने में सहयोग कर सकते हैं. अक्टूबर 2024 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की स्टेट विजिट पर अल्जीरिया गई थी. भारत के लिए अफ्रीका इतना मायने रखता है, यह इससे ही साफ हो जाता है कि साल 2023 में वॉयस ऑफ़ द ग्लोबल साउथ प्रक्रिया का आयोजन किया गया था. G20 शिखर सम्मेलन के दौरान, अफ्रीकी संघ को G20 के स्थायी सदस्य के रूप में शामिल करने का समर्थन किया. ये ऐसे कदम हैं जो उसकी अफ्रीकी कूटनीति को सिर्फ़ लेन-देन तक सीमित नहीं रखते. इसी साल 30 जुलाई से 1 अगस्त तक अल्जीयर्स में डिफेंस सेमिनार का भी आयोजन किया गया था जिसमें भारतीय कंपनियों ने यूएवी, सर्वेलांस रडार और ऑर्टीलरी सिस्टम को शोकेस किया था.

मिशन SAGAR से MAHASAGAR की ओर बढ़ते कदम
हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के देशों के साथ-साथ अफ्रीका के देशों के साथ भारत ने राजनयिक रिश्ते बेहतर किए हैं. सामरिक रिश्तों को समुद्र के जरिए भी तेजी से बढ़ाया जा रहा है. उसी कड़ी में पहली बार नौसेना ने दो अभियान भी शुरू किए थे. पहला अभियान था IOR यानी इंडियन ओशन शिप सागर और दूसरा अभियान था अफ्रीका इंडिया की मैरिटाइम एंगेजमेंट (AIKEYME). भारत और अफ्रीका ने समुद्री सुरक्षा को तरजीह देते हुए भारतीय नौसेना और तंजानिया पीपुल्स डिफेंस फोर्स मिलकर AIKEYME का आयोजन किया था. अभ्यास तंजानिया के दार-ए-सलाम में 13 से 18 अप्रैल तक आयोजित किया गया. 6 दिन के इस अभ्यास में कोमोरोस, जिबूती, इरीट्रिया, केन्या, मेडागास्कर, मॉरीशस, मोजाम्बिक, सेशेल्स और दक्षिण अफ्रीका ने हिस्सा लिया। इस अभ्यास का मकसद समुद्री सुरक्षा के अलग-अलग पहलुओं पर ट्रेनिंग देना और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना था. इसके अलावा भारतीय नौसेना ने अगस्त 2021 को अल्जीरियाई नौसेना के साथ अपना पहला पासेक्स अभ्यास को अल्जीरियाई तट पर अंजाम दिया था. इसमें आईएनएस तबर और एएनएस एज़ादजेर ने हिस्सा लिया था. दिसंबर 2024 में आईएनएस तुशील ने भारत की यात्रा के दौरान मोरक्को के कैसाब्लांका बंदरगाह पर एक पड़ाव डाला था. यह अटलांटिक-भूमध्य सागर तट पर भारत की उपस्थिति का एक और ठोस संकेत है.

चीन का बढ़ता प्रभाव
चीन का अफ्रीका में स्ट्रेटिजिक इंटरेस्ट साल 2017 में जिबूती में अपना पहला ओवरसीज मिलिट्री बेस स्थापित करने से ही साफ हो गया. यह देश इतना महत्वपूर्ण है कि दुनिया के दो धुर विरोधी अमेरिका और चीन के मिलिट्री बेस इस जगह पर हैं. खास बात यह है कि देश रेड सी और अदन की खाड़ी के किनारे है. चीन अपना प्रभाव डालने के लिए अफ्रीकी देशों को कम कीमत और सस्ते लोन में एयरक्राफ्ट, एम्यूनिशन, आर्टिलरी गन, मिसाइल, रडार और रॉकेट सिस्टम दे रहा है. SIPRI की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा भी हुआ था. रिपोर्ट के मुताबिक साल 2019 से 2023 के बीच 21 अफ्रीकी देशों में चीनी हथियारों की खरीद हो रही है. 10 में 7 अफ्रीकी देशों की सेना चीनी बख्तरबंद गाड़ियों का इस्तेमाल कर रही है. खास बात यह है कि चीनी नेवल गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर मामिंग, फ्रीगेट सान्या और सप्लाई शिप वेईशान हू ने जुलाई 2023 में दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन का दौरा किया था. इस दौरान ये घाना, आइवरी कोस्ट, नाइजीरिया और कॉंगो में रुके थे.

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